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Mayor Election in Bhagalpur: तीन साल में भी शाहनवाज बनाम चौबे की गुटबाजी खत्‍म नहीं कर सकी भाजपा, मेयर चुनाव में भी द‍िखी खेमेबंदी  

मुख्य पार्षद (महापौर) के लिए 9 और मुख्य उपपार्षद (उपमहापौर) के लिए 10 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे है। इनके भाग्य का फैसला 337321 मतदाता कुल 367 बूथों पर 28 दिसंबर को मतदान कर करेंगे।
Written by: गिरधारी लाल जोशी
Updated: December 26, 2022 23:33 IST
mayor election in bhagalpur  तीन साल में भी शाहनवाज बनाम चौबे की गुटबाजी खत्‍म नहीं कर सकी भाजपा  मेयर चुनाव में भी द‍िखी खेमेबंदी  
भागलपुर नगर निगम मेयर चुनाव में प्रत्याशी बसुंधरा के समर्थन में बुलाई बैठक में मौजूद व्यापारी।
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Shahnawaz versus Choubey faction: ब‍िहार के भागलपुर (Bhagalpur) में 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से ही खुलकर सामने आई भाजपा की गुटबाजी खत्‍म कराने में पार्टी अब तक नाकाम रही है। इस बीच भागलपुर नगर निगम चुनाव में भी भाजपा (BJP) दो फाड़ हो गई है। चौबे धड़ा सीमा साह तो शाहनवाज (Shahnawaj) गुट बसुंधरा के समर्थन में है।

एक धड़े को शाहनवाज तो दूसरे धड़े को सीमा साह का समर्थन

मेयर चुनाव में जिलाध्यक्ष रोह‍ित पांडे खुल कर वसुंधरा के साथ हैं। इनको शाहनवाज हुसैन का समर्थन प्राप्‍त बताया जाता है। दूसरा धड़ा सीमा साह के समर्थन में है। सीमा निवर्तमान महापौर भी हैं। व्‍यापार‍ियों का एक धड़ा भी सीमा साह से नाराज हो गया है। शुक्रवार को एक होटल में आयोजित व्यापारियों की बैठक में वह नहीं पहुंची। इससे व्यापारी वर्ग इनसे काफी खफा हो गया। इनके आयोजक रविवार को डॉ.वसुंधरा लाल को समर्थन देने के लिए बुलाई बैठक में नजर आए।

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शाहनवाज हुसैन भी भागलपुर पहुंच गये

सोमवार को शाहनवाज हुसैन भी भागलपुर पहुंच गये। भाजपा जिलाध्यक्ष रोहित पांडे कहते है कि भाजपा मेयर प्रत्याशी वसुंधरा लाल के साथ है। वैसे चुनाव दलगत न होने की वजह से अपनी पसंद के लिए भाजपाई या कोई भी स्वतंत्र है। शाहनबाज के आने से यह और जाहिर हो गया कि भाजपा दो गुटों में बंटे है। भाजपा के जिलाध्यक्ष वसुंधरा और कार्यकारी अध्यक्ष संतोष कुमार सीमा साह के समर्थन में काम कर रहे है।

ईस्टर्न बिहार चेंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल पोद्दार ने लोगों को सीमा साह को समर्थन देने के लिए बुलाई बैठक में आने का संदेश भेजा था। लेक‍िन,रव‍िवार को एक बैठक में इनका नाम पुकार कर वसुंधरा को बुके देने के लिए कहा गया। स्‍थानीय देवीबाबू धर्मशाला में हुई बैठक में ईस्टर्न बिहार चेंबर आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष, कार्यसमिति के सदस्य, टेक्सटाइल चेंबर के अध्यक्ष गिरधारी केजरीवाल, श्रीगौशाला के अधिकारीगण, रेडीमेड एसोसिएशन, ड्रग एंड केमिस्ट एसोसिएशन समेत दर्जन भर संस्थाओं के पदाधिकारी और सैकड़ों व्यापारी मौजूद थे।

बुजुर्ग लक्ष्मी नारायण डोकानिया और युवा नेता जगदीशचन्द्र मिश्र पप्पू सरीखे लोगों ने एक सुर से बोला कि भागलपुर नगर निगम नरक निगम बना है। इसके पहले जितने भी प्रतिनिधियों को चुनकर भेजा वे स्वार्थ सिद्धि में लग गए। इसलिए परिवर्तन समय की मांग है। व्यापारियों की बैठक में भाजपा के जिलाध्यक्ष रोहित पांडे समेत भाजपा के कई पदाधिकारी भी मौजूद थे।

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चौबे धड़ा सीमा साह के समर्थन में है। इसका अंदाज इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शनिवार शाम कट्टर भाजपाई निरंजन साह के खलीफाबाग स्थित आवास वाली जगह पर सीमा साह के समर्थन में सभा हुई। न‍िरंजन चौबे धड़े के माने जाते है। अश्विनी कुमार चौबे इतवार को भी भागलपुर में ही थे। उनके खेमे के समझे जाने वाले अभय कुमार घोष सोनू, निरंजन साह, नीतू सिंह जोर-शोर से पूर्व महापौर सीमा साह के समर्थन में काम करते द‍िखे।

