scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

बेहतर कल की नई उम्मीद दिखाता है कैलाश सत्यार्थी का संघर्ष, करुणा के ग्लोबलाइजेशन को बताया जरूरी

नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी के जीवन पर लिखी पुस्तक के मराठी संस्करण ‘सामान्य जनतेज़ा नोबेलमैन : कैलाश सत्यार्थी’ का नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विमोचन
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: February 20, 2024 04:26 IST
बेहतर कल की नई उम्मीद दिखाता है कैलाश सत्यार्थी का संघर्ष  करुणा के ग्लोबलाइजेशन को बताया जरूरी
राजधानी नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के विमोचन कार्यक्रम में मौजूद कैलाश सत्यार्थी, वयोवृद्ध लेखिका हेमलता नेसरी और अन्य।
Advertisement

नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के जीवन पर लिखी पुस्तक ‘कैलाश सत्यार्थी के जीवन के प्रेरक प्रसंग’ के मराठी संस्करण ‘सामान्य जनतेज़ा नोबेलमैन: कैलाश सत्यार्थी’ का राजधानी नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विमोचन किया गया। इस अवसर पर नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी, जानी-मानी समाज सेविका सुमेधा कैलाश, आयुष मंत्रालय के सचिव वैध राजेश कोटेचा, आयुष मंत्रालय के सलाहकार मनोज नेसरी, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशक प्रो. तनूजा नेसरी और मूल हिंदी पुस्तक के लेखक शिवकुमार शर्मा और प्रसिद्ध वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा भी मौजूद थे। पुस्तक का प्रकाशन साकेत प्रकाशन ने किया है जबकि मूल हिंदी पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने किया है।

वयोवृद्ध लेखिका हेमलता नेसरी ने किया हिंदी से मराठी में अनुवाद

प्रो. तनुजा नेसरी ने कहा कि बाल मजदूरी के खिलाफ कैलाश सत्यार्थी की लड़ाई एक बेहतर समाज बनाने के लिए हमारी उम्मीदों को रोशनी देती है। उनके जीवन पर आधारित यह पुस्तक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हिंदी में लिखी गई इस पुस्तक का 87 वर्ष की आयु में वयोवृद्ध लेखिका हेमलता नेसरी ने मराठी में अनुवाद किया है। इस अवसर पर उन्होंने कहा, ‘जब मूल पुस्तक मेरे पास आई तो मेरी शारीरिक व मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन इसे पढ़ने के बाद मेरे अंदर काफी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ और मैंने तय किया कि यह किताब मराठी में भी लोगों के पास पहुंचेगी। इसके बाद मैंने बीमारी की अवस्था में ही इसका अनुवाद किया।” उन्होंने सत्यार्थी को संत बताते हुए कहा कि यह पुस्तक लोगों की ज़िंदगी बदल सकती है।

Advertisement

उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा देता है जीडीपी वाला विकास

नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा, “हमें एक समाधान मूलक समाज का निर्माण करना है। आज जरूरत है करुणा पर आधारित एक ऐसे समाज की जो विवेकपूर्ण तरीके से नि:स्वार्थ काम करे। आज सारी चीजों का भूमंडलीकरण हो चुका है और इसके बावजूद दुनिया युद्ध, शोषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से घिरी है। इनके समाधान के लिए सबसे पहली जरूरत करुणा के भूमंडलीकरण की है। एक ऐसा वैश्विक समाज जो दूसरों के दुख दर्द को महसूस कर सके। जीडीपी केंद्रित विकास सिर्फ उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा देता है। ऐसा विकास हमारे सामने मौजूद समस्याओं का हल नहीं निकाल सकता।”

सवा लाख से अधिक बच्चों को बाल श्रम से दिला चुके हैं मुक्ति

मूल रूप से हिंदी में लिखी गई इस पुस्तक में लेखक शिवकुमार शर्मा ने कैलाश सत्यार्थी के जीवन से जुड़ी ऐसी घटनाओं और प्रसंगों का उल्लेख किया है जो उनके संवेदनशील और जुझारू व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को उनके विविध रंगों में सामने लाते हैं। अच्छी खासी नौकरी छोड़कर बच्चों के हक की आवाज उठाने वाले कैलाश सत्यार्थी को वर्ष 2014 में दुनिया के सर्वोच्च सम्मान नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बचपन बचाओ आंदोलन के जरिए वे अब तक सवा लाख से अधिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्ति दिला चुके हैं। अंत में डॉ. मनोज नेसरी धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

Advertisement
Advertisement
Tags :
Advertisement
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो