scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

Jansatta Editorial: आतंकवाद को खाद-पानी मुहैया कराने वाला पाकिस्‍तान भारत पर आरोप लगाने से पहले अपनी गिरेबां में झाकें

पाकिस्‍तान का भारत विरोधी प्रचार उसका नवीनतम प्रयास है, पाकिस्‍तान जो बोएगा, वही काटेगा और उसकी अपनी करतूतों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराना न तो न्यायोचित हो सकता है, न ही समाधान।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | January 27, 2024 08:44 IST
jansatta editorial  आतंकवाद को खाद पानी मुहैया कराने वाला पाकिस्‍तान भारत पर आरोप लगाने से पहले अपनी गिरेबां में झाकें
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।(फोटो-इंडियन एक्‍सप्रेस)।
Advertisement

पाकिस्तान की समस्या यह है कि जब भी वह भारत के खिलाफ अपने किसी एजंडे को हकीकत में तब्दील करने में नाकाम होता है या फिर खुद को गंभीर आरोपों के कठघरे में पाता है, तब भारत की ओर अंगुली उठा कर खड़ा हो जाता है। हालांकि ऐसा करने से खुद उसके ही कमजोर होने का एक संदेश निकलता है, लेकिन ऐसा लगता है कि बार-बार शर्मिंदगी उठाने के बावजूद उसे भारत पर आरोप लगाने में कोई असहजता नहीं महसूस होती।

सवाल है कि क्या अब इस तरह की गतिविधियां पाकिस्तान की आदत में तब्दील हो गई हैं कि अपनी सीमा में मुश्किलों का हल निकालने के बजाय वह किसी भी मामले में भारत का नाम लेकर दुनिया और पाकिस्तानी अवाम को गुमराह करना प्राथमिक समझता है! दरअसल, गुरुवार को पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके पास पिछले वर्ष सियालकोट और रावलकोट में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकवादियों की हत्या और ‘भारतीय एजंट’ के बीच संबंध होने के ‘ठोस सबूत’ हैं। अब वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को जिस रूप में देखा-समझा जाता है, उसमें इस आरोप को लेकर शायद ही कोई देश गंभीर होता हो। मगर इससे पाकिस्तान की मंशा एक बार फिर सामने आई है।

Advertisement

इस तरह के उथले और निराधार आरोपों की सच्चाई यह है कि जिन आतंकवादियों के मारे जाने के बारे में पाकिस्तान ने भारत पर अंगुली उठाई है, उनसे संबंधित आतंकी संगठनों को पालने के लिए कठघरे में वह खुद खड़ा है। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान स्थित ठिकानों से अपनी आतंकी गतिविधियां संचालित करने के मसले पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग सम्मेलनों में भी सवाल उठ चुके हैं।

ऐसे में भारत का यह जवाब बिल्कुल उचित है कि पाकिस्तान की ओर से इस मामले में जो भी कहा गया है, वह भारत विरोधी झूठा और दुर्भावना से भरे प्रचार का उसका नवीनतम प्रयास है; पाकिस्तान जो बोएगा, वही काटेगा और उसकी अपनी करतूतों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराना न तो न्यायोचित हो सकता है, न ही समाधान। सच यह है कि पाकिस्तान अपने दावे में ही दोनों आतंकवादी संगठनों और उनके सदस्यों के अपने सीमा-क्षेत्र में मौजूद होने की पुष्टि कर रहा है।

Advertisement

दरअसल, ताजा आरोप लगाते हुए पाकिस्तान ने यह सोचना भी जरूरी नहीं समझा कि उसके सीमा क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों से जुड़े लोग ‘पाकिस्तानी नागरिक’ और आतंकी पहचान के बावजूद शासन की गिरफ्त में क्यों नहीं थे! आतंकवादियों की हरकतों के बारे में दुनिया जानती है कि वे नाहक ही मासूम और निर्दोष लोगों की हत्या करते हैं, आतंक फैलाते हैं, तो खुद पाकिस्तान स्थित किसी अन्य संगठन या एजंसी के साथ भी टकराव में वे मारे जा सकते हैं।

Advertisement

लेकिन महज शौक की वजह से भारत पर आरोप लगाते हुए पाकिस्तान ने कभी भी अपने गिरेबां में झांकने की जरूरत नहीं समझी है। जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और अन्य संगठन पाकिस्तान स्थित अपने ठिकानों से भारत में जिन आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं, उसे संरक्षण देने का मुख्य आरोपी खुद पाक रहा है।

अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 2017 में चीन में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के घोषणापत्र में भी जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तान आधारित संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की मांग की गई थी। इसलिए आतंकवाद को खाद-पानी मुहैया कराने के आरोपों से खुद घिरा पाकिस्तान जो आरोप भारत पर लगाता है, उसके आईने में उसे खुद को देखना चाहिए।

Advertisement
Tags :
Advertisement
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो