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दुनिया मेरे आगे: लक्ष्य और ध्यान का संबंध, चलते रहने के साथ ही पहुंचना कहां है पता होना जरूरी

जीवन में लक्ष्य होने से मनुष्य को मालूम होता है कि उसे किस दिशा की ओर जाना है। वास्तव में असली जीवन उसी का है जो परिस्थितियों को बदलने का साहस रखता है और अपना लक्ष्य निर्धारित करके अपनी राह खुद बनाता है।
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | Updated: January 29, 2024 09:31 IST
दुनिया मेरे आगे  लक्ष्य और ध्यान का संबंध  चलते रहने के साथ ही पहुंचना कहां है पता होना जरूरी
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो-(फ्रीपिक )।
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लवली आनंद

मानव मन का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि इसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। इसका एक दूसरा पहलू भी है कि यह चंचल है। यही कारण है कि हमारे जीवन में लक्ष्य को निर्धारित करने की आवश्यकता होती है, ताकि हम एक स्पष्ट दिशा में आगे बढ़ते रहें और अपने द्वारा निर्धारित की गई एक ऊंचाई को छू सकें। मगर आज की भागमभाग भरी जिंदगी में ऐसा देखा जा रहा है कि इंसान अपने ही तय किए गए लक्ष्य को पाकर भी सुकून में नहीं है। इसके पीछे कारण संभवत: बहुत छोटा है, लेकिन इसके प्रभाव की पीड़ा से त्रस्त होने वाले इंसानों की संख्या बढ़ती जा रही है।

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यह जीवन ईश्वर का दिया हुआ एक अनमोल उपहार है, लेकिन उद्देश्य के बिना यह निरर्थक हो जाता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक लक्ष्य का होना महत्त्वपूर्ण है। विद्यार्थी जीवन के दौरान उद्देश्य निर्धारित करना विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। स्पष्ट लक्ष्य वाला व्यक्ति बिना लक्ष्य वाले व्यक्ति से बेहतर प्रदर्शन करता है। यह जाने बिना कि हम क्या चाहते हैं, कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा की कमी होती है। एक पूर्ण जीवन जीने और चुनौतियों से निपटने के लिए एक सुविचारित योजना का होना आवश्यक है। इसलिए हर किसी का एक जीवन लक्ष्य होना चाहिए।

क्या हासिल करना है ध्यान उस पर फोकस रहना चाहिए

जीवन में लक्ष्य होने से मनुष्य को मालूम होता है कि उसे किस दिशा की ओर जाना है। वास्तव में असली जीवन उसी का है जो परिस्थितियों को बदलने का साहस रखता है और अपना लक्ष्य निर्धारित करके अपनी राह खुद बनाता है। कहा भी गया है कि जो कुछ करता है, वही सफल-असफल होता है। हमारा लक्ष्य कुछ भी हो सकता है, क्योंकि हर इंसान अपनी क्षमताओं के अनुसार ही लक्ष्य तय करता है। हर महान व्यक्ति एक समय में छोटा बालक होता है। हर बड़ी इमारत एक समय में केवल नक्शा ही होती है, इसलिए किसी भी परिस्थिति में घबराने के बजाय मजबूती के साथ इसका सामना किया जा सकता है। महत्त्वपूर्ण यह नहीं है कि आज हम कहां खड़े हैं, बल्कि जरूरी यह है कि भविष्य में हम कहां खड़े हो सकते हैं। इसलिए हमेशा खुद पर विश्वास रखने के साथ-साथ क्या हासिल करना है, केवल उस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

असल में अपने जीवन के लक्ष्य के निर्धारण के समय या तो हम इसकी गंभीरता समझे बिना या अनजाने में किसी अन्य की नकल कर बैठते हैं। या कभी-कभी हम सामाजिक दिखावे, किसी प्रभाव या दबाव में उस लक्ष्य का चुनाव कर लेते हैं, जो व्यक्तिगत तौर पर हमारी प्रकृति या स्वभाव से मेल नहीं खाता है। इसलिए यह समझना आवश्यक हो जाता है कि हम कैसे उस लक्ष्य का चुनाव करें जो प्राप्त होने की अवस्था में हमारे लिए केवल एक दिखावटी उपलब्धि न हो, बल्कि हमें सुकून, शांति और संतुष्टि प्रदान कर सके। एक इसका सीधा और सरल तरीका यही है कि जब हम अपने लक्ष्य निर्धारित करते हैं, जिस पर पूरी जीवन की व्यक्तिगत परिभाषा और पहचान टिकी होती है, उस लक्ष्य को चुनते या निर्धारित करते समय केवल तात्कालिक मनोदशा को ध्यान में नहीं रखना चाहिए, बल्कि हमें भविष्य में प्राप्त होने वाले उस लक्ष्य को कल्पना में उसी क्षण जी लेना चाहिए। यह महसूस करना चाहिए कि क्या उसके लिए अपना जीवन लगा देना उपयुक्त है।

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हमें यह समझने की आवश्यकता है कि हमारे जीवन के अंत में हमारे लिए केवल यही मायने रखता है कि क्या हम अपने जीवन से संतुष्ट हैं या क्या हमने भरपूर जीवन जिया। इसीलिए जीवन की दिशा और दशा की ऊंचाई निर्धारित करने से पहले उस अंतिम बिंदु को बहुत गंभीरता के साथ तय करना आवश्यक हो जाता है, जिसे हम अपना जीवन देकर प्राप्त करने वाले हैं।

जब हम कोई कर्म करते हैं तो जरूरी नहीं कि हमें सफलता मिल ही जाए, लेकिन हमें असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। अगर बार-बार भी असफलता हाथ आती है तो भी निराश नहीं होना चाहिए। इस बारे में विवेकानंद कहते हैं कि ‘एक हजार बार प्रयास करने के बाद अगर आप हार कर गिर पड़े हैं तो एक बार फिर से उठें और प्रयास करें।’ हमें लक्ष्य की प्राप्ति तक अपने आप पर विश्वास और आस्था को मजबूत रखने के साथ अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखना चाहिए। कोई भी लक्ष्य बिना संघर्ष और मेहनत के प्राप्त नहीं किया जा सकता। लक्ष्य प्राप्ति के लिए उपलब्ध संसाधनों और समय का सही संतुलन बनाना होता है। जीवन का उद्देश्य केवल किसी लक्ष्य को हासिल करना न होकर प्रसन्नता के साथ सफलता प्राप्त करना होना चाहिए।

कभी भी धन या शक्ति को अपने अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य बनाना अनुचित ही है, चाहे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता मिले या असफलता। प्राथमिक ध्यान बिना किसी को नुकसान पहुंचाए अपनी भलाई, आनंद और संतुष्टि के लिए निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने पर होना चाहिए। सफलता की कुंजी एक सक्रिय मानसिकता के साथ समय पर कार्य को करने में होती है। प्रेरित रहने के लिए, एक प्रभावी दृष्टिकोण सकारात्मक परिवर्तनों की कल्पना करना और रास्ते में प्रत्येक छोटी उपलब्धि को प्राप्त करने का जश्न मनाना चाहिए।

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