scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

Jansatta Editorial: आवास कल्याण समिति को विचारों की भिन्नता के बीच सामंजस्य और सद्भाव कायम रखने की जरूरत

भारत में लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी रही हैं, इसका आकलन इसी से कर सकते हैं कि अतीत से लेकर वर्तमान तक अमूमन हर दौर में अलग-अलग विचारों को एक साथ फलने-फूलने और अभिव्यक्ति का मौका मिला और इसके समांतर ‘अनेकता में एकता’ का तत्त्व हमेशा ही देश की खासियत रही।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: February 02, 2024 09:20 IST
jansatta editorial  आवास कल्याण समिति को विचारों की भिन्नता के बीच सामंजस्य और सद्भाव कायम रखने की जरूरत
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो- (इंडियन एक्‍सप्रेस)।
Advertisement

दिल्ली के जंगपुरा इलाके में एक मुद्दे पर राय जाहिर करने और उस पर एक आरडब्लूए की प्रतिक्रिया यही बताती है कि कुछ लोग देश की विविधता में एकता के विचार को या तो बेमानी मानते हैं या फिर बहुत कमजोर करके आंकते हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस के एक नेता की बेटी ने अपने सोशल मीडिया खाते पर अयोध्या और राम मंदिर से संबंधित एक टिप्पणी की और इस पर उस क्षेत्र के एक आवास कल्याण समिति यानी आरडब्लूए की ओर से उन्हें बाकायदा नोटिस भेज दिया गया।

हैरानी की बात यह है कि किसी मुद्दे पर अलग विचार अभिव्यक्त करने के बाद संबंधित आरडब्लूए की ओर से पिता-पुत्री को किसी अन्य कालोनी में चले जाने का भी सुझाव दे दिया गया। अव्वल तो भारत इतने व्यापक दायरे में भिन्न-भिन्न संस्कृतियों वाला देश है कि किसी एक मसले पर यहां अलग-अलग राय एक स्वाभाविक बात है और संवैधानिक रूप से भी किसी को अपना विचार अभिव्यक्ति करने की आजादी हासिल है। फिर अगर किसी व्यक्ति के स्वतंत्र विचार से किसी को असहमति है भी तो उसके लिए उसे इलाके से चले जाने का सुझाव देने का क्या औचित्य है?

Advertisement

किसी भी मुहल्ले या कालोनी में रहने वालों के बीच एकरूपता नहीं होती है। उसमें अलग-अलग सामाजिक-धार्मिक पृष्ठभूमि और विचारों के लोग हो सकते हैं। एक परिवार के सदस्यों के बीच भी असहमतियां होती हैं। आवास कल्याण समिति जैसे समूह को विचारों की भिन्नता के बीच सामंजस्य और सद्भाव कायम रखने की कोशिश करनी चाहिए, न कि किसी से असहमति होने पर वह उसे घर छोड़ कर चले जाने की सलाह दे।

भारत में लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी रही हैं, इसका आकलन इसी से कर सकते हैं कि अतीत से लेकर वर्तमान तक अमूमन हर दौर में अलग-अलग विचारों को एक साथ फलने-फूलने और अभिव्यक्ति का मौका मिला और इसके समांतर ‘अनेकता में एकता’ का तत्त्व हमेशा ही देश की खासियत रही। यह विशेषता हमारी एक ताकत रही है। मगर विडंबना यह है कि लोकतंत्र के इस जीवन-तत्त्व को कई स्तरों पर नजरअंदाज करने और उसे बाधित करने की कोशिशें भी हो रही हैं, जिसका देश की लोकतांत्रिक छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

Advertisement

Advertisement
Advertisement
Tags :
Advertisement
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो