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यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम को ‘असंवैधानिक’ करार देने वाले आदेश पर लगी रोक, योगी सरकार को जारी हुआ नोटिस

UP Madarsa Education Act 2004: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम को ‘असंवैधानिक’ करार देने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई।
Written by: एजुकेशन डेस्क | Edited By: Jyoti Gupta
Updated: April 05, 2024 14:54 IST
यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम को ‘असंवैधानिक’ करार देने वाले आदेश पर लगी रोक  योगी सरकार को जारी हुआ नोटिस
UP मदरसा एक्ट रद्द करने के फैसले पर रोक।
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सुप्रीम कोर्ट ने UP मदरसा एक्ट रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने'यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004' को रद्द करने के फैसले पर कहा कि इससे 17 लाख छात्रों पर असर पड़ेगा। दूसरे स्कूल में ट्रांसफर करना उनके लिए ठीक नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार से इस पर जवाब मांगा है।

यूपी सरकार को जारी हुआ नोटिस

दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम को ‘असंवैधानिक’ करार देने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई। उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम को ‘‘असंवैधानिक’’ करार दिया गया था। यानी अब UP मदरसा एक्ट रद्द नहीं होगा।

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दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर शुक्रवार को अंतरिम रोक लगा दी जिसमें उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को ‘असंवैधानिक’ और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करने वाला करार दिया गया था। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिकाओं पर केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया।

पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। पीठ ने कहा,‘‘ मदरसा बोर्ड का उद्देश्य नियामक सरीखा है और प्रथम दृष्टया इलाहाबाद उच्च न्यायालय की यह बात सही नहीं प्रतीत होती कि बोर्ड का गठन धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन होगा।’’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 2004 के अधिनियम के प्रावधानों के गलत अर्थ निकाले। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 22 मार्च को उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को ‘‘असंवैधानिक’’ और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करने वाला करार दिया था।

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उच्च न्यायालय ने साथ ही राज्य सरकार को वर्तमान छात्रों को औपचारिक स्कूल शिक्षा प्रणाली में समायोजित करने को कहा था। अदालत ने यह आदेश अंशुमान सिंह राठौर नाम के शख्स की याचिका पर दिया। याचिका में उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी।

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