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Share Market: शेयर बाजार में क्यों आती है गिरावट, ऐसा होने पर क्या करें आम निवेशक

Nifty, Sensex Crash: निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट आने पर आम निवेशकों को घबराने की जगह समझदारी से काम लेना चाहिए, वरना नुकसान उठाना पड़ सकता है।
Written by: Viplav Rahi
July 10, 2024 19:20 IST
share market  शेयर बाजार में क्यों आती है गिरावट  ऐसा होने पर क्या करें आम निवेशक
Stock Market Crash: क्या शेयर बाजार में आने वाली गिरावट दरअसल कोई बड़ी अनहोनी है, जिससे घबराना चाहिए? (Image : Pixabay)
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Why Share Markets Crash, How to Deal with it: निफ्टी और सेंसेक्स यानी शेयर बाजार में गिरावट आने पर आम निवेशक कई बार घबरा जाते हैं। जिन शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में उन्होंने निवेश किया होता है, उसकी वैल्यू देखते ही देखते गिर जाती है। ऐसे में कई बार निवेशकों के मन में सवाल उठता है कि शेयर या इक्विटी फंड में पैसे लगाकर कहीं उन्होंने गलती तो नहीं कर दी? लेकिन क्या वाकई ऐसा है? क्या शेयर बाजार में आने वाली गिरावट दरअसल कोई बड़ी अनहोनी है, जिससे घबराना चाहिए? और अगर ऐसा नहीं है, तो आखिर बाजार में गिरावट आने पर निवेशकों को क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब।

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गिरावट कोई अनोखी बात नहीं

सबसे पहले तो निवेशकों को यह समझना चाहिए कि बाजार में गिरावट आना कोई अनोखी बात नहीं है। अगर आपने शेयर बाजार में पैसे लगाए हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि उतार-चढ़ाव आना यानी निवेश से जुड़ा रिस्क तो मार्केट का स्वाभाविक गुण है। जिन्हें पहले से तय रिटर्न चाहिए, उनके लिए बैंक एफडी, पीपीएफ या बॉन्ड जैसे फिक्स या स्थिर रिटर्न वाले विकल्प मौजूद हैं।

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उतार-चढ़ाव से मिलता है ऊंचे रिटर्न का मौका

दरअसल, अगर आप समझ-बूझकर शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं, तो उसमें आने वाले उतार-चढ़ाव को बेहतर मुनाफा कमाने का मौका समझना चाहिए। बशर्ते आप ठोक-बजाकर निवेश करें और बाजार में लंबे समय तक टिकने को तैयार हों। सच तो ये है कि इक्विटी यानी शेयर्स में किए गए निवेश पर औसत से बेहतर रिटर्न मिलता ही इसलिए है, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इसी की बदौलत निचले स्तरों पर खरीदारी और ऊंचे स्तर पर एग्जिट का मौका मिलता है।

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सेंटिमेंट का भी होता है असर

बाजार में गिरावट या तेजी कई कारणों से आ सकती है। पूरी अर्थव्यवस्था या किसी बड़ी कंपनी का आर्थिक प्रदर्शन इसकी वजह हो सकता है। सरकार का उठाया कोई ऐसा कदम जिससे कारोबार पर सीधा असर पड़ने की आशंका है, बाजार में तेजी या गिरावट को ट्रिगर कर सकता है। मौसम से जुड़ी कोई खबर भी इसकी वजह हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किन्हीं दो देशों के बीच युद्ध या बड़े मुल्कों के बीच आपसी तनाव बढ़ने का असर भी बाजार पर पड़ता है। अमेरिकी सेंट्रल बैंक यानी यूएस फेडरल रिजर्व की नीतियां भी सिर्फ अमेरिका ही नहीं पूरी दुनिया के बाजारों को प्रभावित करती हैं। इनमें से कुछ कारण, जैसे अर्थव्यवस्था या कंपनी के खराब प्रदर्शन को फंडामेंटल यानी बुनियादी कारण कहते हैं। जबकि सीधे-सीधे प्रभावित नहीं करने वाली खबरें या संभावनाएं जब बाजार के भावनात्मक माहौल को प्रभावित करती हैं, तो इन्हें मार्केट सेंटिमेंट्स कहा जाता है।

