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यूपी के भाजपा उम्मीदवार

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 की लोकसभा सीटों में से 63 पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में देश का सबसे बड़ा राज्य (आबादी और लोकसभा सीटों की संख्या के मामले में) भाजपा के गढ़ के रूप में उभरा है।
Written by: स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली | Updated: May 10, 2024 12:42 IST
यूपी के भाजपा उम्मीदवार
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भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 की लोकसभा सीटों में से 63 पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में देश का सबसे बड़ा राज्य (आबादी और लोकसभा सीटों की संख्या के मामले में) भाजपा के गढ़ के रूप में उभरा है।

2014 के पहले के चार लोकसभा चुनावों (1998, 1999, 2004, 2009) में भाजपा को कुल जितने वोट मिले थे, उतना सिर्फ पिछले दो आम चुनाव में मिले हैं। 2009 की तुलना में 2019 में भाजपा के वोट प्रतिशत में 32 प्रतिशत की उछाल देखी गई थी। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में इतनी ऊंची छलांग अपनी स्थापना के बाद कभी नहीं लगाई थी।

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भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। पिछले आम चुनाव में राज्य में भाजपा का वोट प्रतिशत भले ही बढ़ा हो लेकिन सीटों की संख्या कम हुई है। 2014 में भाजपा ने यूपी की 80 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2019 में सीटों की संख्या घटकर 62 रह गई थी।

पिछली बार रह गई कसर को भाजपा इस बार पूरा करना चाहती है। भाजपा ने कुछ सीटों पर अपने सिटिंग सांसदों को रिपीट किया है, तो कहीं तीन बार के सांसद का टिकट काट दिया है। यहां हम भाजपा के अब तक घोषित उम्मीदवारों में से सबसे चर्चित 10 उम्मीदवारों के बारे में जानेंगे:

सीटउम्मीदवार
वाराणसीनरेंद्र मोदी
अमेठीस्मृति ईरानी
लखनऊराजनाथ सिंह
सुल्तानपुरमेनका गांधी
उन्नावसाक्षी महाराज
खीरीअजय मिश्रा टेनी
मथुराहेमा मालिनी
मेरठअरुण गोविल
आज़मगढ़दिनेश यादव निरहुआ
डुमरियागंजजगदंबिका पाल
उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 17 अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। भाजपा 15 आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा कर चुकी है।

वाराणसी से तीसरी बार मैदान में नरेंद्र मोदी

Varanasi Lok Sabha Election: उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट पिछले दो आम चुनाव से देश को प्रधानमंत्री दे रही है। इस बार भी नरेंद्र मोदी वाराणसी सीट से ही मैदान में हैं। गुजरात निवासी नरेंद्र मोदी साल 2014 में जब पहली बार वाराणसी से चुनाव लड़ने पहुंचे थे, तो कहा था, "न मुझे किसे ने भेजा है, न मैं यहां आया हूं, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया…"

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नरेंद्र दामोदरदास मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को गुजरात के एक छोटे से शहर वडनगर (मेहसाणा जिला) में हुआ था। मोदी सात या आठ साल की उम्र में स्थानीय आरएसएस शाखा में शामिल हो गए थे। एमवी कामथ और के. रंदेरी द्वारा लिखित मोदी की जीवनी के अनुसार, बहुत छोटी आयु में वह संन्यासी बनने के बारे में सोचने लगे थे।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में रहते हुए इस तरह का आह्वान असामान्य नहीं है। नरेंद्र मोदी कलकत्ता (आज का कोलकाता) में रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ और फिर हिमालय गए। नीलांजन मुखोपाध्याय को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था, "मैं अल्मोडा में विवेकानन्द आश्रम गया, मैंने हिमालय में बहुत भ्रमण किया। मुझ पर उस समय देशभक्ति की भावना के साथ-साथ अध्यात्मवाद का भी कुछ प्रभाव था - यह सब मिश्रित था।"

उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
नरेंद्र मोदी
(भाजपा)
विजेता6,74,66463.62%
शालिनी यादव
(सपा)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी1,95,15918.4%
वाराणसी लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

वाराणसी लोकसभा सीट के लिए सातवें चरण में 1 जून को वोट डाले जाएंगे। नरेंद्र मोदी के सामने इंडिया ब्लॉक के अजय राय (कांग्रेस नेता) हैं।

