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सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर इंजीनियर्स को धोखा देता था यह गिरोह, एक गलती से आया पकड़ में

इस गैंग के लोगों का दिमाग इतना शातिर था कि सामने वाले को भनक तक नहीं लगती थी कि उनके साथ धोखा हो रहा है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Jyoti Gupta
Updated: June 05, 2023 18:09 IST
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर इंजीनियर्स को धोखा देता था यह गिरोह  एक गलती से आया पकड़ में
प्रतीकात्मक तस्वीर (jansatta)
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बैंगलौर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है जो इंजीयर्स को सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे और फिर धोखा देकर निकल जाते थे। फिलहाल इस गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस ने आरोपियों की पहचान प्रज्वल डी, प्रवीण एम सोमनाकट्टी उर्फ ​​बलराज, प्रदीप के, एसडी पुरुषोत्तम, लोहित बी, शिवप्रसाद चन्ननवार और विजयकुमार शिवलिंगप्पा चन्नानवर के रूप में की है। पुलिस का कहना है कि प्रज्वल इस घोटाले का मास्टरमाइंड था और उसके साथियों ने बिचौलियों के रूप में काम किया।

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यह गिरोह उन लोगों को अपने जाल में फंसाते थे जो बैंगलोर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (बेस्कॉम) में जूनियर इंजीनियर या सहायक कार्यकारी इंजीनियर बनना चाहते थे। कई लोग सरकारी नौकरी पाने की चाहत में इस गिरोह के झांसे में फंस गए यह गिरोह सराकरी इंजीनियर बनाने के नाम पर लोगों से घूस लेता था और फिर उन्हें नकली ज्वाइनिंग लेटर पकड़ा देता था। इस गैंग के लोगों का दिमाग इतना शातिर था कि सामने वाले को भनक तक नहीं लगती थी कि उनके साथ धोखा हो रहा है। असल में गिरोह के लोग सरकारी इंजीनियर बनने की चाहत रखने वाले लोगों से कहते थे कि विभाग में उनकी ऊपर तक जान-पहचान है। उनके कनेक्शन Bescom के भीतर ऊंचे पदाधिकारियों से है।

लोगों को पकड़ाते थे नकली ज्वाइनिंग लेटर

इस गिरोह का खुलासा 22 मई के बाद तब हुआ जब हुक्केरी के 29 साल के वैभव वेंकटेश कुलकर्णी बेंगलुरु के क्रिसेंट रोड स्थित बेस्कॉम ऑफिस में जूनियर इंजीनियर के रूप में शामिल होने पहुंचे। वहां बेस्कॉम के अधिकारियों ने पाया कि उनका नियुक्ति पत्र नकली था। इसके बाद असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पी सोमशेखर ने हाई ग्राउंड पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

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गिरोह के सदस्य लोगों से सरकारी नौकरी इंजीनियर बनाने के नाम पर 25 से 30 लाख रुपये घूस लेते थे। वे कहते थे कि कंपनी में अंदर तक उनकी पकड़ है। इसके बाद वे खाली पदों के बारे में झूठी कहानी बनाते थे। हालांकि वैभव वेंकटेश कुलकर्णी के साथ धोखाधड़ी करने के बाद वे बच नहीं पाए और पुलिस की गिरफ्त में आ गए।

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