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बिहार में 20 लाख छात्रों के नाम स्कूल के रजिस्टर से हटाए गए, 1.5 लाख की छूटेगी बोर्ड परीक्षा, जानिए सरकार ने क्यों लिया ये फैसला

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार कई छात्र लंबे समय तक स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं क्योंकि उनके माता-पिता या अभिभावक उनसे खेतों या अपने व्यवसायों में काम कराते हैं।
Written by: संतोष सिंह | Edited By: Nitesh Dubey
Updated: October 25, 2023 15:57 IST
बिहार में 20 लाख छात्रों के नाम स्कूल के रजिस्टर से हटाए गए  1 5 लाख की छूटेगी बोर्ड परीक्षा  जानिए सरकार ने क्यों लिया ये फैसला
बिहार में 20 लाख से अधिक छात्रों के नाम रजिस्टर से हटा दिए हैं। (EXPRESS PHOTO)
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बिहार के सरकारी स्कूलों ने अनुपस्थित रहने के कारण 20 लाख से अधिक छात्रों के नाम रजिस्टर से हटा दिए हैं। साथ ही 1.5 लाख से अधिक छात्रों की बोर्ड परीक्षा छूटने का खतरा है। अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाए और योग्य छात्रों को लाभ दिया जाए। अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य लंच योजना को व्यवस्थित करने में मदद और यह सुनिश्चित करना भी है कि स्कूल प्रबंधन भोजन के समय छात्रों की गलत उपस्थिति न बनाए।

हालांकि शिक्षक संघों ने सरकार के इस कदम को मनमाना और शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि वे इस फैसले को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष चुनौती देंगे।

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बिहार शिक्षा विभाग के निर्देश के तहत पिछले चार महीनों से सरकारी स्कूलों में निरीक्षण हो रहा है। उस दौरान, स्कूलों को सबसे पहले 30 दिनों की अवधि के लिए अनुपस्थित रहने वाले छात्रों का पंजीकरण रद्द करने के लिए कहा गया था। फिर इस अवधि को घटाकर 15 दिन कर दिया गया और अब स्कूलों को उन छात्रों के नाम काटने की अनुमति दे दी गई जो स्कूल अधिकारियों को सूचित किए बिना लगातार तीन दिनों तक अनुपस्थित थे।

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 38 जिलों के 70,000 से अधिक स्कूलों ने अब तक कक्षा 1 से 12 तक नामांकित 20 लाख छात्रों के नाम स्कूल रोल से काट दिए हैं। इन 20 लाख में से 1.5 लाख से अधिक कक्षा 10 और 12 में हैं। सोमवार को बिहार माध्यमिक शिक्षा निदेशक कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव ने राज्य के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक और जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कक्षा 10 और 12 जिन छात्रों के नाम हटा दिए गए हैं, वे बिहार स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा नहीं देंगे।

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शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार कई छात्र लंबे समय तक स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं क्योंकि उनके माता-पिता या अभिभावक उनसे खेतों या अपने व्यवसायों में काम कराते हैं। एक अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "कुछ बच्चे सरकारी स्कूल में अपना नाम दर्ज कराते हुए निजी स्कूलों में भी पढ़ते हैं। हम स्कूलों में केवल गंभीर छात्र चाहते हैं ताकि हम उन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। सभी सरकारी लाभ और छात्रवृत्तियां केवल जरूरतमंद छात्रों को ही मिलनी चाहिए। केवल नियमित छात्रों को ही सरकार की दोपहर के मिड डे मील योजना का लाभ उठाना चाहिए।"

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