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Republic Day Poem in Hindi 2024: गणतंत्र दिवस पर सुनाएं ऐसी शानदार कविताएं, जमकर बजेंगी तालियां

Republic Day Poem in Hindi 2024 (गणतंत्र दिवस पर कविता 2024): हम आपको गणतंत्र दिवस के मौके पर कई कविताएं दे रहे हैं जिसे सुना कर या लिख कर आप महफिल लूट सकते हैं।
Written by: Suneet Kumar Singh
Updated: January 10, 2024 12:28 IST
republic day poem in hindi 2024  गणतंत्र दिवस पर सुनाएं ऐसी शानदार कविताएं  जमकर बजेंगी तालियां
Republic Day Poem in Hindi 2024: गणतंत्र दिवस पर हिंदी कविताओं से जीत सकते हैं सबका दिल
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Republic Day Poem in Hindi 2024 (गणतंत्र दिवस पर कविता 2024): 26 जनवरी वह तारीख है जो भारत के लिए काफी अहम है। साल 1950 में इसी तारीख को हमारे देश का संविधान लागू हुआ था। तब से आज तक हर साल इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। हर साल की तरह इस बार भी गणतंत्र दिवस की देशभर में झूम है। 26 जनवरी को देखते हुए तैयारियां जोरों पर हैं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर देशभर के सरकारी - गैर सरकारी संस्थाओं के साथ ही निजी और सरकारी स्कूलों में भी कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। इन कार्यक्रमों में ध्वजारोहण से लेकर भाषण, निबंध और कविता प्रतियोगिता जैसी चीजें होती हैं।

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अगर आप भी गणतंत्र दिवस पर कविता सुना या लिख हर किसी की तालियां बटोरना चाहते हैं तो इसमें हम आपकी मदद कर सकते हैं। हम आपको गणतंत्र दिवस के मौके पर कई कविताएं दे रहे हैं जिसे सुना कर या लिख कर आप महफिल लूट सकते हैं। आइए डालते हैं एक नजर:

Republic Day Poems (26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर कविता)

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,
अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे नाचे खुशी मनाये
अपना गणतंत्र दिवस खुशी से मनाएंगे,
देश पर कुर्बान हुए शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे।

26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था,
भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंडा फहराया था
था वो ऐतिहासिक पल हमारा, जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।

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विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है
पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है
इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाएं,
थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये,
आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,
अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे नाचे खुशी मनाएं।

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हम आजादी के मतवाले,
झूमे सीना ताने।
हर साल मनाते उत्सव,
गणतंत्र का मजहब जाने।
संविधान की भाषा बोले,
रग-रग में कर्तव्य घोले।
गुलामी की बेड़ियों को,
जब रावी-तट पर तोड़ा था।
उसी अवसर पर तो,
हमनें संविधान से नाता जोड़ा था।
हर साल हम उसी अवसर पर,
गणतंत्र उत्सव मनाते हैं।।
पूरा भारत झूमता रहता है,
और हम नाचते-गाते हैं।
रायसीना की पहाड़ी से,
शेर-ए-भारत बिगुल बजाता है।
अपने शहीदों को करके याद,
पुनः शक्ति पा जाता है।

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मेरा भारत, मेरी मातृभूमि,
तू है अद्भुत और सुंदर।
तेरी धरती, तेरा आकाश,
तेरी नदियाँ, तेरे पर्वत,
सब ही अविस्मरणीय हैं।

तेरे लोग, तेरे संस्कृति,
तेरी विरासत, तेरा इतिहास,
सब ही गौरवशाली हैं।

तू है सत्य, तू है धर्म,
तू है शांति, तू है अहिंसा।
तू है ज्ञान, तू है दर्शन,
तू है प्रकाश, तू है जीवन।

मेरा भारत, मेरी मातृभूमि,
तू है मेरे हृदय में बसता।
मैं तेरा सदैव ऋणी रहूंगा।

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