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संपादकीय: पैसा और इश्क के लिए देश के साथ गद्दारी, खूबसूरत लड़कियों का जाल बिछा ISI बना रहा भारतीयों को निशाना

दूतावासों, रक्षा अनुसंधान संगठन और दूसरे संवेदनशील, अतिगोपनीय और रणनीतिक कार्यों में लगे लोगों पर निरंतर निगरानी रखी जाती है, मगर ऐसे लोगों की राष्ट्र के प्रति निष्ठा ज्यादा महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। फिर भी आइएसआइ जैसे संगठन अपने बिछाए जाल और प्रलोभन में ऐसे इक्का-दुक्का घर के भेदियों को फांस लेते हैं।
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | Updated: February 06, 2024 08:12 IST
संपादकीय  पैसा और इश्क के लिए देश के साथ गद्दारी  खूबसूरत लड़कियों का जाल बिछा isi बना रहा भारतीयों को निशाना
सतेंद्र सिवाल दूतावास में सुरक्षा सहायक के पद पर तैनात थे (Express file photo)
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रूस के मास्को स्थित भारतीय दूतावास में तैनात एक कर्मचारी की पाकिस्तानी खुफिया एजंसी आइएसआइ को गुप्त दस्तावेज मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तारी से एक बार फिर यह जरूरत रेखांकित हुई है कि ऐसे कर्मचारियों पर नजर रखने का तंत्र और पुख्ता बनाया जाना चाहिए। हालांकि खुफिया तंत्र की निरंतर निगरानी की वजह से ही उक्त कर्मचारी के कारनामे उजागर हुए और जब वह उत्तर प्रदेश के अपने गांव लौटा तो वहां के आतंकरोधी दस्ते ने उसे धर दबोचा। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। एक लड़की के मोहपाश में फंस कर उसने यह सब किया। अब केंद्रीय गृह विभाग छानबीन कर रहा है कि उस कर्मचारी ने क्या-क्या गुप्त सूचनाएं आइएसआइ को मुहैया कराईं और उसकी एवज में कितने पैसे लिए।

पिछले वर्ष पकड़ा गया था DRDO का सीनियर ऑफिसर

हालांकि यह पहली घटना नहीं है जब आइएसआइ को किसी सरकारी अमले ने महत्त्वपूर्ण गुप्त सूचनाएं उपलब्ध कराई। पिछले वर्ष रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ के एक बड़े अधिकारी को भी इसी तरह सूचनाएं पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ऐसी जासूसी की कोशिशें प्राय: हर देश करता है, इसलिए इससे निपटने के पुख्ता इंतजाम न हों, तो काफी नुकसान की आशंका बनी रहती है।

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भारतीय दूतावास के कर्मचारी कई सूचनाएं पाकिस्तान को दी

भारतीय दूतावास के कर्मचारी को इसीलिए आइएसआइ ने अपने जाल में फंसाया कि वहां से सैन्य गतिविधियों की जानकारी आसानी से हासिल की जा सकती है। चूंकि सेना और दूतावासों के बीच नियमित रूप से सैनिकों की तैनाती, उनकी गतिविधियों आदि से जुड़ी जानकारियां साझा की जाती हैं, इसलिए वहां से उनके बारे में पता लगाना आसान होता है। जिस कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया, वह बहुउद्देश्यीय कार्यों में लगा हुआ था, ऐसी सूचनाओं तक उसकी पहुंच आसान थी।

हालांकि दूतावासों, रक्षा अनुसंधान संगठन और दूसरे संवेदनशील, अतिगोपनीय और रणनीतिक कार्यों में लगे लोगों पर निरंतर निगरानी रखी जाती है, मगर ऐसे लोगों की राष्ट्र के प्रति निष्ठा ज्यादा महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। फिर भी आइएसआइ जैसे संगठन अपने बिछाए जाल और प्रलोभन में ऐसे इक्का-दुक्का घर के भेदियों को फांस लेते हैं।

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पाकिस्तान जैसे देश के लिए जासूसी करने या गोपनीय सूचनाएं उपलब्ध कराने वालों से इसलिए बड़ा खतरा है कि वह हमेशा भारत को अस्थिर करने की ताक में रहता है। छिपी बात नहीं है कि आइएसआइ अपने यहां प्रशिक्षित आतंकियों को भारतीय सीमा में भेजने की रणनीति बनाता रहता है। ऐसे में अगर भारतीय सेना की गतिविधियों की सूचना उपलब्ध हो जाती है, तो उसके लिए अपनी साजिशों को अंजाम देना आसान हो जाता है। हालांकि भारतीय सेना और खुफिया एजंसियां भारतीय नागरिकों के पाकिस्तान से संबंधों पर नजर रखती हैं, फिर भी अगर दूतावास जैसी जगहों पर काम करने वाला कोई कर्मचारी भी राष्ट्रद्रोह से बाज नहीं आता, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

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ऐसे लोगों पर निगरानी तंत्र को और चाक-चौबंद बनाने की जरूरत रेखांकित होती है। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ सकता। नियंत्रण रेखा पर वहां की सेना जब-तब गोलीबारी करके इसीलिए भारतीय सेना का ध्यान भटकाने का प्रयास करती रहती है कि आइएसआइ की रणनीति के तहत आतंकवादियों को सीमा पार भेजा जा सके। इस पर काफी हद तक अंकुश लगने के बाद वह भारतीय दूतावासों के जरिए सूचनाएं जुटाने का प्रयास करता है।

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