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संपादकीय: खेतों से लेकर सड़क तक मुसीबत बने छुट्टा जानवर, हमलों में खत्म हो रही हैं निर्दोषों की जिंदगी

कुछ लोग आवारा पशुओं को लेकर भावुक होते हैं, जो एक मानवीय गुण हो सकता है। मगर उससे पशुओं के स्वभाव में आई तब्दीली की जिम्मेदारी कोई नहीं उठाता।
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | Updated: February 26, 2024 09:49 IST
संपादकीय  खेतों से लेकर सड़क तक मुसीबत बने छुट्टा जानवर  हमलों में खत्म हो रही हैं निर्दोषों की जिंदगी
सड़कों पर आवारा कुत्ते।
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आवारा पशुओं की वजह से फसलों और अन्य चीजों की बर्बादी को लेकर पिछले कई सालों से लगातार शिकायतें आती रही हैं। मगर इस बीच छुट्टा जानवरों के हमलों में लोगों की जान जाने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। खबर के मुताबिक दक्षिण दिल्ली के खानपुर इलाके में अपने बेटे को स्कूल बस के लिए छोड़ने सड़क पर खड़े एक व्यक्ति पर आवारा घूम रहे सांड़ ने हमला कर दिया। उससे उसकी मौत हो गई।

राजधानी दिल्ली में आवारा पशुओं के हमले की घटनाएं बढ़ी

दिल्ली में इस तरह की घटना कोई नई नहीं है। मगर अब तक ऐसा कोई प्रभावी कदम नजर नहीं आता, जो ऐसी घटनाओं को रोक सके। लगता है कि इस गहराती समस्या पर काबू पाने के लिए सरकार की ओर से ऐसे उपायों को लेकर गहरी उदासीनता छाई हुई है।

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वाहनों से जानवरों के टकराने के कारण भी हो रहे गंभीर हादसे

नतीजतन, आए दिन सड़क पर छुट्टा घूमते सांड़ या गाय जैसे पशुओं के अचानक किसी को टक्कर मार देने की वजह से लोगों की जान जा रही है। वाहनों से जानवरों के टकराने के कारण भी गंभीर हादसे होते हैं। इसके अलावा, कुत्तों के हमले या काटने से लोगों की जान जाने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।

विचित्र है कि अगर कोई व्यक्ति सड़क पर गलत जगह वाहन खड़ा कर दे या किसी नियम का उल्लंघन करे तो वाहन उठाने या जुर्माना वसूलने से लेकर संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है और संबंधित महकमे सक्रिय रहते हैं। मगर किसी रास्ते से गुजरते हुए कहीं बीच सड़क पर बैठे या आते-जाते पशुओं को आम देखा जा सकता है और उन्हें हटाने वाला कोई नहीं होता।

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वाहन चालक या अन्य लोग अपने को बचाते हुए किसी तरह वहां से आगे निकलने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग आवारा पशुओं को लेकर भावुक होते हैं, जो एक मानवीय गुण हो सकता है। मगर उससे पशुओं के स्वभाव में आई तब्दीली की जिम्मेदारी कोई नहीं उठाता। सड़क पर लावारिस गायों की देखभाल के लिए गौशालाओं की व्यवस्था एक हल है, लेकिन इसमें सांड़ और कुत्ते आदि आवारा पशुओं से उपजी समस्या बनी रहती है। देश के अलग-अलग इलाकों में सड़कों पर बड़ी तादाद में घूमते पशु यही दर्शाते हैं कि इसे गंभीर समस्या के रूप में चिह्नित करना शायद बाकी है।

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