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रविचंद्रन अश्विन के करियर का सबसे मुश्किल दौर: पिता से हुई लड़ाई, क्रिकेट छोड़ MBA करने का बना लिया था मन

2017 में रविचंद्रन अश्विन को भारत की व्हाइट बॉल टीम से बाहर कर दिया गया था। ऑफ स्पिनर ने खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था।
Written by: ईएनएस | Edited By: Tanisk Tomar
नई दिल्ली | March 18, 2024 10:27 IST
रविचंद्रन अश्विन के करियर का सबसे मुश्किल दौर  पिता से हुई लड़ाई  क्रिकेट छोड़ mba करने का बना लिया था मन
टीम इंडिया के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन। (फोटो - PTI)
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रविचंद्रन अश्विन खुद को 'काफी मजबूत' व्यक्ति मानते हैं। उन्होंने अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना किया है, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर चुने जाने के बावजूद वह क्रिकेट छोड़ना चाहते थे। सात साल पहले 2017 की बात है। उन्हें भारत की व्हाइट बॉल टीम से बाहर कर दिया गया। इसका उन्हें कारण भी नहीं बताया गया। इसके बाद उनकी पिता से लड़ाई हुई और उन्होंने क्रिकेट को अलिवदा कहकर एमबीए करने का मन बना लिया था।

रविचंद्रन अश्विन ने हाल ही में इंटरनेशनल क्रिकेट में बड़ी उपलब्धि हासिल की। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 500 विकेट पूरे किए। इसके बाद 100 टेस्ट खेलने की उपलब्धि भी हासिल की। दिग्गज स्पिनर ने अपने करियर के सबसे मुश्किल पल के बारे में द इंडियन एक्सप्रेस के आइडिया एक्सचेंज में बताया।

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क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया

अश्विन ने कहा, " मैंने क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया। मैं खुद से सवाल कर रहा था कि मैं क्या करूंगा? मैंने कहा कि मैं जीवन में जो कुछ भी करूंगा, उसमें बेस्ट होने की कोशिश करूंगा। उस पेशे में जितना अच्छा हो सकता हूं बनूंगा। मैं एमबीए करने और मार्केटिंग में जाने के बारे में सोच रहा था।" अश्विन की पत्नी प्रीति ने हाल ही में द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, " उन्हें नहीं पता कि उन्हें बाहर किया गया या आराम दिया गया। अगर कोई अश्विन को उनकी कमी बताता तो वह इस पर काम करते। लेकिन जब उन्हें यह नहीं बताया गया कि वह टीम में क्यों नहीं थे, तो मैंने उन्हें संघर्ष करते देखा।"

मन की बातें करीबी लोगों के साथ शेयर करने भी दिक्कत हो रही थी

अश्विन को मन की बात को अपने करीबी लोगों के साथ शेयर करने भी दिक्कत हो रही थी। उन्होंने बताया, "भले ही मेरा परिवार मेरे साथ था। मैं अपने परिवार के पास वापस आ सकता था, लेकिन मैं बहुत सी बातें नहीं कह सकता था। मेरे हिसाब से क्रिकेट कई मायनों में एक कॉर्पोरेट जैसा है, जिसमें कुछ सरकारी संगठनों जैसी विशेषताएं भी हैं।"

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यह सब राजनीति है

अश्विन ने कहा, "हालांकि, अगर मैं अपने पिता से कॉर्पोरेट के बारे में बात करता हूं, तो वह कहते हैं यह सब राजनीति है। यह बहुत बड़ी बात है। प्रशंसक भी ऐसा करते हैं। कभी-कभी, जब मैं खुद को अंधकार मे पाता हूं, तो मैंने भी थोड़ा-बहुत ऐसा किया है। लेकिन ऐसा करना बहुत गलत बात है क्योंकि आपको लगता है कि किसी को सफलता बहुत आसानी से मिल रही है। यह। मेरी पत्नी एक अद्भुत श्रोता है, लेकिन उसका परिवार बहुत छोटा था और मैं उसे पर्याप्त समय नहीं दे पा रहा था।"

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पिता से क्यों हुई लड़ाई

अश्विन ने अपने पिता से लड़ाई के बारे में बताते हुए कहा, " मेरे पिताजी ने कुछ कहा। घर में दिक्कत शुरू हुई। मैंने अपने पिताजी से कुछ कहा। मेरे पिताजी और मैं बहुत लड़ते हैं। अंत में उन्होंने एक बयान दिया कि आप जानते हैं क्या? आप बहुत सीधे और ईमानदार हैं। इसीलिए आपको खराब लग रहा हैं। उन्होंने यह बयान दिया और चले गए। मैं कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जो भावुक हो। मुझे लगता है कि मैं काफी मजबूत हूं, लेकिन मैंने खुद को लॉक कर लिया। फिर मैं रोने लगा। मैं बहुत देर तक रोता रहा। मुझे उम्मीद नहीं थी कि मेरे पिता ऐसा कहेंगे। मुझे नहीं लगता कि उन्हें एहसास भी था कि उन्होंने क्या कहा?"

कैसे स्थिति सुधरी

अश्विन ने आगे बताया, " मैंने सोचा कि मैं अपने घर के लोगों को बहुत परेशान कर रहा हूं। मैं खुद को कमरे में बंद कर लेता था। मैंने क्रिकेट नहीं देख रहा था। मेरे कमरे में हर वक्त अंधेरा रहता था।" अश्विन ने एमबीए की डिग्री लेने और मार्केटिंग में करियर बनाने जैसे विकल्पों पर विचार करते हुए, काउंसलिंग लेने का फैसला किया। उन्होंने इसे लेकर कहा, "इसने मेरी जिंदगी बेहतरी के लिए बदल दी।"

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