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दुनिया मेरे आगे: जीवन में मुस्कुराहट का है बहुत प्रभाव, मुस्कुराते चेहरे करते हैं उर्जा का प्रवाह

कोई मरीज अस्पताल में बेसुध पड़ा रहता है। सामने से आते हुए डाक्टर के चेहरे पर अगर मुस्कान हो, वह मरीज भी अंदर से मुस्कुराने लगता है। वह मुस्कुराहट उसकी बीमारी पर मरहम की तरह लगने लगती है। वह सकारात्मकता से भर जाता है, जो उसे स्वस्थ होने में एक बड़े सहायक का काम करती है। पढ़िए ललित शौर्य के विचार-
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | Updated: July 08, 2024 05:48 IST
दुनिया मेरे आगे  जीवन में मुस्कुराहट का है बहुत प्रभाव  मुस्कुराते चेहरे करते हैं उर्जा का प्रवाह
प्रतीकात्मक तस्वीर
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किसी भी व्यक्ति के चेहरे के भाव उसके भीतर के भावों का प्रतिबिंब होता है। अक्सर मन के भीतर की कशमकश चेहरे पर झलक ही आती है। हर्ष, दुख, विषाद, कष्ट, खेद सब चेहरे पर अंकित होते रहते हैं। इसी से व्यक्ति की मानसिक स्थिति का पता लगाया जा सकता है। व्यक्ति के जन्म लेने से ही ये भाव अपने आप नैसर्गिक रूप से व्यक्ति के मुखमंडल पर प्रदर्शित होते रहते हैं। जब एक बच्चा जन्म लेता है तो वह रोने लगता है। जब उसकी मां उसे पुचकारती है, उसे दूध पिलाती है तो वह चुप हो जाता है। जब उसे बांहों के झूले में झुलाया जाता है तो वह मुस्कराने लगता है। शांत हो जाता है। ठीक इसी तरह जब कोई व्यक्ति किसी सिनेमाघर में कोई फिल्म देखने जाता है तो समय-समय पर अलग-अलग भाव उसके चेहरे पर दिखाई देते हैं। कभी वह मुस्कराता है तो कभी उसकी आंखों में आंसू भर जाते हैं। इसी तरह किसी दृश्य पर कभी उसका चेहरा क्रोध से तमतमा जाता है। फिल्म में चल रहे दृश्यों के हिसाब से उसके चेहरे के भाव बदलते रहते हैं, क्योंकि पर्दे पर चल रही फिल्म के साथ-साथ एक फिल्म उसके मन में भी चल रही होती है। मन में चलने वाली फिल्म से उपजी संवेदनाओं के भाव उसके चेहरे पर आते रहते हैं।

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हमारे चेहरे का एक भाव ऐसा है, जो सदैव दूसरों को आकर्षित करता है। इससे हमारे व्यक्तित्व में भी निखार आ जाता है। यह है हमारी मुस्कान। मुस्कान हमारे साथ-साथ सामने वाले के मन के भावों को भी मधुरिम कर देती है। मधुर मुस्कान का माधुर्य जीवन को मधुर कर देता है, जिस व्यक्ति के व्यक्तित्व में मधुर मुस्कान का गुण निहित रहता है, वह सबका चहेता बन जाता है। रूखे चेहरे वाले व्यक्ति से लोग बात करना या नजदीकियां बनाना कम पसंद करते हैं। जबकि चेहरे पर मुस्कान सजाए हुए व्यक्ति से लोग जल्दी घुल-मिल जाते हैं। उसे अपने जैसा या अपने नजदीक पाते हैं। मुस्कान के कई गुण होते हैं। मुस्कान मरहम का कार्य भी करती है। जब कोई मरीज अस्पताल में बेसुध पड़ा रहता है। सामने से आते हुए डाक्टर के चेहरे पर अगर मुस्कान हो वह मरीज भी अंदर से मुस्कराने लगता है। वह मुस्कराहट उसकी बीमारी पर मरहम की तरह लगने लगती है। वह सकारात्मकता से भर जाता है, जो उसे स्वस्थ होने में एक बड़े सहायक का काम करती है। ठीक इसके विपरीत अगर डाक्टर का व्यवहार रूखा हो तो मरीज की बीमारी अपने आप ही बढ़ने लगती है। यहां पर हम मुस्कान की ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं। मुस्कान के भीतर सकारात्मकता भरी होती है, जो सर्वत्र माहौल को ऊर्जावान एवं सकारात्मक बनाती है।