अमेठी: पिछले चुनाव में ढह गया था कांग्रेस का गढ़

Amethi Lok Sabha Election: पिछले आम चुनाव में सबसे अधिक चर्चित लोकसभा सीटों में अमेठी का नाम था। हो भी क्यों न, भाजपा की स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के चुनावी चेहरे राहुल गांधी को कांग्रेस के ही गढ़ में हरा दिया था। मॉडल/अभिनेत्री से राजनेता बनने वालीं स्मृति ईरानी की कहानी दिलचस्प है। भाजपा की फायर ब्रांड नेता बन चुकीं ईरानी पहले टीवी सीरियल में काम करती थीं। उन्हें 'सास भी कभी बहू थी' से लोकप्रियता मिली थी।

टीवी सीरियल में काम मिलने से पहले ईरानी एनडीटीवी (न्यूज चैनल) में बतौर पत्रकार काम करना चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने एनडीटीवी को पत्र भी लिखा था। लेकिन उन्हें कभी जवाब नहीं आया। एक बार वह पूछताछ के लिए एनडीटीवी के गेट पर भी पहुंच गई थीं। लेकिन गार्ड ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया था।

स्मृति ईरानी साल 2003 में भाजपा में शामिल हुई थी, लेकिन उनका दावा रहा है कि पार्टी से उनका वैचारिक संबंध पुश्तैनी है। एक इंटरव्यू में ईरानी ने अपने दलीय संबंधों को प्राचीन, परखा हुआ और पारिवारिक विरासत में लिपटा हुआ बताते हुए कहा था, "तीन पीढ़ियों से हम पार्टी के समर्थक हैं… मेरे दादाजी स्वयंसेवक थे, मेरी माँ भाजपा बूथ कार्यकर्ता थीं।"

एक बंगाली-पंजाबी परिवार में जन्मीं और एक पारसी, जुबिन ईरानी से विवाहित, तीन बच्चों की माँ (जिनमें उनके पति की पहली शादी का एक बच्चा भी है), स्मृति ईरानी को अब भाजपा में नरेंद्र मोदी के इनर सर्कल का प्रमुख सदस्य माना जाता है।

उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
स्मृति ईरानी
(भाजपा)
विजेता4,68,51449.71%
राहुल गांधी
(कांग्रेस)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी4,13,39443.86%
अमेठी लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

कांग्रेस का गढ़ अमेठी से अतीत में चार गांधी - संजय गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी जीत चुके हैं। कांग्रेस के अलावा, बीजेपी और जनता पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश की इस सीट को दो बार जीता है। इस सीट की वजह से गांधी परिवार में दरार पड़ गई थी। विस्तार से पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करें:

Maneka Gandhi
(Express archive photo)

2019 में अमेठी की ऐतिहासिक जीत से पहले 2014 में भी स्मृति ईरानी को अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ खड़ा किया गया था। स्मृति ईरानी 2014 में एक लाख वोटों के अंतर से राहुल गांधी से हार गई थीं। हालांकि यह अंतर बड़ा दिखता है, लेकिन इसे स्मृति ईरानी की चुनौतीपूर्ण कोशिशों से हासिल किया गया था।

राहुल गांधी ने 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में लगभग दो लाख वोटों के अंतर से अमेठी सीट जीती थी, और क्रमशः 66% और 72% वोट शेयर हासिल किया था। 2019 में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को कांग्रेस की सीट से हटा दिया था, चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने अमेठी में गांधी की घटती लोकप्रियता को स्वीकार किया था।

अमेठी लोकसभा सीट के लिए पांचवें चरण में 20 मई को वोट डाले जाएंगे। यूपी में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन हैं, अमेठी की सीट कांग्रेस के हिस्से हैं, पार्टी ने अभी तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।

लखनऊ से राजनाथ सिंह लगातार तीसरी बार मैदान में

Lucknow Lok Sabha Election: पिछले दो आम चुनावों में लखनऊ की जनता ने लगातार भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनथा सिंह को अपना प्रतिनिधि चुना है।

नरेंद्र मोदी के दोनों कार्यकाल में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालाने वाले राजनाथ सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत आरएसएस के छात्र संगठन ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) से की थी। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में जनसंघ के अन्य सदस्यों की तरह राजनाथ को गिरफ्तार किया गया था। 12 जुलाई, 1975 को उनकी गिरफ्तारी के समय, वह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में एक कॉलेज में भौतिकी पढ़ा रहे थे।

