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संपादकीय: अमेरिका में नफरती सोच के निशाने पर भारतीय, छात्रों से लेकर नागरिकता ले चुके लोगों पर हो रहे हमले

दुनिया भर में लोकतंत्र की दुहाई देने वाले अमेरिका की हकीकत यह है कि वह भारत जैसे देशों से वहां पढ़ने, रोजगार के लिए गए या फिर कारोबार कर रहे, बस गए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा। नस्ली हिंसा पर काबू पाना आज भी उसके लिए चुनौती है।
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | Updated: February 12, 2024 09:42 IST
संपादकीय  अमेरिका में नफरती सोच के निशाने पर भारतीय  छात्रों से लेकर नागरिकता ले चुके लोगों पर हो रहे हमले
भारतीय मूल के लोगों की वार्षिक औसत आय अमेरिकी मूल के लोगों की वार्षिक औसत आय से अधिक है। यही बात अमेरिकी लोगों को पच नहीं पा रही।
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अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ नफरती हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस नए शुरू हुए वर्ष में अब तक पांच भारतीय हिंसा का शिकार हो चुके हैं। ताजा घटना वाशिंगटन शहर की है, जहां एक संदिग्ध अमेरिकी नागरिक ने भारतीय मूल के एक व्यक्ति पर हमला किया, जिससे उसके सिर में चोट आई और तमाम प्रयासों के बाद भी उसे बचाया न जा सका। बीते एक वर्ष में अमेरिका में भारतीय मूल के पांच सौ बीस लोगों के साथ नफरती हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं। यह इसके पहले के साल की तुलना में करीब चालीस फीसद अधिक है। हिंसा के शिकार लोगों में हर श्रेणी के हैं, छात्र भी, वहां नौकरी कर रहे या फिर बस गए लोग भी।

छात्र या लड़की को धक्का मार उपहास उड़ाया करते हैं सुरक्षाकर्मी

अमेरिका में नस्ली हिंसा कोई नई बात नहीं है। मगर पिछले दो वर्षों से जिस तरह भारतीय मूल के लोगों को निशाना बना कर हमले किए जा रहे हैं, उसकी कुछ और ही वजहें हैं। कई मामलों में वहां के सुरक्षाकर्मी भी किसी छात्र या लड़की को धक्का मार कर उसका उपहास उड़ाते और उसकी पीड़ा को आनंद लेते देखे गए।

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ट्रंप के सत्ता में आने के बाद भारतीयों के खिलाफ बढ़ी थी नफरती हिंसा

वहां रह रहे भारतीयों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ नफरती हिंसा बढ़ी है। गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार में अमेरिकी युवाओं का आह्वान किया था कि बाहरी लोग आकर उनका हक छीन रहे हैं, वे सत्ता में आएंगे तो उनका हक दिलाएंगे। उन्हें इसका लाभ भी मिला था। आज भी उन्हें अमेरिकी युवाओं का अपार समर्थन है। अमेरिका के छह में से पांच राज्यों में ट्रंप आज भी जो बाइडेन से आगे हैं।

अमेरिकी युवाओं को लगता है कि भारतीय मूल के लोग अमेरिका पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्हें यह भी लगता है कि जो बाइडेन सरकार भारतीयों को ज्यादा तरजीह देती है। इसलिए भी कि बाइडेन ने अपनी सरकार में करीब एक सौ तीस महत्त्वपूर्ण पदों पर भारतीय मूल के लोगों को नियुक्त किया है। वहां की विभिन्न कंपनियों और विभागों में भी भारतीय मूल के लोग शीर्ष या महत्त्वपूर्ण पदों पर हैं। इस तरह वहां के युवा बाइडेन सरकार के भी खिलाफ हैं। उन युवाओं की इस धारणा को बढ़ावा देने और उन्हें उकसाने में वहां के कुछ अखबार और टीवी चैनल भी भरपूर मदद कर रहे हैं। वे भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ लगातार लिखते-दिखाते रहते हैं।

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दुनिया भर में लोकतंत्र की दुहाई देने वाले अमेरिका की हकीकत यह है कि वह भारत जैसे देशों से वहां पढ़ने, रोजगार के लिए गए या फिर कारोबार कर रहे, बस गए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा। नस्ली हिंसा पर काबू पाना आज भी उसके लिए चुनौती है। हालांकि अमेरिका की कुल आबादी में भारतीय मूल के लोगों की हिस्सेदारी महज एक फीसद है, पर वे आयकर के रूप में छह फीसद का योगदान करते हैं। इसलिए कि भारतीय मूल के लोगों की वार्षिक औसत आय अमेरिकी मूल के लोगों की वार्षिक औसत आय से अधिक है। यही बात अमेरिकी लोगों को पच नहीं पा रही।

ट्रंप ने अमेरिकी युवाओं के इस असंतोष को अपना सियासी हथियार बनाया और अब वह घातक साबित हो रहा है। अगर अमेरिकी सरकार ने जल्दी इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला, तो न केवल उसे कुशल भारतीयों के योगदान से वंचित रहना, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ेगा।

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