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संपादकीय: जेल में अरविंद केजरीवाल के खानपान का हिसाब, दावे पर ED और दिल्ली के CM आमने-सामने

ईडी की यह दलील भी हैरान करती है कि केजरीवाल कुछ खास चीजें खाकर अपने शरीर में किसी ज्यादा बड़ी दिक्कत को न्योता दे रहे हैं, ताकि उन्हें जमानत मिल जाए!
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | Updated: April 22, 2024 01:57 IST
संपादकीय  जेल में अरविंद केजरीवाल के खानपान का हिसाब  दावे पर ed और दिल्ली के cm आमने सामने
सीएम अरविंद केजरीवाल। (इमेज- एक्सप्रेस आर्काइव)
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अजीब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर चर्चा का मुख्य बिंदु यह हो गया है कि वे अपने भोजन में क्या-क्या और क्यों खा रहे हैं! हालत यह है कि अदालत में मुकदमे के समांतर उनके खानपान को लेकर बहस हो रही है। एक ओर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी का कहना है कि केजरीवाल जेल में जानबूझ कर ऐसा खाना खा रहे हैं, जिससे उनके शरीर में शर्करा का स्तर बढ़ जाए, और बीमारी के बहाने वे जमानत पर जेल से बाहर निकल आएं।

घर से अड़तालीस बार खाना आया, उसमें केवल तीन बार आम आए थे

केजरीवाल ने अदालत में ईडी के दावों को खंडन किया कि वे रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ाने के लिए आम और मिठाई नहीं खा रहे हैं। इस मसले पर खींचतान का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अब सफाई के तौर पर कहा जा रहा है कि केजरीवाल के घर से अड़तालीस बार खाना आया, उसमें केवल तीन बार आम आए थे।

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बहस का मुद्दा- मिठाई खाई या नहीं, खाना कितनी बार घर से आया

जाहिर है, इस बात का हिसाब रखा, देखा और परखा जा रहा है कि कितनी बार और क्या-क्या खाना आया और उसका शरीर पर क्या असर हो सकता है। कभी जेल की चारदीवारी के भीतर आलू-पूड़ी, तो कभी आम या मिठाई खाना या वजन बढ़ना या फिर चिकित्सक की निर्धारित सूची से अलग भोजन करना मुद्दा बन रहा है। ईडी की यह दलील भी हैरान करती है कि केजरीवाल कुछ खास चीजें खाकर अपने शरीर में किसी ज्यादा बड़ी दिक्कत को न्योता दे रहे हैं, ताकि उन्हें जमानत मिल जाए!

गौरतलब है कि केजरीवाल मधुमेह के मरीज हैं और उन्हें रोजाना इंसुलिन लेनी पड़ती है। उनका कहना है कि उन्हें अपने चिकित्सक से परामर्श करने की इजाजत दी जाए। निश्चित रूप से वे जिस पद और कद के व्यक्ति हैं और यों भी उनकी सेहत के लिहाज से चिकित्सीय परामर्श की सुविधा मिलनी चाहिए। मगर एक पहलू यह भी है कि जेल में रहते हुए उन्हें जैसा भोजन मिल रहा है, वैसा किसी अन्य कैदी को शायद ही मिलता हो। बहरहाल, बेहतर हो कि अरविंद केजरीवाल जिस आरोप में सलाखों के पीछे हैं, सुनवाई और बहस का केंद्र वह हो, न कि उनका खानपान मुख्य मुद्दा बने।

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