scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

संपादकीय: बिहार में भ्रष्टाचार के भेंट चढ़े ब्रिज, निर्माणाधीन पुल इस ओर कर रहे इशारा

जहां पुलों के लगातार ढहने की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाती, बाकी पुलों के रखरखाव और नए पुलों के निर्माण में भ्रष्टाचार खत्म करके उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती, वहीं इस मसले पर नाहक सियासी बयानबाजियां शुरू हो गईं। ढह गए पुलों की जिम्मेदारी पर सियासत क्या इस समस्या का समाधान है?
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | Updated: July 08, 2024 03:46 IST
संपादकीय  बिहार में भ्रष्टाचार के भेंट चढ़े ब्रिज  निर्माणाधीन पुल इस ओर कर रहे इशारा
बिहार में लगातार गिर रहे पुलों का कौन है जिम्मेदार
Advertisement

बिहार में मानसून की शुरुआत में ही एक के बाद एक पुलों के ध्वस्त होने की घटनाओं के बाद राज्य सरकार हरकत में आई और जल संसाधन तथा ग्रामीण कार्य विभाग के पंद्रह अभियंताओं को निलंबित कर दिया। गौरतलब है कि राज्य में बीते कुछ दिनों के भीतर विभिन्न इलाकों में नए-पुराने दस पुल ढहने की खबर आ चुकी है। हैरानी की बात है कि ध्वस्त पुलों में कुछ निर्माणाधीन थे। सवाल है कि बिहार की मौजूदा सरकार अपने जिस सुशासन के दावे अक्सर करती रहती है, उसमें लगातार पुलों के ढहने को कैसे देखा जाए। कुछ वर्ष पहले बने या फिर निर्माणाधीन पुल अगर इस तरह गिर गए, तो इसके पीछे घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार के अलावा और क्या वजह हो सकती है? विडंबना है कि जहां पुलों के लगातार ढहने की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाती, बाकी पुलों के रखरखाव और नए पुलों के निर्माण में भ्रष्टाचार खत्म करके उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती, वहीं इस मसले पर नाहक सियासी बयानबाजियां शुरू हो गईं। ढह गए पुलों की जिम्मेदारी पर सियासत क्या इस समस्या का समाधान है?

Advertisement

दरअसल, भ्रष्टाचार के ये पुल सुशासन के दावों की हकीकत बता रहे हैं। लगातार पुलों के गिरने की घटनाओं पर कठघरे में घिरी सरकार का कहना है कि उसके अधीन निर्मित जो पुल गिरे हैं, उनका जिम्मा संभालने वाले ठेकेदारों को काली सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सवाल है कि जब इन पुलों का निर्माण हो रहा था तो संबंधित विभाग ने इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जरूरत क्यों नहीं समझी। इस बात की क्या गारंटी है कि कोई दूसरा ठेकेदार पुल के निर्माण की गुणवत्ता से समझौता नहीं करेगा? पुलों के गिरने की घटनाओं को लेकर गठित जांच समिति ने अपनी शुरुआती रपट में कहा है कि विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य की निगरानी करने और बाद में पुलों की देखरेख में लापरवाही बरती। इसी रपट के आधार पर पंद्रह अभियंताओं को निलंबित किया गया है। मगर क्या सिर्फ संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर देने से इस की समस्या का समाधान हो जाएगा? भ्रष्टाचार के जिस जाल की वजह से ऐसी समस्याएं पैदा होती हैं, उस पर प्रहार किए बिना इसका हल कैसे निकलेगा?

Advertisement

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
×
tlbr_img1 Shorts tlbr_img2 खेल tlbr_img3 LIVE TV tlbr_img4 फ़ोटो tlbr_img5 वीडियो