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Jansatta Editorial: विमान में तकनीकी खराबी के कारण हवाई अड्डों पर बढ़ती भीड़ से परेशानी

हवाई जहाज से कहीं जाने वाले लोग अब यह मानने लगे हैं कि इसमें भी उन्हें कई तरह की अव्यवस्था और दिक्कतों का सामना कर पड़ सकता है, भले ही वह परिस्थितिजन्य हो।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: January 18, 2024 08:53 IST
jansatta editorial  विमान में तकनीकी खराबी के कारण हवाई अड्डों पर बढ़ती भीड़ से परेशानी
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो- (इंडियन एक्‍सप्रेस)।
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विमान से अपने गंतव्य तक आवाजाही को एक सबसे सुव्यवस्थित यात्रा के तौर पर देखा जाता रहा है। मगर पिछले कुछ समय से उड़ानों में देरी, विमान में तकनीकी खराबी से लेकर हवाई अड्डों पर बढ़ती भीड़ आदि से जैसे हालात पैदा हो रहे हैं, उसमें यह धारणा टूट रही है। हवाई जहाज से कहीं जाने वाले लोग अब यह मानने लगे हैं कि इसमें भी उन्हें कई तरह की अव्यवस्था और दिक्कतों का सामना कर पड़ सकता है, भले ही वह परिस्थितिजन्य हो।

हवाई यात्रा के दौरान किसी यात्री के दुर्व्यवहार या उसकी अराजकता से उपजी स्थिति बहस का मुद्दा बनती है और उसके बाद उस मामले में कानून या नियमों के मुताबिक कार्रवाई भी होती है। मगर विमानों में तकनीकी खराबी, लेटलतीफी और हवाई अड्डों पर अव्यवस्था को एक परिस्थितिजन्य समस्या मान कर उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता है या फिर उसे दुरुस्त करने के आश्वासन पर लोग संतोष कर लेते हैं। जबकि विमान संचालन अपने समग्र रूप में एक बेहद संवेदनशील तंत्र है और इसमें किसी भी पहलू को नजरअंदाज करने या उसके प्रति लापरवाही बरतने का खमियाजा बेहद गंभीर हो सकता है।

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पिछले कुछ महीनों के दौरान उड़ान के बाद किसी तकनीकी खराबी का पता चलने पर विमान को आपात स्थिति में किसी हवाई अड्डे पर उतारने की नौबत आई। जबकि विमान में आई तकनीकी खराबी के पहलू पर किसी तरह की कोताही न बरते जाने की उम्मीद की जाती है, क्योंकि इसमें बेहद मामूली लापरवाही के नतीजे का अंदाजा भर लगाया जा सकता है। विमान के भीतर भी कई प्रणाली चूंकि तकनीकी स्तर पर स्वचालित होती है, इसलिए सभी स्तर पर जांच में सब कुछ दुरुस्त पाए जाने के बाद ही उड़ान की इजाजत मिलनी चाहिए।

मंगलवार को मुंबई से बंगलुरु जा रहे एक विमान में जिस तरह शौचालय का दरवाजा बंद हो जाने से एक यात्री भीतर ही फंस गया और अपनी यात्रा का बाकी एक घंटा उसे उसी हालत में काटना पड़ा, वह दिखने में कोई सामान्य तकनीकी खामी लग सकती है। मगर यह समझना मुश्किल नहीं है कि ऐसी हालत में किस तरह के जोखिम पैदा हो सकते हैं। राहत की बात बस यह रही है कि विमान अगले पड़ाव पर उतरा और इंजीनियर की मदद से शौचालय के दरवाजे को खोल कर यात्री को सुरक्षित उतारा गया, उससे माफी मांगी गई, उसका किराया लौटाया गया।

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सवाल है कि क्या सिर्फ खेद जाहिर करना और यात्री का किराया लौटा देना ऐसे मामलों का समाधान हो सकता है! कुछ ही दिन पहले उड़ान में व्यवधान या दस-बारह घंटे की देरी की वजह से दिल्ली हवाई अड्डे पर अफरातफरी का माहौल देखा गया। एक घटना में विमान में सवार एक यात्री ने सब्र खोकर चालक दल के सदस्य पर हमला भी कर दिया।

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अत्यधिक देरी की वजह से एक विमान के यात्री हवाई पट्टी पर ही उतर कर बैठ गए और खानपान करने लगे। इसके अलावा, उड़ानों के अनुपात में हवाई अड्डों पर बढ़ती भीड़ से कई बार रेलवे स्टेशनों की तरह अव्यवस्था और अराजकता तक के हालात पैदा हो रहे हैं। अब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए ने कोहरे या अन्य असामान्य स्थितियों की वजह से उड़ान में व्यवधान और देरी की स्थिति में यात्रियों की असुविधा के मद्देनजर कई नए निर्देश जारी किए हैं।

मगर अव्यवस्था पैदा होने के बाद कदम उठाने के बजाय अचानक उपजी मुश्किल से निपटने की पूर्व तैयारी प्रबंधन का एक अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए, ताकि विमान यात्रा को सहज और सुरक्षित बनाया जा सके। खासतौर पर विमान में किसी भी स्तर पर तकनीकी खामी के मामले में कोई भी समझौता करने या अनदेखी करने की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

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