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अब विद्यार्थियों को गुमराह नहीं कर सकेंगे कोचिंग संस्थान

शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित नए दिशानिर्देश के मुताबिक अब कोचिंग संस्थान अच्छे नंबर या रैंक दिलाने की सौ फीसद गारंटी जैसे भ्रामक वादे भी नहीं कर सकेंगे।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: January 25, 2024 13:28 IST
अब विद्यार्थियों को गुमराह नहीं कर सकेंगे कोचिंग संस्थान
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो- (इंडियन एक्‍सप्रेस)।
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छात्रों के भविष्य को देखते हुए केंद्र सरकार ने निजी कोचिंग संस्थानों को लेकर एक बेहद बड़ा फैसला लिया है, जो भी कोचिंग संस्थान प्रोफेशनल कोर्स की प्रशिक्षण देता है। अब उसे सरकार के अंतर्गत खुद का पंजीकरण करवाना होगा। रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन का कोचिंग सेंटर 2024 के तहत बनाई गई नियमावली को केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेज दिया गया है, ताकि वह उन्हें लागू करवाएं। इतना ही नहीं शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित नए दिशानिर्देश के मुताबिक अब कोचिंग संस्थान अच्छे नंबर या रैंक दिलाने की सौ फीसद गारंटी जैसे भ्रामक वादे भी नहीं कर सकेंगे।

दिशानिर्देश के मुताबिक कोचिंग संस्थान द्वारा एक विज्ञापन को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत एक भ्रामक विज्ञापन माना जाएगा, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रम (चाहे मुफ्त या भुगतान) और अवधि से संबंधित जानकारी छिपाना शामिल हो। प्रस्तावित दिशानिर्देशों के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को सफलता दर या सफल अभ्यर्थियों की संख्या के बारे में झूठे दावे नहीं करने चाहिए, जिससे लोगों को गलतफहमी हो या उनकी पसंद प्रभावित हो।

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इन नियमों का पालन जरूरी है

सफल उम्मीदवार की फोटो के साथ रैंक, पाठ्यक्रम की अवधि और मुफ्त या भुगतान पाठ्यक्रम जैसे विवरण का उल्लेख होना चाहिए। विज्ञापन में डिस्क्लेमर/डिस्क्लोजर/महत्वपूर्ण जानकारी की लिखावट का आकार वही होना चाहिए जो दावे/विज्ञापन में उपयोग किया गया है। ऐसी जानकारी का स्थान, विज्ञापन में प्रमुख और ऐसी जगह पर होना चाहिए जहां सभी लोग इसे अच्छी तरह से देख सकें। कोई भी कोचिंग सेंटर 16 साल से कम उम्र के छात्र को प्रवेश नहीं देगा। कोचिंग संस्थानों के पास शिक्षकों की योग्यता, पाठ्यक्रम पूरा होने की अवधि, छात्रावास सुविधाओं और शुलक के ताजा जानकारी के साथ एक वेबसाइट होगी।

वैश्विक विश्वविद्यालयों के चार हजार पाठ्यक्रम हिंदी में मिलेंगे

शीर्ष विश्वविद्यालयों के 4,000 पाठ्यक्रम का हिन्दी अनुवाद उपलब्ध कराएगी कोर्सेरा येल और मिशिगन जैसे वैश्विक विश्वविद्यालयों के शीर्ष पाठ्यक्रम अब हिंदी में मिलेंगे। आनलाइन शिक्षा मंच कोर्सेरा भारतीय शिक्षार्थियों के लिए 4,000 पाठ्यक्रमों का हिंदी में अनुवाद पेश करने जा रही है। साथ ही वह एक नया एआइ फीचर पेश करने जा रही है।

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आधिकारिक बयान के अनुसार, येल विश्वविद्यालय के ‘जनरेटिव एआई फार एव्रीवन फ्राम डीम लर्निंग’, एआइ, ‘द साइंस आफ वेल बींग’, मिशिगन विश्वविद्यालय के ‘प्रोग्रामिंग फार एव्रीबडी’ और आइबीएम के ‘व्हाट इज डाटा साइंस’ जैसे पाठ्यक्रम अभी तक सिर्फ अंग्रेजी में उपलब्ध थे। जल्द ही ये पाठ्यक्रम हिंदी में उपलब्ध होंगे।

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बयान के अनुसार, शीर्ष भारतीय संस्थानों के 40 से अधिक पाठ्यक्रम जैसे बिट्स पिलानी से इंट्रोडक्शन टू प्रोग्रामिंग, भारतीय प्रबंध संस्थान (आइआइएम) अहमदाबाद से लीडरशिप स्किल्स और इंडियन स्कूल आफ बिजनेस (आइएसबी) से ट्रेडिंग बेसिक्स का फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन और थाई सहित 18 भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा। इससे शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनने के भारत के लक्ष्य को सक्षम बनाने में मदद मिलेगी।

कोर्सेरा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जेफ मैगीआनकाल्डा ने कहा कि हमने 4,000 से ज्यादा पाठ्यक्रमों को हिन्दी में अनुवाद करने के लिए एआइ का इस्तेमाल किया है, जो भारत में छात्रों को डिजिटल भविष्य के लिए कौशल विकसित करने को अभूतपूर्व पहुंच और अवसर देगा।

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