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Jansatta Editorial: जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों और पंजाब के खालिस्तान समर्थकों के मंसूबे एक

पाकिस्‍तान द्वारा पंजाब में ड्रोन से गिराए जा रहे साजो-सामान आतंकवादियों तक पहुंचाने में यह गठजोड़ काम आता है। नशीले पदार्थों की खेप उन्हें वित्तीय संसाधन जुटाने के काम आती है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | January 21, 2024 22:23 IST
jansatta editorial  जम्मू कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों और पंजाब के खालिस्तान समर्थकों के मंसूबे एक
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो- (इंडियन एक्‍सप्रेस)।
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जबसे भारतीय सुरक्षा बलों ने नियंत्रण रेखा पर निगरानी कड़ी की है, पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ और दहशतगर्दी के साजो-सामान भेजने की कोशिशों पर काफी हद तक लगाम लग गई है। ऐसे में आतंकवादी संगठनों ने ड्रोन को अपना नया हथियार बना लिया है। रात के अंधेरे में वे ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ भारतीय सीमा में गिराने में कामयाब हो जाते हैं।

इस मामले में पाकिस्तान की सीमा से सटे पंजाब के इलाके उनके लिए ज्यादा मुफीद नजर आते हैं। शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात फिरोजपुर में ड्रोन के जरिए एक एके-47 राइफल, दो मैगजीन, चालीस कारतूस और चालीस हजार रुपए से भरा एक थैला गिराया जाना इसी का ताजा उदाहरण है। सीमा सुरक्षा बल को ड्रोन की गतिविधि का पता चला और गहन तलाशी अभियान चलाया गया, तो एक खेत से यह साजो-सामान बरामद हुआ।

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पिछले कुछ वर्षों में सीमा पार से ड्रोन भेजे जाने की घटनाएं काफी बढ़ी हैं। पिछले महीने सीमा सुरक्षा बल ने बताया कि बीते वर्ष उसने एक सौ सात ड्रोन मार गिराए और करीब साढ़े चार सौ किलो हेरोइन, तेईस हथियार और पांच सौ से अधिक कारतूस बरामद किए। यानी इसके अलावा अनेक मामलों में आतंकी संगठनों को सफलता भी मिली होगी, जिसके ठीक-ठीक आंकड़े दर्ज नहीं हैं।

हालांकि पिछले आठ-नौ वर्षों में सीमा पर चौकसी बढ़ाने, सघन तलाशी अभियान चलाने, आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने वालों पर शिकंजा कसने, पाकिस्तान के साथ सड़क मार्ग से तिजारत बंद होने के बाद जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर लगाम लगी है। फिर भी दहशतगर्द अपनी साजिशों को अंजाम देने में कामयाब हो जाते हैं। इसकी वजह समझी जा सकती है।

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जो साजो-सामान और वित्तीय मदद उन्हें घुसपैठ के जरिए पहुंचाई जाती थी, वह ड्रोन से पहुंचाई जाने लगी है। जम्मू-कश्मीर के युवाओं को गुमराह कर उन्हें हथियार उठाने को तैयार किया जा रहा है। पंजाब में खालिस्तान समर्थकों को उकसाने की वजहें भी स्पष्ट हैं। उजागर है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों और पंजाब के खालिस्तान समर्थकों के तार परस्पर जुड़े हुए हैं।

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पंजाब में ड्रोन से गिराए जा रहे साजो-सामान आतंकवादियों तक पहुंचाने में यह गठजोड़ काम आता है। नशीले पदार्थों की खेप उन्हें वित्तीय संसाधन जुटाने के काम आती है। हैरानी की बात नहीं कि पंजाब और उससे सटे राज्यों में नशे का कारोबार फैलाने में ऐसे संगठनों से जुड़े लोगों का बड़ा हाथ है।

हालांकि सीमा पार से ड्रोन के जरिए पहुंचाए जा रहे साजो-सामान और नशीले पदार्थों की खेप पर नजर रखने के लिए भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने ड्रोन-रोधी तकनीक तैनात कर रखी है, जिससे ऐसी गतिविधियों की टोह लेने और उन्हें मार गिराने में काफी आसानी हुई है। इसके लिए दिल्ली में भी केंद्रीय नियंत्रण और विश्लेषण कक्ष बनाया गया है।

पिछले वर्ष के सीमा सुरक्षा बल के आंकड़ों से जाहिर है कि इस मामले में उसे काफी कामयाबी मिली है। इस तरह निस्संदेह पाकिस्तान की जमीन से चलाई जा रही आतंकी गतिविधियों को गंभीर चोट पहुंच रही है। खालिस्तान समर्थकों पर भी काफी हद तक लगाम कसी जा चुकी है। मगर कश्मीर घाटी में स्थानीय युवाओं को बरगला कर दहशतगर्द बनाने की कोशिशों पर लगाम लगाना अब भी चुनौती है। जब तक इस दिशा में सफलता नहीं मिलती, पाकिस्तान के आतंकी मंसूबों पर पानी फेरना कठिन बना रहेगा।

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