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सीतामढ़ी में कौन मारेगा बाजी? JDU के देवेश चंद्र ठाकुर और RJD के अर्जुन राय के बीच मुकाबला

Sitamarhi Lok Sabha Elections: देवेश चंद्र ठाकुर ने अपने छात्र जीवन के दौरान महाराष्ट्र युवा कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने 1990 में बिहार के बथनाहा विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, हालांकि जीत दर्ज नहीं कर पाए थे।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: May 16, 2024 22:21 IST
सीतामढ़ी में कौन मारेगा बाजी  jdu के देवेश चंद्र ठाकुर और rjd के अर्जुन राय के बीच मुकाबला
Bihar Lok Sabha Elections: जगतगुरु राम भद्राचार्य को नमन करते जेडीयू के देवेश चंद्र ठाकुर । (@deveshMLCbihar)
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Sitamarhi Lok Sabha Elections: लोकसभा चुनाव 2024 का संग्राम जारी है और अब तक कुल चार चरणों के चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं। आगामी 20 मई को 5वें चरण का मतदान होना है। बिहार की जिन 5 लोकसभा क्षेत्र में वोटिंग होनी है उन्हीं में से एक है समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र। इस सीट पर इंडिया गठबंधन की तरफ से लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद ने अपने पुराने प्रत्याशी अर्जुन राय पर भरोसा जताया है। वहीं एनडीए में शामिल नीतीश कुमार की जेडीयू ने बिहार विधान परिषद के सभापति देवेश चंद्र ठाकुर को चुनाव में उतारा है।

जेडीयू ने इस बार अपने वर्तमान सांसद सुनील कुमार पिंटू का टिकट काटकर देवेश चंद्र ठाकुर को चुनावी मैदान में उतारा है। बिहार में जातीय जनगणना के बाद सीतामढ़ी के सांसद सुनील कुमार पिंटू पार्टी लाइन के विपरीत बयानबाजी कर रहे थे। तभी से जेडीयू की तरफ से उनका टिकट कटना तय माना जा रहा था।

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इस बार क्या हैं चुनावी मुद्दे

मां सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी तिरहुत प्रमंडल का हिस्सा है। इस लोकसभा क्षेत्र में भी देशभर की तरह राम मंदिर का मुद्दा हावी है। इसके अलावा महंगाई, बेरोजगारी सहित मां सीता के पुनैरा धाम को राष्ट्रीय महत्व दिलाने की मांग उठती रही है। अब देखना ये दिलचस्प रहेगा कि सीतामढ़ी की जनता नरेंद्र मोदी के साथ जाती है या इंडिया गठबंधन के पक्ष में मतदान करती है।

कौन हैं देवेश चंद्र ठाकुर

देवेश चंद्र ठाकुर ने अपने छात्र जीवन के दौरान महाराष्ट्र युवा कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने 1990 में बिहार के बथनाहा विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, हालांकि जीत दर्ज नहीं कर पाए थे। देवेश चंद्र ठाकुर 2002 में कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के सदस्य बने। 2008 में वह जेडीयू में शामिल होकर फिर से MLC बने। तब से अब तक MLC बने हुए हैं। वर्तमान में वह बिहार विधान परिषद के सभापति भी हैं।

जेडीयू ने देवेश चंद्र ठाकुर को सीतामढ़ी से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया है। देवेश चंद्र ठाकुर के पास 6,60,00,361 रुपए की कुल संपति है वहीं इनपर एक अपराधिक मुकदमा भी दर्ज है। देवेश चंद्र ठाकुर ब्राह्मण जाती से ताल्लुक रखते हैं। वह बिहार सरकार में मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं।

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कौन हैं अर्जुन राय

राजद के लोकसभा प्रत्याशी अर्जुन राय सीतामढ़ी के अंतर्गत आने वाली औराई विधानसभा से जनता दल के टिकट पर 2005 में विधायक चुने गए थे। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू से सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने थे। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू के सिंबल पर चुनावी मैदान में थे हालांकि जीत दर्ज करने में नाकामयाब रहे थे। अर्जुन राय 2019 के लोकसभा चुनाव में भी सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र से राजद के उम्मीदवार थे।

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इस लोकसभा चुनाव में राजद ने उन्हें अपना फिर उम्मीदवार बनाया है। अर्जुन राय की कुल संपति 1,89,88,281 है। यादव जाति से आने वाले अर्जुन राय पर दो अपराधिक मुकदमे भी दर्ज है।

समाजवादी आचार्य जेबी कृपलानी बने थे पहले सांसद

सीतामढ़ी लोकसभा सीट 1957 में हुए देश के दूसरे आम चुनाव से अस्तित्व में आई थी। पहले यह सीट मुजफ्फरपुर पूर्वी के रूप में जानी जाती थी। सीतामढ़ी लोकसभा सीट पर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता आचार्य जेबी कृपलानी ने जीत दर्ज की थी। जेबी कृपलानी के बाद इस लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस के सांसद चुने जाते रहे। हालांकि इमरजेंसी के बाद कांग्रेस का दबदबा कम हो गया।

वर्तमान में सीतामढ़ी लोकसभा सीट एनडीए का मजबूत किला है। यहां से तीन बार एनडीए उम्मीदवार को जीत मिल चुकी है। अब चौथी बार विजय पताका फहराने की तैयारी में जेडीए के देवेश चंद्र ठाकुर जुटे हैं। एनडीए के घटक के रूप में जदयू ने सबसे पहले लोकसभा चुनाव 1999 सीतामढ़ी सीट से जीत दर्ज की थी। हालांकि 2004 में यहां एनडीए की हार हुई लेकिन उसके बाद से एनडीए ही जीतती आई है। 2024 लोकसभा चुनाव में अब देखना यह है कि राजद के अर्जुन राय इस किले को दुबारा फतह कर पाते हैं या एनडीए का ही कुनबा मजबूत होगा।

