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Electoral Bond News: एयरटेल, मेघा, फ्यूचर गेमिंग और वेदांता जैसी कंपनियों ने खरीदे 4700 करोड़ से ज्यादा के चुनावी बॉन्ड, जानें क्या है इनका बिजनेस

Electoral Bond Data: सबसे ज्यादा चुनावी चंदा देने वाली टॉप-10 कंपनियां क्या कारोबार करती हैं। जानें डिटेल...
Written by: Naina Gupta
March 20, 2024 11:51 IST
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Electoral Bond data: इलेक्टोरल बॉन्ड्स डेटा की टॉप-10 डोनर का क्या है बिजनेस
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Electoral Bond Data Full List of top Donors: इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा के सार्वजनिक होने के बाद हर दिन अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर एसबीआई (SBI) द्वारा शेयर किए गए डेटा को सार्वजनिक कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने चुनावी बॉन्ड डेटा के दो डेटासेट अब तक जारी किए हैं और 21 मार्च 2024 को तीसरा डेटासेट अपलोड होने की उम्मीद है। अभी तक जारी किए डेटा में इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली कंपनियों और इंडिविजुअल के नाम हैं। इसके अलावा इन बॉन्ड के खरीदने की तारीख और अमाउंट भी शामिल है।

अब आम जनता को यह भी पता चल गया है कि किस राजनीतिक पार्टी को अब तक कितना पैसा इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए मिला है। हमने आपको हाल ही में उन 10 कंपनियों के नाम बताए थे जो टॉप डोनर हैं। आज हम आपको बताएंगे कि सबसे ज्यादा चुनावी चंदा देने वाली इन कंपनियों का बिजनेस क्या है।

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भारतीय स्टेट बैंक ने सुप्रीम कोर्ट से पड़ी फटकार के बाद पूरा डेटा चुनाव आयोग को सौंपा। लेकिन अभी भी डेटा अधूरा है और दोबारा फटकार लगाने के बाद शीर्ष अदालत ने एसबीआई से चुनाव आयोग को यूनिक कोड्स का डेटा भी शेयर करने को कहा है ताकि यह मिलान हो सके कि किस पार्टी को किस कंपनी से चंदा मिला है। बता दें कि 2019 के बाद का डेटा सामने आने के बाद यह पता चला है कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 16000 करोड़ रुपये से ज्यादा चुनावी चंदा पॉलिटिकल पार्टियों को मिला। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर अपलोड जानकारी के मुताबिक, राजनीतिक पार्टियों को फंड देने वालों में गेमिंग से लेकर इन्फ्रा, आईटी और माइनिंग जैसे बिजनेस करने वाली कंपनियां हैं।

