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दुनिया मेरे आगे: हास्यबोध है स्‍वस्‍थ्‍य व सुखद जीवन का आधार

हंसी का मतलब रिश्तों से है। गौर से देखें तो हमारे अंदर हास्यबोध या ‘सेंस आफ ह्यूमर’ होता है, लेकिन उसका उपयोग हम कितना करते हैं, यह हमारी मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: December 06, 2023 10:09 IST
दुनिया मेरे आगे  हास्यबोध है स्‍वस्‍थ्‍य व सुखद जीवन का आधार
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो- (इंडियन एक्‍सप्रेस)।
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लोकेंद्रसिंह कोट

जीवन कई मायनों में भारी-भरकम है और उसे समय-समय पर हल्का नहीं करने पर तनाव में बदलता जाता है और जीवन का भार और अधिक हो जाता है। यही अधिक भार हमें या तो अवसाद में पहुंचाता है या फिर धीरे-धीरे असंवेदनशील, एकाकी और जड़ बनाने लगता है। अमेरिका की मैरीलैंड विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रोफेसर राबर्ट प्रोवाइन का कहना है कि हंसी इंसान का सामाजिक संकेत देने का जरिया है।

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हंसी का मतलब रिश्तों से है। गौर से देखें तो हमारे अंदर हास्यबोध या ‘सेंस आफ ह्यूमर’ होता है, लेकिन उसका उपयोग हम कितना करते हैं, यह हमारी मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। इस आपाधापी में सामान्यजन की मानसिक स्थिति ऊहापोह से गुजरती है और ऐसे में हास्य विरले ही नजर आ पाता है।

चुटकुलों के बारे में सबसे लंबे वक्त तक चलने वाला सिद्धांत सोलहवीं सदी के ब्रिटिश दार्शनिक थामस हाब्स ने दिया था। उन्होंने कहा था कि हास्य-व्यंग असल में कमजोर का मजाक उड़ाना और अपनी श्रेष्ठता दिखाना होता है। हालांकि बहुत से लोग इस बात से इत्तिफाक नहीं रखते। हंसी-मजाक पर शोध करने वाले तंत्रिका वैज्ञानिक स्काट वीम्स का कहना है कि चुटकुलों के माध्यम से हंसी-मजाक ऐसा जरिया है, जिससे हम इंसानों को हर बार दूसरे को छड़ी से मारने की जरूरत नहीं पड़ती। हम मजाक उड़ाकर उसे सता लेते हैं।

वे बताते हैं कि हमारे दिमाग का जो हिस्सा हंसी-मजाक को समझता है, वह बहुत पेचीदा और घुमावदार आयामों को समझने का भी काम करता है। यानी मजाक करना और मजाक समझना कोई हंसी-खेल नहीं! इसके जरिए हम मुश्किल बातों या खयालों के जाल से निकलने की कोशिश करते हैं। इस मसले पर प्रोफेसर सोफी स्काट का विचार है कि चुटकुले सुनकर हंसी के जरिए हमारा अवचेतन मन यह संकेत देता है कि हम सुकून में हैं और सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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शोध बताते हैं कि जब हमारा दिमाग सुकून में होता है तो हमारे जेहन में ज्यादा अच्छे विचार आते हैं। हम खुलकर काम करते हैं, तो बेहतर नतीजे निकलते हैं। हम ज्यादा रचनात्मक हो जाते हैं। एक शोध अध्ययन के दौरान कुछ लोगों को हास्य कलाकार राबिन विलियम्स का वीडियो दिखाया गया। इसके बाद उन लोगों ने दूसरे समूह के मुकाबले एक पहेली ज्यादा आसानी से हल कर ली।

एक अन्य अध्ययन के मुताबिक, अगर हम हर रोज दस से पंद्रह मिनट तक खुलकर हंसते हैं तो लगभग दस से चालीस फीसद कैलोरी खर्च होती है। इसी तरह, अगर कोई व्यक्ति दिन में आधा घंटा हंस लेता है तो उसे जिम जाने के फायदे हंसने से ही मिल जाएंगे। ऐसा भी कहा जाता है कि हृदय के लिए कोई विशेष व्यायाम नहीं है, लेकिन हंसने से हृदय की कसरत होती है।

रक्त का संचार बेहतर होता है। हंसने पर हमारे फेफड़े फूलते-पिचकते हैं। ऐसा होने पर पर मस्तिष्क के एंडार्फिन प्रणाली पर सकारात्मक असर पड़ता है। नतीजा, इंसान खुद को काफी आरामदेह स्थिति में पाता है। व्यक्ति के अंदर बनने वाले तनाव के हार्मोन में कमी आती है और तनाव घटने लगता है।

अमेरिकी मनोवैज्ञानिक एवनर जिव ने हास्य पर किताब लिखी है- ‘पर्सनालिटी एंड सेंस आफ ह्यूमर’। वे कहते हैं कि कामेडी और हास्य लेखन के जरिए मजाक में समाज में सुधार की कोशिश की जाती है। दोनों से हमें यह समझ में आता है कि समाज में हास्य की कितनी अहम जगह है।
व्यंग्य इसी विधा का उच्चतर स्तर है जहां सब कुछ हंसी-मजाक में मखमल लपेटी छड़ी से व्यक्ति, वस्तु, परिस्थिति पर चोट की जाती है।

आदमी के दिमाग की जांच से यह भी पता चलता है कि हंसी फैलती है। यहां तक कि जब कोई किसी बेवजह की बात पर भी हंसता है तो इसमें उसका दिमाग भी सक्रिय हो जाता है और आस-पड़ोस में बैठे अनजान लोग भी हंस देते हैं। अगर ठहाका मार कर किसी हंसते हुए व्यक्ति को हम देखते हैं तो हमारी ग्रंथियां सक्रिय हो उठती हैं और हमारी भी मुस्कराहट निकल ही जाती है।

चुटकुले सुनाना भी एक कला है। उसमें आवाजों का उतार-चढ़ाव, देहभाषा मायने रखती है। कई बार चुटकुलों में दम नहीं होता है, लेकिन उसे सुनाने वाला मजेदार होता है तो वही चुटकुला सार्थक हंसी उत्पन्न कर देता है। हास्य की भावना सबसे महत्त्वपूर्ण गुणों में से एक है। जो लोग मजाक करने और लोगों को हंसाने में सक्षम हैं, वे अपने और दूसरों के लिए एक बाम या मरहम की तरह हैं। चुटकुलों की दुनिया बड़ी शानदार है।

सबसे बड़ा पक्ष यह है कि मोटे तौर पर जानवर भी वह सब कर लेते हैं, जो इंसान करता है। वे सिर्फ खुलकर हंस नहीं सकते। यही अंतर है। चुटकुलों की दुनिया हमारे बाकी के कार्य-व्यापार के साथ-साथ, समांतर चल रही है, बढ़ रही है और निरंतर कायम है। इसे मनोरंजन के किसी भी अन्य माध्यम से कोई खतरा नहीं है।

हम चाहे जितनी भी तकनीकी तरक्की कर लें, लेकिन हंसने का कार्य तो हम वैसे ही करेंगे। हमें गंभीर ही नहीं बने रहना है, बल्कि जिंदगी से कुछ लम्हे चुराकर हंसना-हंसाना है, हास्य-रस का लुत्फ उठाना है तो निश्चय ही चुटकुले हमारे मनोरंजन के सबसे बड़े और सर्व-सुलभ साथी सिद्ध होंगे।

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