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पूर्व विधायकों की बढ़ेगी पेंशन, यात्रा भत्ता में वृद्धि का भी प्रस्ताव, छत्तीसगढ़ सरकार ने पेश किया विधेयक

संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि विधेयक अगले कुछ दिनों में सदन में पारित हो जाएगा।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: नीलम राजपूत
Updated: March 20, 2023 21:58 IST
पूर्व विधायकों की बढ़ेगी पेंशन  यात्रा भत्ता में वृद्धि का भी प्रस्ताव  छत्तीसगढ़ सरकार ने पेश किया विधेयक
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (फोटो- एएनआई)
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य सरकार ने सोमवार (20 मार्च, 2023) को एक संशोधन विधेयक पेश किया जिसमें राज्य के पूर्व विधायकों के पेंशन और यात्रा भत्ते में वृद्धि का प्रस्ताव है। विधानसभा में आज संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य वेतन, भत्ता, पेंशन (संशोधन) विधेयक पेश किया।

पूर्व विधायकों की पेंशन 35 हजार रुपये से बढ़ाकर 58,300 रुपये तक करने का प्रस्ताव

चौबे ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि विधेयक अगले कुछ दिनों में सदन में पारित हो जाएगा। विधानसभा में पेश किए गए विधेयक में पूर्व विधायकों की पेंशन 35 हजार रुपये से बढ़ाकर 58,300 रुपये करने का प्रस्ताव है। विधेयक के अनुसार पूर्व विधायक सदस्यता के अपने पहले कार्यकाल (पांच साल से अधिक कार्यकाल) के बाद हर एक साल के लिए प्रति माह एक हजार रुपये की अतिरिक्त पेंशन पाने का भी हकदार होगा।

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रेलवे और हवाई भत्ता भी बढ़ाने का प्रस्ताव

विधेयक में कहा गया है कि प्रत्येक मौजूदा सदस्य रेलवे/हवाई यात्रा के लिए मौजूदा आठ लाख रुपये प्रति वर्ष के बजाय 10 लाख रुपये प्रति वर्ष का भत्ता पाने का हकदार होगा। वहीं, पूर्व विधायकों के लिए यह भत्ता चार लाख रुपये प्रति वर्ष से बढ़ाकर पांच लाख रुपये प्रति वर्ष किया जाएगा। इसके अलावा पूर्व विधायक क्रमश: 10 हजार रुपये और 15 हजार रुपये का टेलीफोन भत्ता और अर्दली भत्ता पाने के हकदार होंगे।

राज्य सरकार के खजाने पर पड़ेगा 16.96 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ

अधिकारियों ने बताया कि पहले पूर्व सदस्यों के लिए टेलीफोन और अर्दली भत्ते का कोई प्रावधान नहीं था। उन्होंने कहा कि पेंशन और भत्तों में वृद्धि से राज्य के खजाने पर लगभग 16.96 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ पड़ने की संभावना है। विधानसभा में पिछले वर्ष जुलाई माह में मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में वृद्धि के लिए विधेयक पारित किया था, जिससे राज्य के खजाने पर 6.81 करोड़ रुपये का वार्षिक बोझ पड़ा था। छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 सदस्य हैं।

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