राजनाथ सिंह के राजनीतिक मूल्यों को आकार देने में उनकी मां गुजराती देवी की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। जब राजनाथ सिंह को मिर्जापुर जेल से इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के पास नैनी केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित किया जा रहा था तब उनकी मां उनसे मिलने आई थीं और कहा था, "मेरे बेटे क्षमा की भीख कभी मत मांगो, भले ही तुम्हें जीवन भर जेल में ही क्यों न बिताना पड़े।" वह आखिरी बार था जब राजनाथ ने अपनी मां को देखा।

जून 1976 में गुजराती देवी का निधन हो गया, जबकि राजनाथ अभी भी हिरासत में थे। जब तक उन्हें रिहा किया गया, तब तक वह कठोर राजनेता बन चुके थे।

उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
राजनाथ सिंह
(भाजपा)
विजेता633,02657.08%
पूनम शत्रुघ्न सिन्हा
(समाजवादी पार्टी)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी285,72425.76%
लखनऊ लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

लखनऊ लोकसभा सीट के लिए पांचवें चरण में 20 मई को वोट डाले जाएंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने सपा ने रविदास मेहरोत्रा को उतारा है।

सुल्तानपुर से दूसरी बार मैदान में मेनका गांधी

Sultanpur Lok Sabha Election: भाजपा ने सुल्तानपुर से गांधी परिवार की सदस्य और सीटिंग सांसद मेनका गांधी को मैदान में उतारा है। 2014 में इस सीट पर भाजपा को 16 साल बाद जीत मिली थी, तब मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी सांसद चुने गए थे।

सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर बसपा का दबदबा रहा है। 1999 और 2004 में बसपा को जीत मिली थी। 2009, 2014, 2019 में बसपा दूसरे नंबर पर रही है। पिछले आम चुनाव में मेनका गांधी ने बसपा के चंद्र भद्र सिंह सोनू को हराया था, लेकिन जीत का अंतर बहुत कम था।

मेनका गांधी की चुनावी राजनीति में एंट्री पति संजय गांधी की मौत के बाद हुई थी। सास इंदिरा गांधी की इच्छा के विरुद्ध जाकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। इसके कारण इंदिरा गांधी ने उन्हें घर से भी निकाल दिया था। विस्तार से पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करें:

Maneka Gandhi
(Express archive photo by Neeraj Priyadarshi)
उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
मेनका गांधी
(भाजपा)
विजेता459,19646.36%
चंद्र भद्र सिंह सोनू
(बसपा)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी444,67044.89%
सुल्तानपुर लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

सुल्तानपुर लोकसभा सीट के लिए छठे चरण में 25 मई को वोट डाले जाएंगे। मेनका गांधी के सामने सपा ने भीम निषाद को उतारा है, बसपा ने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।

बाबा नहीं बवाल हूं, भाजपा का काल हूं- कभी उन्नाव सांसद ने दिया था नारा

Unnao Lok Sabha Election: भाजपा का गढ़ रहे उन्नाव से पिछले दो बार से साक्षी महाराज (Swami Sachchidanand Hari Sakshi) सांसद चुने जा रहे हैं। 'राम मंदिर आंदोलन' के वर्षों में इस सीट से लगातार तीन बार (1991, 1996, 1998) भाजपा नेता देवी बक्स सिंह सांसद बने थे।

साक्षी महाराज भी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चले 'आंदोलन' का हिस्सा माने जाते हैं। वह भाजपा के एक प्रमुख हिंदुत्व चेहरा हैं, जो अक्सर अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। भगवा पोशाक उनका ट्रेडमार्क है।

लोध समाज से आने वाले साक्षी महाराज की छवि बाहुबली नेता की भी रही है। इतिहास में एक समय ऐसा भी रहा, जब भगवाधारी नेता भाजपा के खिलाफ हो गए थे। 1999 में उन्होंने भाजपा छोड़, तुरंत पार्टी को चुनौती दी। साक्षी महाराज ने बाबरी मस्जिद विध्वंस में अपनी संलिप्तता के आरोपों से इनकार करते हुए नारा दिया था- "बाबा नहीं बवाल हूं, भाजपा का काल हूं"।

