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NPS Investment : एनपीएस के ऑटो और एक्टिव च्वॉयस में क्या है बेहतर? बड़े रिटायरमेंट कॉर्पस के लिए किसे करें सेलेक्ट

Auto vs Active Choice in NPS : नेशनल पेंशन स्कीम में निवेशकों को दो विकल्प मिलते हैं: ऑटो च्वॉयस और एक्टिव च्वॉयस। इनमें से कौन सा विकल्प बेहतर है?
Written by: Viplav Rahi
Updated: June 17, 2024 13:47 IST
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NPS : रिटायरमेंट फंड तैयार करने के लिए नेशनल पेंशन स्कीम में निवेश एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। (Image : Pixabay)
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Auto vs Active Choice in NPS : अगर आप अपने रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं, तो नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में निवेश एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। लेकिन एनपीएस में निवेश करते समय आपको एक अहम फैसला करना पड़ता है, जिसका सही होना बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने के लिए जरूरी है। ये फैसला है, एनपीएस में निवेश के लिए उपलब्ध दो विकल्पों में से किसी एक को सेलेक्ट करने का। ये दो विकल्प हैं : ऑटो च्वॉयस (Auto choice) और एक्टिव च्वॉयस (Active choice)। इनमें से एक का चुनाव करने के लिए यह जानना जरूरी है कि इनमें से कौन सा विकल्प बेहतर है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

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NPS का ऑटो च्वॉयस ऑप्शन क्या है?

नेशनल पेंशन स्कीम में ऑटो च्वॉयस के तहत, आपकी उम्र के हिसाब से आपके निवेश को इक्विटी और डेट में अपने आप अलोकेट यानी आवंटित कर दिया जाता है। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, एनपीएस आपके इक्विटी एक्सपोजर को कम करके डेट में निवेश बढ़ाता रहता है। यह विकल्प उन निवेशकों के लिए अच्छा है, जिन्हें निवेश के तकनीकी पहलुओं को समझने में दिक्कत होती है या जिनके पास समय की कमी है।

ऑटो च्वॉयस में भी कई ऑप्शन हैं 

एनपीएस के ऑटो च्वॉयस में भी इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजी के हिसाब से कई अलग-अलग ऑप्शन मिलते हैं:

1. एग्रेसिव लाइफ साइकल फंड : एनपीएस में निवेशकों को ऑटो च्वॉयस के तहत एक विकल्प एग्रेसिव लाइफ साइकल फंड (LC75) का मिलता है। इसमें 35 साल की उम्र तक फंड का 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी में निवेश किया जाता है। इसके बाद हर साल इक्विटी का हिस्सा घटता जाता है और डेट का हिस्सा बढ़ता जाता है। निवेशक की उम्र 55 साल होने तक इक्विटी का हिस्सा घटकर 15 फीसदी रह जाता है।

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2. मॉडरेट लाइफ साइकल फंड : एनपीएस में निवेशकों को ऑटो च्वॉयस के तहत दूसरा विकल्प मॉडरेट लाइफ साइकल फंड (LC50) का मिलता है। दरअसल यह स्कीम का डिफॉल्ट विकल्प है। इसमें 35 साल की उम्र तक 50 फीसदी निवेश इक्विटी में और 50 फीसदी डेट में होता है। निवेशक की उम्र 55 साल होने तक इक्विटी का हिस्सा घटकर 10 फीसदी रह जाता है।

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3. कंजर्वेटिव लाइफ साइकल फंड : एनपीएस में निवेशकों को ऑटो च्वॉयस के तहत तीसरा विकल्प कंजर्वेटिव लाइफ साइकल फंड (LC25) का मिलता है। इसमें इनवेस्टर की उम्र 35 साल होने तक 25 फीसदी निवेश इक्विटी में होता है। इसके बाद, उम्र के साथ साथ इक्विटी का हिस्सा घटता जाता है। निवेशक की उम्र 55 साल होने तक इक्विटी का हिस्सा घटकर 5 फीसदी रह जाता है।

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ऑटो च्वॉयस में हर साल री-बैलेंस होता है आपका फंड

एनपीएस के ऑटो च्वॉयस में उम्र के हिसाब से अलोकेशन बनाए रखने के लिए आपके निवेश को हर साल आपके जन्मदिन पर री-बैलेंस किया जाता है। ऐसा दो वजहों से किया जाता है। एक तो आपकी बढ़ती उम्र के हिसाब से जरूरी होने पर इक्विटी अलोकेशन कम किया जाता है। दूसरे, अगर इक्विटी कीमतों में उतार-चढ़ाव होने की वजह से आपके फंड में इक्विटी और डेट का रेशियो बदल जाता है, तो इसे वापस सही अनुपात में लाने के लिए आवश्यक बदलाव किया जाता है।

NPS का एक्टिव च्वॉयस ऑप्शन क्या है?

एक्टिव च्वॉयस के तहत, निवेशक अपने फंड के लिए इक्विटी और डेट अलोकेशन यानी आवंटन का चुनाव खुद कर सकते हैं। इस विकल्प के तहत आप अपने निवेश का अधिकतम 75 फीसदी इक्विटी में और बाकी डेट में लगा सकते हैं। डेट में निवेश की कोई सीमा नहीं है। आप इसमें 100 फीसदी निवेश कर सकते हैं।

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ऑटो और एक्टिव च्वॉयस के प्रदर्शन में फर्क

एतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि लंबी अवधि के दौरान एक्टिव च्वॉयस का प्रदर्शन बेहतर रहा है। मिसाल के तौर पर अगर आपने पिछले 15 साल के दौरान एनपीएस में हर महीने 10,000 रुपये लगाए होते, तो एक्टिव च्वॉयस के तहत 75 फीसदी फंड इक्विटी में निवेश करने पर करीब 50 लाख रुपये का कॉर्पस तैयार हो जाता। जबकि इतना ही निवेश ऑटो च्वॉयस के तहत डिफॉल्ट मॉडरेट लाइफ साइकिल फंड के जरिए करने पर करीब 43 लाख रुपये का कॉर्पस बनता, जो एक्टिव च्वॉयस से लगभग 7 लाख रुपये कम है।

आपको क्या करना चाहिए?

अगर आप 20 या 30 साल के हैं, तो एक्टिव च्वॉयस का चुनाव करके इक्विटी अलोकेशन को 75 फीसदी के आसपास रखना सबसे अच्छा है। लम्बी अवधि में इक्विटी से जुड़े जोखिम कम हो जाते हैं और इससे बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार होता है। लेकिन अगर आपकी उम्र रिटायरमेंट करीब पहुंच रही है, तो इक्विटी एक्सपोजर को कम रखकर और डेट में निवेश बढ़ाना बेहतर है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर आपके पास रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए ज्यादा वक्त नहीं है, तो शॉर्ट टर्म में इक्विटी इनवेस्टमेंट में ज्यादा अस्थिरता देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर, एनपीएस में निवेश करना रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करने का एक सुरक्षित और फायदेमंद तरीका है। ऑटो च्वॉयस उन निवेशकों के लिए अच्छा ऑप्शन है, जो रिटायरमेंट के बेहद करीब हैं और काफी कंजर्वेटिव तरीके से निवेश करना चाहते हैं। जबकि लम्बी अवधि के निवेश से ऊंचा रिटर्न हासिल करना है, तो एक्टिव च्वॉयस पर विचार करना चाहिए।

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