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पहली बार चुनाव लड़ रहीं वसुंधरा स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। इनके पति बिहारी लाल भी डॉक्टर हैं। सीमा साह निवर्तमान महापौर हैं। सीमा के पति अनंत साह उर्फ टुनटुन साह दो दफा से भागलपुर जिला परिषद के अध्यक्ष हैं। वैसे चर्चित विधायक गोपाल मंडल की पत्नी सव‍िता देवी भी चुनाव मैदान में डटी हैं। वह भी ज़िला परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं।

भागलपुर नगर निगम के महापौर का पद सरकार ने पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित कर रखा है। इसके ल‍िए चुनाव लड़ रहीं उम्‍मीदवारों में डा. बसुंधरा लाल, सविता देवी, प्रतिभा देवी, गजला परवीन, रफअत बानो, खुशबू कुमारी, सीमा साह, श्वेता प्रियदर्शनी, अमृता राज हैं। इनमें सीमा साह 2017 में वार्ड 50 से पार्षद निर्वाचित हो महापौर के लिए चुनी गईं। गजला परवीन 2007,2012 और 2017 में वार्ड 44 से पार्षद चुनी गईं। रफअत बानो वार्ड 3 से 2007 और 2012 में पार्षद निर्वाचित हुई थीं। खुशबू कुमारी वार्ड 29 से 2017 में पार्षद चुनी गई। अब ये चारों महापौर के लिए अपनी किस्मत आजमा रही है।

उपमहापौर के लिए दस उम्मीदवार मैदान में है। इनमें दो महिला हैं। कविता राय और नेहा कुमारी। बाकी हैं- अनूप लाल साह, आशीष रंजन,ओमनाथ भारती,छोटेलाल कुमार, भागीरथ साह, संतोष कुमार,सलाउद्दीन अहसन, और सुबोध मंडल। इनमें केवल सलाउद्दीन के पास चुनाव लड़ने का अनुभव है। ये 2007 में वार्ड 15 से चुनाव जीतकर पार्षद निर्वाचित हुए थे। भाजपाई संतोष कुमार के पक्ष में वोट मांग रहे हैं।

भागलपुर समेत पूरे बिहार में स्थानीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण का शोर चरम पर है। कुल 224 में से 156 नगर पंचायत,नगरपालिकाओं के चुनाव 18 दिसंबर को हो चुके है। इनके नतीजे भी 20 दिसंबर को आ चुके है। अब 28 दिसंबर को 23 जिलों में 68 स्थानीय निकायों के चुनाव होने है। जिनमें 17 नगर निगम, 2 नगर परिषद और 49 नगर पंचायत शामिल है। इनके वोटों की गिनती 30 दिसंबर को होनी है।

चुनाव अधिकारी के मुताबिक इनमें 1529 वार्डों की संख्या है। इनके लिए 7084 मतदान केंद बनाए गए है। दूसरे चरण में कुल उम्मीदवारों की संख्या 21287 है। भागलपुर नगर निगम क्षेत्र में 51 वार्ड है। जिनमें 212 उम्मीदवार पार्षद बनने के लिए अपने भाग्य आजमा रहे है। वहीं मुख्य पार्षद (महापौर) के लिए 9 और मुख्य उपपार्षद (उपमहापौर) के लिए 10 उम्मीदवार चुनावी मैदान में डटे है। इनके भाग्य का फैसला 337321 मतदाता कुल 367 बूथों पर 28 दिसंबर को मतदान कर करेंगे।

वैसे 2017 में हुए नगर पंचायत, नगर परिषद, नगरपालिका, नगर निगम के चुनाव से 2022 का चुनाव अलग है। अबतक बिहार में मुख्य पार्षद और उपमुख्य पार्षद को आम मतदाता नहीं चुनते थे। इस दफा पहली बार इन्हें चुनने के लिए सीधे मतदान करेंगे। ऐसा ही 18 दिसंबर को हुए चुनाव में हुआ है। भागलपुर में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी 2014 के लोकसभा चुनाव में ही खुल कर सामने आई थी। गुटबाजी की वजह से 2014 के लोकसभा चुनाव में शाहनवाज हुसैन को पराजय का मुंह देखना पड़ा था। वह भी केवल करीब नौ हजार वोटों से। जबकि नोटा में 11 हजार मत गए थे। इस हार का बदला 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित सारस्वत चौबे को चुकाना पड़ा। 60 हजार से ज्यादा मत लाकर भी पराजय देखना पड़ा। इनकी विजय में भाजपा के ही विजय साह रोड़ा बने। वे निर्दलीय चुनाव लड़े और करीब 15 हजार वोट प्राप्त किए। जबकि अर्ज‍ित की हार का अंतर इससे कम था। विजय साह को प्रत्याशी बनाने में शाहनवाज गुट का हाथ बताया जाता है।

लगातार दो हार के बाद 2019 लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट एनडीए के साथी जदयू को चली गई। केंद्रीय चुनाव सम‍ित‍ि में होते हुए भी शाहनवाज हुसैन अपने ल‍िए ट‍िकट का जुगाड़ नहीं कर सके। अश्विनी चौबे को बक्सर से टिकट द‍िया गया। 2020 के ब‍िहार व‍िधानसभा चुनाव में रोह‍ित पांडे को भागलपुर से उम्‍मीदवार बनाया गया। शाहनवाज खेमे के माने जाने वाले रोह‍ित 1100 मतों से चुनाव हार गए। बताया जाता है क‍ि इस फैसले के पीछे आलाकमान का मकसद भागलपुर से गुटबाजी खत्म करना था। मगर धड़ेबाजी अभी भी बरकरार है।

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