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Budget 2024: कहीं खुशी कहीं मायूसी… महिलाओं को लेकर सरकार के ऐलान पर बंटा उद्योग जगत

Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट 2024-25 में महिलाओं लेकर कई घोषणाएं की। इस पर उद्योग जगत ने अपनी राय दी है। जानिए किसने क्या कहा?
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Jyoti Gupta
नई दिल्ली | Updated: February 06, 2024 14:07 IST
budget 2024  कहीं खुशी कहीं मायूसी… महिलाओं को लेकर सरकार के ऐलान पर बंटा उद्योग जगत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फोटो सोर्स: Sansad/ANI)
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में अंतरिम बजट 2024-25 पेश किया। उन्होंने महिलाओं को लेकर कई तरह की घोषणाएं की। इस दौरान वित्त मंत्री ने कहा, “आयुष्मान भारत योजना के तहत सभी आशा वर्कर्स, आंगनवाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स को भी कवर किया जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा “नौ करोड़ महिलाओं के साथ 83 लाख एसएचजी सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के साथ ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदल रहे हैं। उनकी सफलता ने लगभग 1 करोड़ महिलाओं को पहले ही लखपति दीदी बनने में मदद की है। सफलता से उत्साहित होकर, इसे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।”

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लखपति दीदी का लक्ष्य 2 करोड़ से बढ़ाकर अब 3 करोड़ कर दिया गया है। वहीं महिलाओं के लिए गए फैसलों पर उद्योग जगत बंटा हुआ नजर आया। जानिए किसने क्या कहा।

नोवाट्र के सह-संस्थापक और सीईओ Vipanchi Handa ने कहा- हम रोमांचित हैं

नोवाट्र के सह-संस्थापक और सीईओ Vipanchi Handa ने कहा ''अंतरिम बजट में महिला सशक्तिकरण पर जोर देखकर हम रोमांचित हैं। महिलाओं में भारत के सामाजिक-आर्थिक स्थिति को नया आकार देने की जबरदस्त क्षमता है, खासकर टियर-2 बाजारों में। पिछले दशक में उच्च शिक्षा के लिए महिलाओं के नामांकर में 28% की वृद्धि हुई है। इसके अलावा अब एसटीईएम पाठ्यक्रमों में 43% नामांकन लेने वाली महिलाएं हैं।

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टीक्यूएच कंसल्टिंग की सह-संस्थापक अपराजिता भारती ने कहा कोई बड़ी घोषणा नहीं

टीक्यूएच कंसल्टिंग की सह-संस्थापक अपराजिता भारती ने कहा, उम्मीद के मुताबिक अंतरिम बजट में कोई बड़ी नई घोषणा नहीं की गई है। सरकार ने पूंजीगत व्यय बढ़ाने जैसी अपनी पिछली नीतियों के प्रति स्थिर रुख अपनाया है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश का स्वागत है। यह भारत को नवाचार के पावरहाउस में बदल सकता है। नारी शक्ति पर निरंतर ध्यान लिंग बजट के तहत आवंटन में वृद्धि और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने में एसएचजी की स्वीकार्यता से भी स्पष्ट है।

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