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दर्जन भर छात्रों ने किया निर्वस्त्र और फिर… , केरल में छात्र के सुसाइड के बाद बवाल, CPI(M) के सदस्यों पर रैगिंग का आरोप

केरल में 20 साल के छात्र सुसाइड मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक उबाल शुरू हो गई है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Jyoti Gupta
केरल | Updated: February 29, 2024 11:35 IST
दर्जन भर छात्रों ने किया निर्वस्त्र और फिर…   केरल में छात्र के सुसाइड के बाद बवाल  cpi m  के सदस्यों पर रैगिंग का आरोप
केरल में छात्र के सुसाइड के बाद बवाल। (Jansatta Photo)
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केरल के एक कॉलेज में 20 साल के छात्र का शव पुरुष छात्रावास के टॉयलेट रूम में लटका हुआ मिला था। मामला सुसाइड का था। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सुसाइड से पहले छात्र का शोषण किया गया था। उसका पेट भी खाली था, जैसे उसने कई दिनों से खाना नहीं खाया हो। उसके शरीर पर निशान थे। अब छात्र के सुसाइड मामले को लेकर बवाल मच गया है। छात्र के सुसाइड को लेकर दावा किया गया है कि CPI(M) छात्र संगठन के सदस्यों ने उसकी बुरी तरह से रैगिंग की थी।

12 छात्र हुए सस्पेंड

दरअसल, मृतक जे एस सिद्धार्थन विश्वविद्यालय में बीवीएससी और पशुपालन के दूसरे वर्ष का छात्र था। वह 18 फरवरी को पुरुष छात्रावास के टॉयलेट में लटका हुआ पाया गया था। मामले में छात्र के सहकर्मी सहित 12 छात्रों को सस्पेंड कर दिया। सस्पेंड किए गए छात्रो में कॉलेज यूनियन अध्यक्ष, एक यूनियन सदस्य और एसएफआई इकाई सचिव शामिल हैं।

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मामले में पुलिस ने अब आत्महत्या के लिए उकसाने, गलत तरीके से रोकना और खतरनाक हथियारों या साधनों से जानबूझकर चोट पहुंचाने के साथ-साथ केरल निषेध अधिनियम के तहत आईपीसी की धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।

सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय के एंटी-रैगिंग सेल को छात्रों से शिकायत मिली कि सिद्धार्थन की मौत से दो दिन पहले 16 फरवरी को छात्रावास में एक दर्जन से अधिक छात्रों ने उसकी रैगिंग की थी। सूत्रों ने बताया कि एंटी-रैगिंग कमेटी ने 22 फरवरी को पुलिस को इसकी सूचना दी और 12 छात्रों को कॉलेज की सभी शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित कर दिया गया।

छात्र की मौत के मामले ने राज्य की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस ने सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छात्र शाखा एसएफआई पर युवक की पीट-पीटकर हत्या करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का यह आरोप छात्र के पिता के उस दावे के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने छात्रावास में उनके बेटे को तीन दिनों तक पीटा था। हालांकि एसएफआई ने आरोप से इनकार किया है।

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12 आरोपी अभी भी फरार

इस बीच पुलिस ने आज उन 18 छात्रों में से छह को गिरफ्तार कर लिया, जिन पर 20 साल के सिद्धार्थन की मौत के सिलसिले में कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार छात्रों की उम्र 20 से 23 साल के बीच है। हालांकि, पुलिस ने कहा कि मामले के 12 आरोपी अभी भी फरार हैं।

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मृतक छात्र सिद्धार्थन के पिता के अनुसार, उनके बेटे के साथ पढ़ने वाले छात्रों ने उन्हें बताया कि सिद्धार्थन की उसी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले कुछ स्थानीय एसएफआई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर हत्या कर दी। सिद्धार्थन के पिता ने मीडिया को बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उनके बेटे के शरीर पर कई चोटें थीं और पेट खाली था, जिससे पता चलता है कि उसे दो-तीन दिन तक खाना नहीं खाने दिया गया

'बेटे को निर्वस्त्र किया और पीटा, कई दिनों तक बंद कर भूखा रखा'

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पता चला है कि रैगिंग के दौरान उनके बेटे को निर्वस्त्र कर रखा गया और उसकी पिटाई की गई। पिता ने दावा किया, ‘‘मामले में एसएफआई कार्यकर्ता और स्थानीय नेता शामिल हैं, इसलिए पार्टी उन्हें बचाएगी। मेरा मानना ​​है कि मामले में आरोपियों को बचाने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप है, वरना पुलिस अपराधियों को जल्द पकड़ लेती। हमारी पुलिस सक्षम है, लेकिन उसे दबाव का सामना करना पड़ रहा होगा।’’

कांग्रेस ने लगाया आरोप

वहीं मामले में राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने आरोप लगाया कि आरोपी एसएफआई कार्यकर्ता थे और उन्होंने छात्र को पीट-पीटकर मार डाला। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि पुलिस अभी तक इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है क्योंकि उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को जल्द पकड़ा जाए, वरना कांग्रेस विरोध-प्रदर्शन करेगी।

मामले में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री और भाजपा नेता वी मुरलीधरन ने आरोप लगाया कि एसएफआई कार्यकर्ताओं की संलिप्तता के कारण इस घटना को आत्महत्या के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है।

वहीं एसएफआई की प्रदेश अध्यक्ष अनुश्री ने दावा किया कि मामले का कोई भी आरोपी इस समय संगठन का सदस्य नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि एसएफआई ने शुरू से ही मामले की विस्तृत जांच की मांग की है और उसकी पुलिस जांच में हस्तक्षेप करने की कोई मंशा नहीं है। पुलिस ने शुरू में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में आत्महत्या के लिए उकसाने सहित कई प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। फिलहाल यह मामला धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।

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