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  1. 1. फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज (Future Gaming and Hotel Services PR)
    इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सबसे ज्यादा चंदा देने वाली पहली कंपनी फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज है। डेटा के मुताबिक, इस कंपनी ने कुल 1368 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदे। 2019 से 2024 तक का डेटा देखने पर पता चलता है कि फ्यूचर गेमिंग नंबर 1 पर है। यह कंपनी गेमिंग, लॉटरी और होटल सर्विजेस में बिजनेस करती है। कंपनी का हेडऑफिस कोयंबटूर में है और इसकी शुरुआत सैंटियागो मार्टिन ने 1991 में की थी।
  1. 2. मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Megha Engineering and Infrastructures Limited) (MEIL)
    इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा आने के बाद एक और कंपनी जो सबसे ज्यादा चर्चा में है वो है मेघा इंजीनियरिंग। MEIL दूसरी टॉप डोनर कंपनी है और अपनी सहायक कंपनियों के साथ मिलकर इसने कुल 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे। सबसे खास बात है कि यह एकमात्र ऐसी कंपनी है जिसने एक दिन में 100 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड डैम, इरिगेशन प्रोजेक्ट, हाइड्रोकार्बन प्रोजेक्ट, ट्रांसपोर्ट और पॉवर प्रोजेक्ट्स के एरिया में काम करती है। कंपनी का हेडक्वार्टर हैदराबाद में है।
  1. 3. क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड (Qwik Supply Chain Private Limited)
    क्विक सप्लाई चेन तीसरी टॉप डोनर कंपनी है और इसने कुल 410 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे। क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड के बिजनेस की बात करें तो यह लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन का कारोबार करती है। इसका हेडक्वार्टर मुंबई में है।
  1. 4. हल्दिया एनर्जी लिमिटेड ( Haldia Energy Limited)
    इलेक्टोरल डेटा से खुलासा हुआ है कि हल्दिया एनर्जी लिमिटेड ने कुल 377 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे। चुनावी चंदा देने के मामले में यह चौथी सबसे बड़ी कंपनी है। यह कंपनी थर्मल पावर प्रोजेक्ट के बिजनेस में है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में थर्मल पावर प्रोजेक्ट इसके पास है। कंपनी का हेडक्वार्टर पश्चिम बंगाल के कोलकाता में है।
  1. 5. वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited)
    बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल के मालिकाना हक वाली वेदांता लिमिटेड ने करीब 376 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे। यह देश की सबसे बड़ी माइनिंग कंपनी है। इसकी शुरुआत 25 जून 1965 को हुई। कंपनी का हेडक्वार्टर मुंबई में है।
  1. 6. एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Essel Mining and Industries Limited)
    एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने करीब 225 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे और पॉलिटिकल पार्टी को दिए। एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (EMIL) की स्थापना 1950 में हुई थी। इसकी गिनिती देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन कंपनियों में होती है। इसका हेडक्वार्टर मुंबई में है।
  1. 7. वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (Western UP Power Transmission Company Limited)
    वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड ने 220 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे। काम की बात करें तो वेस्टर्न यूपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड बिजली प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन के कारोबार में है। इस कंपनी का हेडक्वार्टर यूपी के कानपुर में है।
  1. 8. भारती एयरटेल (Bharti Airtel)
    देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनियों में से एक भारती एयरटेल ने 198 करोड़ रुपये का चुनावी चंदा दिया। यह कंपनी टेलिकॉम, मोबाइल और ब्रॉडबैंड जैसी सेवाएं ऑफर करती है। देश में 5G कनेक्टिविटी को सबसे पहले लाने वाली कंपनियों में शामिल है। कंपनी का हेडक्वार्टर दिल्ली में है।
  1. 9. केवेंटर फूड पार्क इंफ्रा लिमिटेड (Keventer Foodpark Infra Limited)
    चुनाव आयोग की वेबसाइट पर पब्लिश डेटा से पता चला है कि केवेंटर फूड पार्क इन्फ्रा लिमिटेड ने कुल 195 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे। यह कंपनी डेयरी प्रोडक्ट्स का कारोबार करती है। इसका हेडक्वार्टर पश्चिम बंगाल के कोलकाता में है। कंपनी की स्थापना 17 जून 2010 को हुई थी।
  1. 10. एमकेजे एंटरप्राइजेज लिमिटेड (MKJ Enterprises)
    एमके एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने राजनीतिक पार्टियों को कुल 192 करोड़ रुपये का चंदा दिया। कंपनी की शुरुआत 22 नवंबर, 1982 को हुई थी। कंपनी का नाम 4 जनवरी 1990 को बदलकर MKJ एंटरप्राइज कर दिया गया। यह कंपनी स्टेनलेस स्टील के कारोबार में है।

क्या होते हैं इलेक्टोरल बॉन्ड

  1. आपको बता दें कि साल 2017 में केंद्र सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को शुरू किया था। इस स्कीम के तहत कोई भी इंडिविजुअल या कंपनी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से कितने भी अमाउंट के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद सकती थी।
  2. इन चुनावी बॉन्ड के जरिए कोई भी शख्स और कॉरपोरेट कंपनी किसी भी राजनीतिक पार्टी को बिना पहचान ज़ाहिर करे अनलिमिटेड पैसा डोनेट कर सकती है। इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम के तहत इलेक्टोरल बॉन्ड्स को SBI से फिक्स्ड डिनोमिनेशन में डोनर द्वारा खरीदा जा सकता है और किसी पॉलिटिकल पार्टी को दे दिया जाता है। और फिर वह पार्टी इन बॉन्ड को कैश रकम में बदल सकती है। इन बॉन्ड की सबसे खास बात है कि फायदा लेने वाली पॉलिटिकल पार्टी किसी भी इकाई या शख्स को डोनर का नाम बताने की जरूरत नहीं होती। यहां तक की इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) को भी नहीं।
  3. इलेक्टोरल बॉन्ड को अलग-अलग मूल्य वर्गों में उपलब्ध कराया गया। इनकी कीमत 1000 रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये के बीच होती है। ये 1000, 10000, एक लाख, दस लाख और एक करोड़ रुपयों के मूल्य में उपलब्ध थे। सबसे ज्यादा अहम बात है कि इलेक्टोरल बॉन्ड एक्सपायरी डेट के साथ आते हैं। इन बॉन्ड की वैलिडिटी सिर्फ 15 दिन होती है।
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