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गिरावट आने पर क्या करें

बाजार में गिरावट आने पर आम निवेशकों को सबसे पहले तो उसकी वजह को समझने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए आप बाजार, अर्थव्यवस्था और बिजनेस से जुड़ी अहम खबरें और विश्लेषण देने वाली वेबसाइट्स की मदद ले सकते हैं। जानकारों की राय और सरकार की तरफ से होने वाले एलानों पर नजर रख सकते हैं। अगर गिरावट के कारण फंडामेंटल्स से जुड़े हैं, तो उन्हें गंभीरता से समझने की जरूरत है। लेकिन अगर फंडामेंटल मजबूत होने के बावजूद सिर्फ मार्केट सेंटिमेंट बिगड़ने यानी निवेशकों में घबराहट फैलने के कारण गिरावट आ रही है, तो लंबी अवधि के निवेशकों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। कई बार बाजार में घबराहट फैलने के कारण बिकवाली शुरू हो जाती है। एक बार ऐसी गिरावट शुरू हो जाने पर, अक्सर घबराहट और बढ़ जाती है, जिससे बाजार में और अधिक गिरावट आती है। लेकिन यह निगेटिव साइकल सिर्फ सेंटिमेंट्स की वजह से हो, तो ज्यादा लंबा नहीं चलता।

घबराहट से बचें

अगर आप बाजार से मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना चाहिए। और लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स को बाजार में थोड़े समय के लिए आने वाली गिरावट से घबराना नहीं चाहिए। घबराने की जगह शांत रहकर उसकी वजह को समझना बेहतर है। साथ ही यह भी याद रखना चाहिए कि बाजार में समय-समय पर आने वाली गिरावट या करेक्शन आपकी इनवेस्टमेंट जर्नी यानी निवेश यात्रा का एक अहम हिस्सा है।

जल्दबाजी में फैसले न करें

जल्दबाजी में कोई भी फैसला करने से बचें। जल्दबाजी में काम करना, मसलन, अपने लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट को बाजार के निचले स्तर पर बेच देना, नुकसान से बचाने की बजाय घाटे की वजह बन सकता है। अगर आपके शेयर या इक्विटी फंड के यूनिट्स बेच देने के बाद बाजार में रिकवरी आती है, तो आपको नुकसान हो सकता है। अगर आपका इनवेस्टमेंट होराइजन लंबा है और आपने सही फंड या शेयर में पैसे लगाए हैं, तो थोड़े समय के लिए आने वाले उतार-चढ़ाव ज्यादा मायने नहीं रखते। ऐसे में आपके लिए शॉर्ट टर्म गिरावट को नजरअंदाज करना ही बेहतर है।

डायवर्सिफिकेशन से घटाएं रिस्क

अगर आप अपने निवेश पर रिस्क कम करना चाहते हैं, तो डायवर्सिफिकेशन करें। इसका मतलब है अपने पूरे इनवेस्टमेंट को अलग-अलग एसेट्स क्लास में बांटना। इसके अलावा एक ही एसेट क्लास के भीतर भी पूरी रकम को एक ही जगह न लगाकर अलग-अलग इंस्टूमेंट्स में बांटकर निवेश करना। मिसाल के तौर पर आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट, गोल्ड, रियल एस्टेट समेत हर तरह के एसेट्स होने चाहिए। इक्विटी में किया गया निवेश भी अलग-अलग शेयरों या तीन-चार म्यूचुअल फंड्स के जरिये डायवर्सिफाई किया जाना चाहिए। निवेश में यह विविधता आपके लिए जोखिम को कम कर सकती है। इसके अलावा एक इमरजेंसी फंड भी रखें और इक्विटी में सिर्फ वही पैसे लगाएं, जिनकी आपको शॉर्ट टर्म में जरूरत नहीं है।

शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के लालच से बचें

अगर आप शेयर बाजार में निवेश करने आए हैं, तो निवेशक की तरह ही बर्ताव करें, ट्रेडर की तरह नहीं। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान बार-बार कम कीमत पर खरीदने और तेजी आने पर बेचकर मुनाफा कमाने का लालच आपको सट्टेबाजी या शॉर्ट टर्म ट्रे़डिंग के चक्कर में उलझा सकता है। इससे बचें, क्योंकि ऐसी ट्रेडिंग में आमतौर पर फायदे से ज्यादा नुकसान ही होता है। निवेश के लिए अपनी लंबी अवधि की रणनीति पर टिके रहें। बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव का दौर लंबा चल रहा हो, तो एक बार में बड़ी रकम लगाने की बजाय इक्विटी फंड में एसआईपी के जरिए धीरे-धीरे निवेश करें।
अगर आप इन बातों पर अमल करेंगे और बाजार में गिरावट के दौरान बिना घबराए, शांत रहकर अपनी लॉन्ग टर्म और डायवर्सिफाइड इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजी पर चलेंगे, तो आपकी निवेश यात्रा लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन का रास्ता साफ करेगी।

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