एक साल बाद वह समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सदस्य बन गए क्योंकि मुलायम सिंह यादव लोध समुदाय से एक नेता चाहते थे। वे लंबे समय तक एक साथ नहीं रहे। साक्षी पुराने सहयोगी कल्याण सिंह की राष्ट्रीय क्रांति पार्टी में शामिल हो गईं।

इसके बाद वह 2007 में एटा के सोरोन से विधानसभा चुनाव हारे, फिर 2009 में फर्रुखाबाद से लोकसभा चुनाव हारे। उन्हें राहत तब मिली जब 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने उन्हें वापस ले लिया। उन्होंने मैनपुरी के भोगांव से चुनाव लड़ा और चौथे स्थान पर रहे। 2014 में नरेंद्र मोदी की लहर के कारण वह उन्नाव से सांसद चुने गए थे। 2019 में भी पार्टी ने उन पर भरोसा किया और अब 2024 में भी मौका दिया है।

उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
साक्षी महाराज
(भाजपा)
विजेता703,50757.39%
अरुण शंकर शुक्ला
(सपा)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी302,55144.89%
उन्नाव लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

उन्नाव लोकसभा सीट के लिए चौथे चरण में 13 मई को वोट डाले जाएंगे। साक्षी महाराज के सामने सपा ने अनु टंडन और बसपा ने अशोक कुमार पांडेय को उतारा है।

खीरी से अजय मिश्रा टेनी को तीसरी बार मौका

Khiri Lok Sabha Election: खीरी लोकसभा सीट पर 2014 और 2019 के हुए चुनावों में भाजपा के अजय कुमार 'टेनी' ने जीत हासिल की थी। वह मोदी कैबिनेट में मंत्री भी रहे हैं। 25 सितंबर, 1960 को लखीमपुर खीरी में जन्मे मिश्रा की शिक्षा क्राइस्ट चर्च कॉलेज और डीएवी कॉलेज, कानपुर में हुई। उनके पास बीएससी और एलएलबी की डिग्री है।

मिश्रा पहली बार 2014 में अपने निकटतम बसपा प्रतिद्वंद्वी से 1 लाख वोटों से जीतकर सांसद बने थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में, उन्होंने सपा उम्मीदवार के खिलाफ अपनी जीत का अंतर दोगुना कर 2 लाख से अधिक वोटों तक पहुंचा दिया था।

2012 में लखीमपुर खीरी निर्वाचन क्षेत्र के निघासन विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में जीतने से पहले, मिश्रा भाजपा की लखीमपुर खीरी इकाई में पदाधिकारी हुआ करते थे। अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर प्रदर्शनकारी किसानों पर थार (कार) चढ़ाने का आरोप है।

उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
अजय मिश्रा
(भाजपा)
विजेता609,58954.05%
डॉ. पूर्वी वर्मा
(सपा)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी390,78234.65%
खीरी लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

खीरी लोकसभा सीट के लिए चौथे चरण में 13 मई को वोट डाले जाएंगे। अजय मिश्रा के सामने सपा ने उत्‍कर्ष वर्मा और बसपा ने अंशय कालरा रॉकीजी को उतारा है।

तमिल भाषी हेमा मालिनी मथुरा से सांसद

Mathura Lok Sabha Election: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से अभिनेत्री और भाजपा नेता हेमा मालिनी सांसद हैं। वह 2014 और 2019 के आम चुनाव में लगातार इस सीट से जीती हैं। बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल कही जाने वाली और सीता और गीता, शोले और रजिया सुल्तान जैसी फिल्मों से मशहूर हेमा मालिनी ने 2004 में राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने राजनीतिक करियर की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से ही की की थी।

हेमा मालिनी ने 2004 से 2009 तक राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया और 2010 में उन्हें पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया था। 1999 में उन्होंने पंजाब के गुरदासपुर से भाजपा सांसद दिवंगत फिल्म स्टार विनोद खन्ना के लिए प्रचार किया था। हेमा मालिनी से जुड़े दिलचस्प किस्से पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करें:

Hema
हेमा मालिनी का जन्म 16 अक्टूबर, 1948 को तमिलनाडु केअम्मानकुंडी में हुआ था।

लोकसभा के लिए 2014 के आम चुनावों में, हेमा मालिनी ने मथुरा के मौजूदा सांसद, जयंत चौधरी (आरएलडी) को हराया और फिर लोकसभा के लिए चुनी गईं। उन्होंने 2019 के आम चुनाव में सीट बरकरार रखी और 2024 में भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।

उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
हेमा मालिनी
(भाजपा)
विजेता671,29361.2%
कुंवर नरेंद्र सिंह
(RLD)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी377,82234.44%
मथुरा लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

मथुरा लोकसभा सीट के लिए दूसरे चरण में 26 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। हेमा मालिनी के सामने कांग्रेस ने मुकेश धनगर और बसपा ने सुरेंद्र सिंह को उतारा है।

कांग्रेस प्रचारक रहे 'राम' को भाजपा ने बनाया उम्मीदवार

Meerut Lok Sabha Election: भाजपा ने मेरठ से अपने तीन बार के सीटिंग सांसद राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काटकर अभिनेता अरुण गोविल को उम्मीदवार बनाया है। रामानंद सागर के टीवी ‘रामायण’ में राम की भूमिका निभाने वाले गोविल का जन्मस्थान मेरठ ही है। 2021 में भाजपा में शामिल होने से पहले गोविल राजीव गांधी के साथ मिलकर कांग्रेस का प्रचार कर चुके हैं।

अरुण गोविल के बारे में विस्तार से जानने के लिए फोटो पर क्लिक करें:

टीवी सीरियल रामायण का एक पोस्टर (Express archive photo)
उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
राजेंद्र अग्रवाल
(भाजपा)
विजेता586,18448.44%
हाजी मोहम्मद याकूब
(BSP)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी581,45548.05%
मेरठ लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

मेरठ लोकसभा सीट के लिए दूसरे चरण में 26 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। अरुण गोविल के सामने सपा ने सुनीता वर्मा और बसपा ने देवव्रत त्यागी को उतारा है।

आजमगढ़ से दिनेश यादव 'निरहुआ'

Azamgarh Lok Sabha Election: सपा के गढ़ में 2022 का उपचुनाव जीतकर सांसद बने भोजपुरी फिल्म अभिनेता और गायक दिनेश लाल यादव निरहुआ पर भाजपा ने एक बार फिर भरोसा जाता है।

निरहुआ ने 2019 में भाजपा के उम्मीदवार के रूप में आज़मगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ हार गए थे। यूपी विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अखिलेश यादव ने सीट खाली कर दिया और उपचुनाव में अपने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा, जिसे निरहुआ ने 8,000 से अधिक वोटों से हराकर सपा के गढ़ में सेंध लगाई।

निरहुआ एक प्रसिद्ध भोजपुरी अभिनेता-गायक होने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनथा के करीबी भी माने जाते हैं।

हालांकि, ओबीसी समुदाय से आने वाले निरहुआ को आज़मगढ़ में "बाहरी" होने की चुनौती का सामना करना पड़ा क्योंकि वह ग़ाज़ीपुर से आते हैं, लेकिन पिछले हफ्ते निरहुआ के लिए चुनाव प्रचार करते हुए एक सार्वजनिक बैठक में आदित्यनाथ ने गोरखपुर लोकसभा का उदाहरण दिया था।

सीएम बनने के बाद 2017 में उन्होंने जो सीट खाली की थी, उन्होंने कहा कि 2019 के चुनावों में उन्होंने जौनपुर से भोजपुरी अभिनेता रवि किशन को मैदान में उतारा, क्योंकि वह चाहते थे कि पूर्वांचल का कोई युवा वहां से चुनाव लड़े। रवि किशन चुनाव जीत गए। इस प्रकार आदित्यनाथ ने सभा को आश्वस्त करना चाहा कि यदि निरहुआ चुनाव जीतेंगे, तो वह आज़मगढ़ में रहेंगे और इसके विकास के लिए काम करेंगे।

उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
अखिलेश यादव
(सपा)
विजेता621,57860.83%
दिनेश लाल यादव 'निरहुआ'
(भाजपा)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी361,70435.4%
आजमगढ़ लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

आजमगढ़ लोकसभा सीट के लिए छठे चरण में 25 मई को वोट डाले जाएंगे। निरहुआ के सामने सपा ने धर्मेंद्र यादव को उतारा है।

डुमरियागंज से जगदंबिका पाल

डुमरियागंज से जगदंबिका पाल जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। 2009 में कांग्रेस की टिकट पर जीत दर्ज करने के बाद, 2014 और 2019 में भाजपा से भी सांसद बन चुके हैं।

