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दिल्ली हाई कोर्ट से कुलदीप सेंगर को लगा झटका, भाई की सजा को सस्पेंड करने से अदालत ने किया इनकार

हाई कोर्ट ने जयदीप सेंगर की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि उसकी सजा को सस्पेंड कर दिया जाए क्योंकि उसके साथी दोषियों की सजा को भी सस्पेंड कर दिया गया था।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: January 26, 2024 15:58 IST
दिल्ली हाई कोर्ट से कुलदीप सेंगर को लगा झटका  भाई की सजा को सस्पेंड करने से अदालत ने किया इनकार
कुलदीप सिंह सेंगर जेल में बंद है।
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दिल्ली हाई कोर्ट से कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा लगा है। 2017 के उन्नाव रेप केस में पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए जयदीप सिंह सेंगर (कुलदीप सिंह सेंगर का भाई) की सजा को हाई कोर्ट ने खत्म करने से इनकार कर दिया है। जयदीप सिंह सेंगर पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का भाई है।

जयदीप सेंगर ने 10 साल सजा को सस्पेंड करने की मांग की थी

जयदीप सेंगर ने अपनी 10 साल की सजा को सस्पेंड करने की मांग की थी। उसे गैर इरादतन हत्या और आपराधिक साजिश (अन्य अपराधों के बीच) के लिए सजा सुनाई गई है और उसके खिलाफ अपील लंबित थी। जयदीप को मार्च 2020 में दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट द्वारा 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। जयदीप ने कोर्ट में दावा किया कि उसकी चिकित्सीय स्थिति ऐसी है कि वह जेल में अपनी सजा नहीं काट सकता और उसे न्यायिक हिरासत से रिहा किया जाना चाहिए।

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जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने अपने 24 जनवरी के आदेश में एम्स के एक मेडिकल बोर्ड द्वारा दायर एक रिपोर्ट पर गौर किया और कहा कि रिपोर्ट इस बिंदु पर स्पष्ट है कि अपीलकर्ता की चिकित्सा स्थिति ऐसी प्रकृति की नहीं है कि वह जेल में नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि दी गई सज़ा जेल में भुगतो।

हाई कोर्ट ने जयदीप सेंगर की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि उसकी सजा को सस्पेंड कर दिया जाए क्योंकि उसके साथी दोषियों की सजा को भी सस्पेंड कर दिया गया था। इसमें पाया गया कि जयदीप सेंगर तीन साल तक न्यायिक हिरासत में रहा जो उसे सुनाई गई कुल सजा की आधी से भी बहुत कम है। कोर्ट ने कहा कि उसके दोषी साथियों ने अपनी आधी सजा काट ली है और इसके बाद राहत मिली। ऐसे में जयदीप समानता के आधार पर राहत नहीं मांग सकता।

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यह भी देखा गया कि ट्रायल कोर्ट ने माना था कि जयदीप सेंगर ही वह व्यक्ति था जिसके मार्गदर्शन और संरक्षण में इस मामले में अपराध किया गया था। इसके कारण बलात्कार पीड़िता के पिता की मौत भी हो गई थी।

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