सीतामढ़ी में आजतक नहीं खिला 'कमल'

इमरजेंसी के बाद हुए लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी के श्याम सुंदर दास यहां से संसद पहुंचे थे। 1980 में इंदिरा गांधी की कांग्रेस के तरफ बलीराम भगत और 1984 के लोकसभा चुनाव में राम श्रेष्ठ खिरहर ने जीत दर्ज किया था। 1984 से अब तक इस लोकसभा पर कांग्रेस के लिए सूखा ही पड़ा हुआ है। 1989 में हुकुम देव नारायण और 1991,1996 के लोकसभा चुनाव में नवल किशोर राय जनता दल से सांसद चुने गए थे। 1996 के बाद से हीं सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र में बिहार के क्षेत्रीय दलों का कब्जा रहा है। इस लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी आजतक अपना उम्मीदवार नहीं जिता पाई है। यही कारण है की गठबंधन ने यह सीट अपने सहयोगियों के लिए छोड़ते आई है।

2014 में क्या रहे नतीजे

लोकसभा चुनाव 2014 में सीतामढ़ी लोकसभा सीट से एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के उम्मीदवार राम कुमार शर्मा ने जीत दर्ज की। राम कुमार शर्मा ने आरजेडी उम्मीदवार सीताराम यादव को लगभग 1 लाख 47 हजार वोटों से हराया। राम कुमार शर्मा को कुल 4,11,265 वोट मिले। राजद के सीता राम यादव 2,63,300 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। नीतीश कुमार की जेडीयू 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी से गठबंधन तोड़कर अलग चुनाव लड़ी। 2014 में अर्जुन राय ने जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा । तब अर्जुन राय को महज 87,188 वोट मिले।

2019 में क्या रहे परिणाम

2019 के लोकसभा के दौरान बिहार में बीजेपी और जेडीयू एक साथ चुनाव लड़ी। 2019 में एनडीए को बिहार की 40 लोकसभा सीटों में 39 पर जीत प्राप्त हुई। सीतामढ़ी सीट जदयू के खाते में आई थी और इस सीट से जदयू उम्मीदवार सुनील कुमार पिंटू ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार अर्जुन राय को 2,50,539 मतों के अंतर से हराया। जदयू उम्मीदवार सुनील कुमार पिंटू को 5,67,745 वोट मिले वहीं आरजेडी प्रत्याशी आर्जुन राय को 3,17,206 मतों से संतोष करना पड़ा।

विधानसभा सीट के लिहाज से NDA का पलड़ा भारी

सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की कुल 6 सीटें आती है। वर्तमान में 6 विधानसभा सीटों में से तीन पर बीजेपी (BJP), दो पर जेडीयू और एक सीट पर लालू प्रसाद यादव की आरजेडी का कब्जा है। सीतामढ़ी विधानसभा सीट से बीजेपी के मिथिलेश कुमार विधायक हैं। बथनाहा विधानसभा सीट से बीजेपी के अनिल कुमार विधायक हैं। परिहार विधानसभा सीट से बीजेपी की गायत्री देवी विधायक हैं। सुरसंड विधानसभा सीट से जदयू के दिलीप राय विधायक हैं। रुन्नीसैदपुर विधानसभा सीट से जदयू के पंकज मिश्रा विधायक हैं। बाजपट्टी विधानसभा सीट से आरजेडी के मुकेश कुमार यादव विधायक हैं। कुल मिलाकर इस लोकसभा क्षेत्र में आने वाली छह विधानसभा सीटों में पांच पर NDA का कब्जा है तो वहीं एक सीट पर RJD के विधायक हैं। इस लिहाज से एनडीए गठबंधन का पलड़ा भारी माना जा रहा है।

सीतामढ़ी लोकसभा का जातीय गणित

सीतामढ़ी लोकसभा के जातीय समीकरण पर नजर डालें तो इस सीट पर सबसे ज्यादा वैश्य मतदाता लगभग 5 लाख हैं। अति पिछड़ा समाज के वोटरों की संख्या भी लगभग 2 लाख 80 हजार है। सीतामढ़ी में मुस्लिम वोटरों की संख्या भी 2.5 लाख मानी जाती है। यादव जातियों के मतदाताओं की संख्या लगभग 2 लाख है। अगड़ी जातियों के मतदाताओं की संख्या भी लगभग 2 लाख 60 हजार है। दलित महादलित वोटरों की संख्या 2 लाख के आसपास मानी जाती है। वहीं कोइरी-कुर्मी मतदाताओं की संख्या भी 1.5 लाख है। अगर सीतामढ़ी लोकसभा के कुल मतदाताओं की संख्या की बात करें तो यह 19 लाख 24 हजार 566 है। पुरुष मतदाताओं की संख्या 10,15,649 और महिला वोटरों की संख्या 9,08,924 है।

अगर जातीय गणित को देखें तो वैश्य समाज के मतदाता बीजेपी के कोर वोटर माने जाते हैं इसका फायदा एनडीए गठबंधन के जेडीयू को मिल सकता है वहीं नीतीश कुमार के साथ कोइरी कुर्मी जातियों का भी अच्छा वोट बैंक है। राजद अपने MY समीकरण (मुस्लिम + यादव) के साथ साथ अन्य जातियों को भी साधने में जुटी हुई है।

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