जगदंबिका पाल एक अनुभवी भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जिनका कई दशकों का करियर है। 21 अक्टूबर, 1950 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में जन्मे पाल का प्रारंभिक जीवन बहुत ही साधारण था। उन्होंने अपनी शिक्षा अवध विश्वविद्यालय में प्राप्त की, जहां उन्होंने राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त की, जिसने उनके भविष्य के राजनीतिक करियर की नींव रखी।

पाल की राजनीतिक यात्रा कांग्रेस से शुरू हुई, जहां उन्होंने विभिन्न पदों पर काम किया और राज्य की राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल रहे। उन्हें 1998 में प्रसिद्धि मिली जब उन्होंने कुछ समय के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।

2014 के लोकसभा चुनाव में जगदंबिका पाल ने भाजपा में शामिल होकर अपनी राजनीतिक निष्ठा में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के डुमरियागंज निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और आसान अंतर से जीत हासिल की।

पाल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा और डुमरियागंज निर्वाचन क्षेत्र में अपनी सीट बरकरार रखी। उनके पुन:निर्वाचन ने क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक उपस्थिति और उनकी निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित किया है।

एक सांसद के रूप में पाल के कार्यकाल को विकास के मुद्दों, विशेष रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जाना जाता है। वह अपने मतदाताओं के कल्याण के समर्थक रहे हैं और उनकी चिंताओं को दूर करने की दिशा में काम किया है।

उम्मीदवारपरिणामवोटवोट शेयर
जगदंबिका पाल
(भाजपा)
विजेता492,25350.56%
आफताब आलम
(बसपा)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी386,93239.75%
डुमरियागंज लोकसभा चुनाव 2024: पिछले चुनाव के परिणाम

डुमरियागंज लोकसभा सीट के लिए छठे चरण में 25 मई को वोट डाले जाएंगे। इंडिया गंठबंधन या बसपा ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।

उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव 2024

2024 के आम चुनाव सात चरणों में होंगे। पहला चरण 19 अप्रैल और आखिरी चरण 1 जून को है। वोटों की गिनती 4 जून को होगी। उत्तर प्रदेश में कुल सात चरणों में वोटिंग होगी। यूपी में वोटर्स की संख्या 15.29 करोड़ है, इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 8.14 करोड़ और महिला मतदाताओं की संख्या 7.14 करोड़ है। युवा मतदाताओं (18 से 19 साल के) की संख्या 20.41 लाख है, ये सभी इस बार पहली बार वोट देंगे। उत्तर प्रदेश में इस बार वोटिंग के लिए 1.61 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

पिछले साल का हाल Lok Sabha Election 2019 Results Uttar Pradesh?

पार्टीसीटों की संख्या
भाजपा62
बसपा10
सपा5
कांग्रेस1
अन्य2
2019 के परिणाम

लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश का पर‍िणाम लगभग एकतरफा रहा था। राज्‍य की 80 लोकसभा सीटों में से 62 पर भाजपा को जीत मिली थी।

Lok Sabha Elections 2024 Uttar Pradesh Schedule

मतदान चरण और तारीखसीटें जहां पड़ेंगे वोट
पहला चरण (19 अप्रैल) - आठ सीटेंसहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत
दूसरा चरण (26 अप्रैल) - आठ सीटेंअमरोहा, मेरठ, बागपत, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और गाजियाबाद
तीसरा चरण (7 मई) - 10 सीटेंसंभल, हाथरस, आगरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायू, आंवला और बरेली
चौथा चरण (13 मई) - 13 सीटेंशाहजहांपुर, खीरी, धौरहरा, सीतापुर, हरदोई, मिश्रिख, उन्नाव, फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज, कानपुर, अकबरपुर और बहराइच
पांचवा चरण (20 मई) - 14 सीटेंमोहनलालगंज, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, जालौन, झांसी, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर, कौशांबी, बाराबंकी, फैजाबाद, कैसरगंज और गोंडा
छठा चरण (25 मई) - 14 सीटेंसुल्तानपुर, फूलपुर, इलाहाबाद, अंबेडकर नगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संत कबीर नगर, लालगंज, आजमगढ़, जौनपुर, मछलीशहर, भदोही और प्रतापगढ़
सातवां चरण (एक जून) - 13 सीटेंमहाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जा¬पुर और रॉबर्ट्सगंज
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