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संपादकीय: डेंगू का जोखिम बढ़ना गंभीर चिंता, खतरे पर पर्दा डालने वालों की जिम्मेदारी तय होना जरूरी

दिल्ली में हर साल डेंगू के बढ़ते जोखिम और इसकी वजह से लोगों की मौत की खबरें चिंता का कारण बनती रही हैं।
Written by: जनसत्ता
Updated: January 15, 2024 10:49 IST
संपादकीय  डेंगू का जोखिम बढ़ना गंभीर चिंता  खतरे पर पर्दा डालने वालों की जिम्मेदारी तय होना जरूरी
दिल्ली में एक समय डेंगू के दंश से भयावह हालात पैदा हो चुके हैं। (Source: AP, File)
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किसी संक्रामक या जानलेवा बीमारी से निपटने के लिए सबसे जरूरी है उसके प्रसार और असर पर नजर रखना, ताकि उसकी प्रकृति का अध्ययन किया जा सके और उसी मुताबिक उस पर काबू पाने के उपाय जुटाए जाएं। हैरानी की बात है कि देश की राजधानी दिल्ली में एक ओर आम लोगों के लिए डेंगू का जोखिम बढ़ता जा रहा है और दूसरी ओर संबंधित महकमे इसकी हकीकत को छिपाने की कोशिश में लगे हैं। दिल्ली में हर साल डेंगू के बढ़ते जोखिम और इसकी वजह से लोगों की मौत की खबरें चिंता का कारण बनती रही हैं।

बीते वर्ष उन्नीस लोगों की डेंगू की वजह से हो गई थी मौत

हाल ही में आई एक खबर के मुताबिक भी बीते वर्ष उन्नीस लोगों की मौत डेंगू की वजह से हो गई। मगर हैरानी की बात है कि इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने और मरने वालों के वास्तविक आंकड़ों को सार्वजनिक करने को लेकर दिल्ली नगर निगम ने एक तरह की चुप्पी ओढ़ ली थी। जबकि यह रवैया किसी भी बीमारी के बेलगाम हो जाने का सबसे बड़ा कारण बन सकता है।

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2023 में डेंगू के करीब सवा नौ हजार मामले सामने आए

यह बेवजह नहीं है कि अब दिल्ली नगर निगम पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि आखिर समय-समय पर मच्छरजनित बीमारियों या खासकर डेंगू के दंश से पीड़ित और मरने वालों को लेकर दर्ज आंकड़े क्यों नहीं जारी किए गए और कई महीनों तक इससे संबंधित आंकड़ों को क्यों छिपाया गया! खबरों के अनुसार, पिछले वर्ष अगस्त के बाद से दिल्ली नगर निगम ने अपनी हर सप्ताह जारी होने वाली मच्छरजनित रोगों के आंकड़ों वाली रपट जारी नहीं की है, जबकि 2023 में डेंगू के करीब सवा नौ हजार मामले प्रकाश में आए और इससे कुल उन्नीस लोगों की जान चली गई।

मच्छरजनित बीमारियों या फिर अन्य संक्रामक रोगों के फैलाव तथा असर पर नजर रखना और उससे संबंधित रपट जारी करना नगर निगम का दायित्व है। इससे बीमारियों की रोकथाम में मदद ही मिलती है। मगर इस मामले में हकीकत पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है और ऐसे आरोप सही हैं, तो क्या यह आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं है!

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यह एक सामान्य तथ्य है कि अगर किसी बीमारी की प्रकृति को शुरुआती दौर में ही ठीक से समझने की कोशिश नहीं की जाती, तो उसे पांव पसारने का मौका मिलता है। इस बात की आशंका भी खड़ी हो सकती है कि वह बीमारी गंभीर शक्ल लेकर बेलगाम हो जाए। कोरोना के महामारी में तब्दील हो जाने और उसके नतीजों के ब्योरे आज भी लोगों को दहला देने के लिए काफी हैं। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के प्रकोप के दौरान उसकी चपेट में आने वाले मरीजों से संबंधित सभी आंकड़ों पर नजर रखी गई थी और उससे इसके असर का सटीक अध्ययन करने में काफी मदद मिली।

आज कोरोना का असर नगण्य है, तो इसमें इससे जुड़े सभी पहलुओं को देख-समझ कर उसी मुताबिक इससे निपटने के उपाय करने की सबसे बड़ी भूमिका रही। अब अगर डेंगू के मामले में दिल्ली नगर निगम पर सच्चाई छिपाने के आरोप लग रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए कि यह कौन और क्यों कर रहा है। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि दिल्ली में एक समय डेंगू के दंश से भयावह हालात पैदा हो चुके हैं। अगर इसकी वास्तविक तस्वीर पर नजर नहीं रखी गई तो कभी भी इसके गंभीर खतरे झेलने की स्थिति खड़ी हो सकती है।

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