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जीवन शैली: गीत-संगीत के साथ बदलें जिंदगी के सुर

चिकित्सा के लिहाज से देखें तो गीत दिमाग और दिल को तो सुकून देता ही है, कहीं किसी कोने में बैठ गए तनाव को भी कम करता है और अगर कभी-कभी गाना गा लिया जाए, तो इससे न केवल मन, बल्कि शरीर से जुड़ी परेशानियां भी कम होती हैं, यानी मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: April 28, 2024 13:56 IST
जीवन शैली  गीत संगीत के साथ बदलें जिंदगी के सुर
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(सोशल मीडिया)।
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गीत-संगीत केवल सुर की लहरों का आनंद भर नहीं होता, बल्कि अगर यह जीवनशैली में एक सहज हिस्सा बनता है तो कई स्तरों पर राहत और सुकून के पल लेकर आता है। केवल सुनना और गुनना नहीं, बल्कि मन ही मन या कभी आवाज के साथ गुनगुना लेना मानो भीतर के किसी गुबार को बाहर निकाल देता है और मन पर पड़े बोझ को हल्का कर देता है।

चिकित्सा के लिहाज से देखें तो गीत दिमाग और दिल को तो सुकून देता ही है, कहीं किसी कोने में बैठ गए तनाव को भी कम करता है और अगर कभी-कभी गाना गा लिया जाए, तो इससे न केवल मन, बल्कि शरीर से जुड़ी परेशानियां भी कम होती हैं, यानी मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

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राहत की राह

कई बार लोग सबके सामने तो कोई गीत गाने से हिचकते हैं, यह कहते हुए उन्हें गाना नहीं आता या फिर उनके पास अच्छा सुर नहीं है। मगर सच यह है कि जो लोग सार्वजनिक रूप से गाना नहीं चाहते, उन्हें भी गुनगुनाना पसंद होता है। आसपास या खुद हम खुद में झांकें तब पता चलेगा कि कभी अकेले में तो कभी स्नान घर में अपनी पसंद का कोई गीत हम गुनगुना ही लेते हैं।

अगर गौर किया जाए तब यह महसूस होगा कि कोई गीत गाने के बाद हमें राहत महसूस होगी, मन को अच्छा लगेगा। ऐसा भी देखा गया है कि इससे शरीर में किसी समस्या को कम या दूर करने में भी मदद मिलती है। गीत गुनगुनाने से शब्दों के उच्चारण में स्पष्टता और शुद्धता के अलावा, फेफड़े और प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होने और खरार्टों में राहत मिलने के साथ-साथ कई अन्य फायदे भी मिल जाते हैं।

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आत्मविश्वास के सुर

इस तरह का सुख हासिल करने के लिए सुर का साधन होना या शास्त्रीय संगीत का विद्वान होना जरूरी नहीं है। बस गीत गाना अच्छा लगने की बात है। अगर सबके सामने गाना बिल्कुल संभव न हो तो कम के कम अकेले में जरूर गाना चाहिए। हालांकि जैसा भी सुर है, उसी में अपनी पसंद के मुताबिक आसान-सा गीत अपने नजदीकियों को सुना दिया जाए तो राहत के साथ-साथ आत्मविश्वास में भी मजबूती आती है।

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सकारात्मक राह

एक अहम पक्ष यह है कि अगर किसी व्यक्ति के भीतर सार्वजनिक माहौल या गतिविधियों को लेकर किसी तरह उदासीनता घर कर गई है, तो गीत-संगीत को जीवनशैली का हिस्सा बनाना फायदे का जरिया हो सकता है। निजी पलों में गीत गुनगुनाने से मन खुश होगा, लेकिन अगर किसी समूह में गाया जाए तो शरीर में कुछ ऐसे हार्मोन निकलते हैं, जिससे कई ऐसी बातें भी हमें अच्छी लगने लगती हैं, जिनके प्रति हमारा मन उदासीन रहता है। इससे नकारात्मक भावना दूर होती है और सकारात्मक भावना मजबूत होती है, जिससे किसी काम को आगे बढ़ाने या पूरा करने में मदद मिलती है।

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