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Tourist visa पर नौकरी दिलाने ले गए लीबिया, माफिया को बेचा, 208 दिनों तक पंजाब के शख्स के साथ होता रहा खेल

15 जनवरी को गुरप्रीत ने सुरजीत को अपना पासपोर्ट दे दिया। 5 दिनों के अंदर में उसे दुबई का ट्रैवल वीजा मिल गया। 24 जनवरी को वह दुबई के लिए निकल गया। इसके बाद उसके साथ खेल शुरू हुआ।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: October 25, 2023 16:57 IST
tourist visa पर नौकरी दिलाने ले गए लीबिया  माफिया को बेचा  208 दिनों तक पंजाब के शख्स के साथ होता रहा खेल
Tourist visa के नाम गुरप्रीत के साथ फ्रॉड। (express)
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जालंधर जिले के भटनुरा लुबाना गांव के रहने वाले 29 साल के गुरप्रीत सिंह के साथ जो हुआ वह किसी के साथ ना हो। दरअसल, गुरप्रीत सिंह कारपेंटर का काम करता था। वह हर महीने आराम से 25 हजार कमा लेता था। वह अपने काम से संतुष्ट था। उसकी जिंदगी में तूफान में तब आया जब उसके एक पहचान वाले ने उसे इटली जाकर ज्यादा पैसे कमाने का लालच दिया। गुरप्रीत सिंह ने पहले तो मना कर दिया मगर सुरजीत सिंह के बार-बार दबाव देने पर वह इटली जाने के लिए राजी हो गया। उसे लगा कि वह अधिक पैसे कमा लेगा जिससे परिवार का भविष्य संवर जाएगा। हालांकि उसके साथ धोखा हुआ।

सुरजीत ने गुरप्रीत को एक एजेंट से मिलवाया जो लोगों को इटली भेजता था। गुरप्रीत सिंह के इटली जाने के लिए वीजा, फ्लाइट टिकट आदि मिलाकर 13 लाख की जरूरत थी। सुरजीत ने कहा कि 13 लाख रुपये जब दिए जाएं जब वह इटली पहुंच जाए। परिवार के लोग सुरजीत की बातें सुनकर राजी हो गए।

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15 जनवरी को गुरप्रीत ने सुरजीत को अपना पासपोर्ट दे दिया। 5 दिनों के अंदर में उसे दुबई का ट्रैवल वीजा मिल गया। 24 जनवरी को वह दुबई के लिए निकल गया। अमृतसर हवाई अड्डे पर उसकी मुलाकात दो और युवाओं से हुई। वे भी एजेंट के जरिए इटली जा रहे थे। तीनों 24 जनवरी को दुबई पहुंचे। दुबई हवाई अड्डे पर हसन नाम का एजेंस उनसे मिला। इसके बाद वे दोपहर करीब 3.30 बजे दुबई से फ्लाइट लेकर 24 जनवरी की देर रात बेंगाजी पहुंचे।

बेंगाजी में 13 दिनों तक रहा गुरप्रीत

बेंगाजी पहुंचने के बाद उनकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के संतोष कुमार से हुई। संतोष उन्हें एक फ्लैट में छोड़ दिया। वे वहां पर 7 फरवरी तक यानी 13 दिनों तक रहे। गुरप्रीत ने कहा कि उन्होंने जब भी संतोष से इटली की उड़ान के बारे में पूछा तो उसने कहा कि कुछ दिन लगेंगे। हालांकि बाद में उसने बताया कि पानीपत के एजेंट कपानीमल राणा ने पंजाब और हरियाणा में सुरजीत सिंह जैसे कई एजेंट्स को काम पर रखा है। वे युवओं को विदेश में नौकरी दिलाने का लालच देते थे। उसने यह भी बताया कि दुबई और लीबिया में ऐसे कई एजेंटों का एक नेटवर्क काम कर रहा है।

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गुरप्रीत ने 25 जनवरी को अपने परिवार को फोन किया कि वह लीबिया में फंसा हुआ है। उसने परिवार को बताया कि उसके साथ क्या हो रहा है। जब परिवार ने सुरजीत से इस बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह दो दिन में इटली पहुंच जाएगा।

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इसके बाद सुरजीत ने गुरप्रीत के परिवार से उसे इटली भेजने के लिए पैसे मांगने शुरू कर दिए। गुरप्रीत के परिवार ने लीबिया से बाहर निकालने के लिए सुरजीत को 13 लाख रुपए दे दिए। हालांकि इसके बाद गुरप्रीत के साथ और बुरा हुआ। उसे 7 फरवरी को गाड़ी में तिरपाल से ढककर अवैध तरीके से तुबरक शहर ले जाया गया। गुरप्रीत ने बताया कि वह सांस भी नहीं ले पा रहा था। इसके बाद उसे दोनों युवाओं से अलग जगह पर भेज दिया गया।

तुबरक पहुंचने बाद गुरप्रीत को पता चला कि उसी की तरह वहां पर और 40 लोग थे। वहां से उन्हें एक गाड़ी में ठूसकर दूसरी जगह ले जाया गया। वहां उसे जानवरों की तरह रखा गया। वह रेत पर सोने और टॉयलेट का पानी पीने को मजबूर हो गया। 10 अप्रैल को गुरप्रीत को माफियाओं को बेच दिया गया था। वे हर वक्त बंदूक लेकर उनसे सामने खड़े रहते थे। उन्हें डराने के लिए गोलियां चलाई जाती थीं। उसका फोन, कपड़े, सारा सामन जब्त कर लिया गया। वहां पानी नहीं था। कपड़े फट गए थे। बालों में जूं लग गए थे। उनके शरीर पर घाव बन गए थे। बदूब आ रही थी। उन्हें खाने के लिए 14 घंटे में सिर्फ रोटी का एक टुकड़ा दिया जाता था। उन्हें गंदगी में रखा गया। उनसे मजदूरी करवाई गई। वे लोग मलबे में सोने को मजबूर थे। कुल मिलाकर उनकी हालत जानवर की तरह हो गई थी। अगर कोई विरोध करता तो उसे मारा-पीटा जाता।

13 मई को गुरप्रीत और अन्य लोगों को एक नाव पर बैठाकर कहीं मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था। तभी पुलिस का छापा पड़ा और उन्हें पकड़कर जेल भेज दिया गया। जेल में उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया।

ऐसे बचाए गए गुरप्रीत और अन्य लोग

एक महीने बाद 11 भारतीय युवाओं ने राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी से संपर्क किया। इन्हें ट्यूनीशिया में भारतीय अधिकारियों की सहायता से बचाया गया था। ये भी फंसे हुए थे। इन लोगों ने ही गुरप्रीत और अन्य लोगों के जेल में होने की जानकारी दी। गुरप्रीत और उसके साथियों को 30 जुलाई को त्रिपोली जेल से बाहर निकालकर शिविर में लाया गया। परिवार के लोगों का लगा था कि गुरप्रीत जिंदा नहीं है। हालांकि उन्होंने उसकी तस्वीर अखबार में देखी। इसके बाद उन्होंने सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी से संपर्क किया। इस तरह एक लंबे इंतजार के बाद गुरप्रीक अपने परिवार से मिला। वह अब अपने घर है। हालांकि वह अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं है। उसने कसम खाई है कि अब वह कभी भारत से बाहर नहीं जाएगा। वह पंजाब में ही अपना काम करना चाहता है। रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

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