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दुनिया मेरे आगे: अमीर बनने के लिए परिश्रम और संकल्प की जरूरत

जुआ खेलकर पैसा कमाने की लत किसी युवा को एक बार लग गई, तो आसानी से नहीं छोड़ती।
Written by: Bishwa Jha | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: September 30, 2023 10:03 IST
दुनिया मेरे आगे  अमीर बनने के लिए परिश्रम और संकल्प की जरूरत
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो-(इंडियन एक्‍सप्रेस )।
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पूनम पांडे

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समृद्धि और कमाई की ख्वाहिश रखना मनुष्य की सहज वृत्ति है। मगर रुपया, पैसा, धन-दौलत, समृद्धि आदि जिसके अधीन मानी जाती रही है, वह है परिश्रम और संकल्प। कुछ युवा एक रात में ही अमीर बन जाना चाहते हैं और इस धुन में जुआ-लाटरी, शेयर बाजार, सट्टा आदि के चक्कर में पड़ जाते हैं। मगर इस तरह अमीर बनने का ख्वाब महज भ्रम है, क्योंकि ऐसा कभी नहीं होता कि कोई इंसान रातोरात अमीर बन जाए। ‘एक रात में कुबेर का खजाना आपके पास’ जैसी कितनी ही योजनाएं विज्ञापनों में आती हैं, जो केवल धोखा देती हैं।

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मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि इन सबमें ऐसी कोई बात होती है, जो आपको चकाचौंध करके कुछ चीजों को हासिल करने के लिए मजबूर करती और अंत में आपको भयंकर खतरे में डाल सकती हैं। एक रात में करोड़पति बनाने की तरकीबों में लाटरी, घुड़दौड़, सट्टेबाजी और कार्ड गेम के अनेक प्रकार शामिल हैं।

अकेले भारत में हर साल सात सौ से अधिक ऐसे अमीर बनाने के घोटाले सामने आ रहे हैं, जिनमें कोई लाख या दस लाख नहीं, सत्तर-अस्सी करोड़ रुपए के घोटाले हो जाते हैं। चंद लोग लाखों लोगों को सपना दिखाकर उनकी जमा-पूंजी लूटकर उनको दिन में ही तारे दिखा देते हैं। दौलत पाने की चाहत में पांसा ऐसा उलटा पड़ जाता है कि लोग और गरीब हो जाते हैं।

समाज मनोविज्ञान कहता है कि किसी भी समाज की कम से कम पांच प्रतिशत जनसंख्या की मानसिकता में मोह, लोभ, लालच और लंपटता होती ही है। बस कुछ लोग इसी बात का फायदा उठा लेते हैं। हर साल बहुत सारी चिटफंड कंपनियां घोटाले करके भाग जाती हैं और हमेशा वही लोग इनके झांसे में आ जाते हैं, जो बगैर मेहनत के समृद्धि पाना चाहते हैं।

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जुआ खेलकर पैसा कमाने की लत किसी युवा को एक बार लग गई, तो आसानी से नहीं छोड़ती। यह आमतौर पर उन लोगों में देखी जाती है, जो सोलह से तीस की आयु वर्ग के हैं। यह वह उम्र है, जब पैसा महत्त्वपूर्ण हो जाता है और उम्मीद बढ़ जाती है। मशहूर मनोवैज्ञानिक एडलर के अनुसार, ‘जब किसी को अपने सामने एक ऐसी अकेली मिसाल भी दिखाई दे जाती है कि किसी ने जल्दी पैसा बना लिया तो उसका जल्दबाज स्वभाव और गरम लहू उसे यही करके धन कमाने को उकसाता है।’

इसका दूसरा पक्ष बहुत दुखद है- इसमें धनकमाऊ निवेश के लिए प्रियजनों और सहयोगियों से झूठ बोलना, आधी-अधूरी बातें बताना, धोखाधड़ी, लूट या गबन जैसे आपराधिक व्यवहार भी शामिल होने लगते हैं। कहां उम्र मेहनत करके, पसीना बहा कर शान से जीने के लिए होती और कहां नौकरी या रिश्तों को भी धोखे में रखने जैसे कुकृत्य होने लगते हैं। जब तक पांव जमीन पर आते हैं, तब तक बुरा हाल हो जाता है।

इन तरीकों से पैसा कमाने की नाकाम कोशिश करते वक्त व्यक्ति बेचैन या चिड़चिड़ा महसूस करता है। यह आदत मेहनत, अनुशासन, नियमित जीवन आदि से पलायन का एक कारण बन जाती है। यह शरीर को भी प्रभावित करता है। डाक्टरों का भी कहना है कि जीवन-शैली संबंधी लगभग सभी विकार उन लोगों में दिखाई देते हैं, जो लगातार निष्क्रिय होकर इस रास्ते से पैसा कमाने का जतन करते हैं।

ये दुष्परिणाम रुकते नहीं हैं। एक के बाद एक मानसिक बीमारी हमला करने लगती है। जैसे हर पल असहाय महसूस करना, चिंता, अपराध, बेचैनी, हृदय रोग और लगातार निराशा और अवसाद की भावनाओं में सिगरेट, शराब आदि का सेवन शुरू हो जाता है और फिर हौले-हौले पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है।

झटपट पैसा कमाने के गलत रास्ते पर चलने वाले लोगों की बीमारियां तो और भी हैं, जैसे झूठ बोलने की आदत से हकलाने लगना, उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि की समस्याएं। अध्ययनों के अनुसार, इस तरह की संलग्नता से नींद में भी तनाव हो सकता है, जो सीधे रूप से मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन तंत्र पर प्रत्यक्ष असर डालता है।

जल्दी पैसा कहां से आएगा, इसकी चिंता में पैसे से खेलने वालों के व्यवहार में एक और नकारात्मक बदलाव होता है कि जीतने के साथ लगातार व्यस्तता व्यक्ति को और अधिक चिंतित कर देती है। वह जीतने के उत्साह में कमी, हताशा, अवसाद और चिंता के बीच घिरा रहता है। कुछ लोग भाग्यवादी मानसिकता से भी गहरे तक जुड़े रहते हैं और जुआ लाटरी आदि में अपना ‘भाग्य’ आजमाते रहते हैं तथा यह भूल ही जाते हैं कि किस्मत कर्म की कलम से ही लिखी जाती है। जल्दी अमीर बनने के ख्वाहिशमंदों को जल्दी ही यह सत्य स्वीकार कर लेना चाहिए कि तारे-सितारे, भाग्य, यह सब किसने देखा है, पर हिम्मत और मेहनत तो किसी के साथ सहयोगी बनने को तैयार है और फल मिलने की गारंटी भी पूरी देती है।

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