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Electoral Bonds data: दूसरी लिस्ट से बड़ा खुलासा, 'लॉटरी किंग' की फ्यूचर गेमिंग ने बीजेपी से ज्यादा इस पार्टी को दिया चंदा, 600 करोड़ के पार आंकड़ा

Electoral Bonds Data: तमिलनाडु में राज कर रही DMK को किसने दिया सबसे ज्यादा चंदा? जानें पार्टी ने कितना पैसा बटोरा?
Written by: Naina Gupta
Updated: March 18, 2024 11:45 IST
electoral bonds data  दूसरी लिस्ट से बड़ा खुलासा   लॉटरी किंग  की फ्यूचर गेमिंग ने बीजेपी से ज्यादा इस पार्टी को दिया चंदा  600 करोड़ के पार आंकड़ा
Electoral Bonds Data: डीएमके को कहां से मिला सबसे ज्यादा चंदा?
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Electoral Bonds data 2nd list: इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड होने के बाद सार्वजनिक हो गया है। चुनावी बॉन्ड डेटा की दूसरी लिस्ट से यह खुलासा हो गया है कि किस कंपनी ने किस राजनीतिक पार्टी को चंदा दिया। इसके साथ ही इस लिस्ट से यह भी पता चल गया है कि किस पार्टी को एक कंपनी या व्यक्ति की तरफ से कितना डेटा मिला। इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सबसे ज्यादा चंदा मिला। लेकिन TMC, BJD जैसी पार्टियों ने भी इलेक्टोरल बॉन्ड से खूब पैसा बटोरा। पर क्या आपको पता है कि तमिलनाडु में शासन कर रही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को सबसे ज्यादा चंदा किसने दिया? चलिए आज बात करते हैं दक्षिण भारत की बड़ी राजनीतिक पार्टी में से एक DMK के बारे में और आपको बताते हैं कहां से इसे सबसे ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड्स दान में मिले।

इलेक्टोरल बॉन्ड्स डेटा की पहली लिस्ट सार्वजनिक होने के बाद से जिस एक कंपनी की सबसे ज्यादा चर्चा है वो है- Future Gaming & Hotel Services

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DMK को 656.5 करोड़ रुपये किसने किए दान?

फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज के मालिक सैंटियागो मार्टिन (Santiago Martin) को 'लॉटरी किंग' के नाम से जाना जाता है। इस कंपनी ने कुल 1300 करोड़ से ज्यादा के इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदे। अब चुनावी बॉन्ड्स डेटा की दूसरी लिस्ट से खुलासा हुआ है कि इस कंपनी ने तमिलनाडु में राज कर रही DMK को सबसे ज्यादा यानी 656.5 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड दान दिए। डीएमके ने इन्हें एन्कैश कराया और जमकर पैसा बटोरा।

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बता दें कि अब असंवैधानिक करार दिए जा चुके इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए कोई भी व्यक्ति या कंपनी बिन पहचान छिपाए किसी राजनीतिक पार्टी को अनलिमिटेड डोनेशन दे सकती थी।

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फ्यूचर गेमिंग ने कुल 1368 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड एसबीआई से खरीदे। जिनमें से करीब 37 प्रतिशत डीएमके को दान दिए। इसके अलावा भी DMK को कई बड़ी कंपनियों ने बड़े स्तर पर डोनेशन किया। इनमें मेघा इंजीनियरिंग (105 करोड़ रुपये), इंडिया सीमेंट्स (14 करोड़ रुपये) और Sun TV (10 करोड़ रुपये) शामिल हैं।

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चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए डेटा के मुताबिक, 2018 से अब तक बीजेपी को सबसे ज्यादा 6,986.5 करोड़ रुपये के बॉन्ड्स मिले। वहीं दूसरे नंबर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) रही जिसे कुल 1397 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड्स मिले। जबकि BRS को 1322 करोड़ रुपये और ओडिशा में सत्ताधारी बीजेडी को 944.5 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड दान में मिले। DMK देश में छठी सबसे बड़ी पार्टी रही जिसे इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए सबसे ज्यादा चंदा मिला।

सैंटियागो मार्टिन कौन है? (Who Is Santiago Martin?)

सैंटियागो मार्टिन की फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज ने 2019 से 2024 के बीच कुल 1368 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदे। इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर अपलोड किए गए डेटा से यह जानकारी मिलती है।

बता दें कि सैंटियागो मार्टिन ने टीनएज में लॉटरी टिकट बेचना शुरू किया था और इसी से रियल एस्टेट का साम्राज्य खड़ा करने तक का सफर तय किया है। अपने परिवार को सपोर्ट करने के लिए वह म्यांमार में मजदूरी करने गए और 1980 के आखिरी सालों में वापस भारत लौटे। मार्टिन के नॉन-प्रॉफिट Martin Charitable Trust के मुताबिक, कोयम्बटूर में उन्होंने अपना बिजनेस करियर शुरू किया।

मार्टिन के टू-डिजिट लॉटरी सिस्टम को काफी पॉप्युलरिटी मिली और इसके बाद उन्होंने देश के दूसरे राज्यों के साथ ही भूटान और नेपाल में इसे एक्सपेंड किया। इस कारोबार में मार्टिन की कंपनी की मोनोपॉली थी।

पिछले कुछ सालों में जांच एजेंसियों ने उनके दफ्तरों में छापेमारी भी की है और उनके खिलाफ कई मामलों में प्रॉपर्टी को भी सीज़ किया गया। पिछले साल यानी 2023 में ED द्वारा सीज़ की गई प्रॉपर्टी के खिलाफ उनकी अपील को खारिज कर दिया गया था। सबसे खास बात है कि मार्टिन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का हमेशा खंडन किया है। और मार्च 2023 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में वह भारत के सबसे ज्यादा टैक्स चुकाने वाले शख्स रहे।

Electoral Bonds केस है क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को दिए एक ऐतिहासिक फैसले में इलेक्टोरल बॉन्ड्स को 'असंवैधानिक' करार दिया था। और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को इस स्कीम के तहत बेचे गए सभी इलेक्टोरल बॉन्ड्स की जानकारी चुनाव आयोग को देने का आदेश दिया था।

सबसे पहले बैंक से यह डेटा 6 मार्च 2024 तक शायर करने को कहा गया था लेकिन बैंक 30 जून तक तारीख बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट चला गया। हालांकि, देश की शीर्ष अदालत से एसबीआई को खरी-खोंटी सुननी पड़ी और आदेश मिला कि 12 मार्च तक पूरा डेटा चुनाव आयोग को दे। कोर्ट ने चुनाव आयोग से भी 15 मार्च 2024 तक अपनी वेबसाइट पर पूरा डेटा अपलोड करने की बात कही।

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