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हम देखते हैं कि अधिकांश देवी-देवताओं की मूर्ति और चित्रों में उन्हें मुस्कराते हुए दिखाया गया है। यह मुस्कान भी एक अदृश्य ऊर्जा की ओर इंगित करती है। जब हम मंदिर जाते हैं और मूर्ति को देखते हैं तो हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का उत्सर्जन होने लगता है। हमारे भीतर के नकारात्मक भाव कम होने लगते हैं। इसीलिए मंदिर एक सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र लगने लगता है। शोध बताते हैं कि मुस्कराते रहने वाले व्यक्ति ऊर्जावान होते हैं। उनके भीतर की जीवटता अद्भुत होती है। उनकी कार्यकुशलता अद्भुत होती है। वे लोग सामान्य लोगों की तुलना में अधिक मिलनसार और सामाजिक होते हैं। ऐसे लोगों का सामाजिक दायरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला जाता है। हर परिस्थिति में मुस्कराने वाले लोगों को यह मुस्कान आत्मबल प्रदान करती है। यह आत्मबल ही उन्हें हर परिस्थिति से लड़ने की, जूझने की सामर्थ्य प्रदान करता है।

जीवन में उन्नति एवं उपलब्धियों की गाड़ी में सवार होने के लिए कठोर परिश्रम के साथ-साथ आकर्षक व्यक्तित्व का होना अत्यंत आवश्यक है। आकर्षक मुस्कान परिपक्व व्यक्तित्व की पहचान है। जीवन में चाहे परिवार हो या फिर समाज या फिर कार्य-क्षेत्र। हर जगह सुलझे हुए और मुस्कराते हुए व्यक्तित्व का ही आदर होता है। परिवार में माता-पिता उस बच्चे से ज्यादा लगाव रखते हैं जो सकारात्मक हो, मुस्कराता रहता हो, परिस्थितियों को समझता हो। इसके विपरीत हर समय परेशान, परिस्थितियों की समझ नहीं रखने वाले, मुंह लटकाए रखने वाले को तुलनात्मक रूप से कम तवज्जो दी जाती है। ठीक यही सब कुछ समाज और व्यक्ति के कार्य क्षेत्र में भी घटित होता रहता है। जो मुस्कान में सच्चाई होगी, वही दुख की संवेदना भी भरा होगा और वाजिब जगहों पर सचमुच दुख भी प्रकट सकेगा।

जीवन के माधुर्य को बनाए रखने के लिए मुखमंडल के माधुर्य को कम नहीं होने देना चाहिए। यही मधुरता हमारे जीवन में सरसता घोलती रहेगी। मधुर मुस्कान हमारे चेहरे की झुंझुलाहट को खत्म कर देती है। यह हमारे तनाव को भी खत्म कर देती है। जीवन जीने का आनंद मुस्कराते रहने में हैं। हालांकि यह जरूर है कि चेहरे पर मुस्कान सजाए और मन में कुटिलता को छिपाए लोगों की पहचान करने आना चाहिए। अधिकांश लोग यह समझ नहीं पाते कि सामने वाला इतना खुश क्यों रहता है। इसका यही कारण है कि वह अपने ऊपर तनाव को हावी नहीं होने देता। वह अपने चेहरे की मुस्कान को खत्म नहीं होने देता, उसे दबाकर नहीं रखता। एक छोटा बच्चा हंसता रहता है तो वह तनाव मुक्त रहता है। अनावश्यक चिंताओं में डूबा नहीं रहता। ठीक ऐसे ही जीवन की समृद्धि के लिए मुस्कराते रहें और मुस्कान बांटते रहें।

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