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रेल हादसे के बाद चालीस हजार की टैक्सी लेकर पहुंचे बालासोर तो शव ले गया था कोई और, फिर परिवार को ऐसे मिली डेडबॉडी

पश्चिम बंगाल के ककद्वीप में रहने वाला परिवार राजा के शव को अपने साथ ले गया था। वो गफलत में था कि ये उनके किसी संगे संबंधी की लाश है। लेकिन संस्कार करने से पहले जब शव की तलाशी ली गई तो जेब से आधार कार्ड मिला।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: शैलेंद्र गौतम
Updated: June 11, 2023 16:17 IST
रेल हादसे के बाद चालीस हजार की टैक्सी लेकर पहुंचे बालासोर तो शव ले गया था कोई और  फिर परिवार को ऐसे मिली डेडबॉडी
बिहार का लापता युवक राजा। (एक्सप्रेस फोटो)
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ओडिशा के बालासोर में 2 जून को कोरोमंडल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बिहार के एक परिवार को अपने बेटे की डेडबॉडी जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। परिवार मोतिहारी से 40 हजार रुपये की टैक्सी लेकर बालासोर तक गया। तमाम अस्पतालों का खास छानी। लेकिन राजा का शव उनको नहीं मिल सका। हालांकि बाद में जो परिवार भूलवश राजा का शव अपने साथ ले गया था उसे सारी सच्चाई पता चली।

दरअसल पश्चिम बंगाल के ककद्वीप में रहने वाला परिवार राजा के शव को अपने साथ ले गया था। वो गफलत में था कि ये उनके किसी संगे संबंधी की लाश है। लेकिन संस्कार करने से पहले जब शव की तलाशी ली गई तो जेब से आधार कार्ड मिला। उस पर लिखा था कि मरने वाला शख्स बिहार के मोतिहारी का रहने वाला है। ककद्वीप के परिवार ने तुरंत बालासोर संपर्क साधा और सारी कहानी बयां की। उसके बाद शव को ओडिशा लाया गया। फिर पुलिस ने राजा के परिवार को सूचना दी और शव को उनके हवाले किया। फिलहाल परिवार राजा का शव मिलने के बाद काफी राहत में है।

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2 जून को कोरोमंडल में सवार राजा हादसे के बाद हो गया था लापता

दरअसल 22 साल का राजा मोतिहारी के लखौरा गांव का रहने वाला था। वो 2 जून को कोरोमंडल एक्सप्रेस में सवार हुआ था। हादसे के बाद उस कोच में बैठे 10 लोगों में से 8 को मामूली चोट लगी थीं। एक की मौत हो गई थी जबकि राजा गायब था। राजा के भाई सुभाष का कहना है कि 2 जून की शाम को चार बजे उसकी भाई से बात हुई थी। शाम को सात बजे ये हादसा हुआ। हादसे के बाद जब वो बालासोर पहुंचे तो पुलिस से राजा के बारे में पूछताछ की। लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। सुभाष का कहना है कि हादसे के बाद वो कितने परेशान हो गए थे कि 40 हजार रुपये में टैक्सी बुक करके बालासोर तक पहुंचे। राजा का कोई सुराग नहीं लगा तो वापस लौट आए, क्योंकि उनके पास से पैसा भी खत्म हो रहा था।

जेब से मिले आधार कार्ड ने बताई शव की असली पहचान

सुभाष का कहना है कि राजा के हाथ पर एक टैटू था। पुलिस को सारी बातें बताई गईं। लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। आखिर में पुलिस की ही सलाह पर मां ने डीएनए टेस्ट के लिए अपना सैंपल दिया। लेकिन सैंपल मैच करने से पहले ही आधार की वजह से उन्हेंं राजा का शव मिल गया। सुभाष का कहना है कि पश्चिम बंगाल के परिवार ने बालासोर पुलिस को ये भी बताया था कि जो शव मिली उसके हाथ पर टैटू भी बना है।

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