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दुनिया मेरे आगे: सफलता के लिए लगातार प्रयास है सबसे जरूरी, अभ्यास का अलग ही है आनंद

हर इंसान के भीतर असीम शक्ति है। छोटे से छोटे अवसरों का समय पर उपयोग किया जाए, तो बड़े अवसर खुद सामने आकर खड़े हो जाते हैं। कोई भी शुरू में बड़े काम नहीं करता, छोटे-छोटे काम करता हुआ आगे बढ़ता है। बस केंद्रित रह कर करते जाना ही हर सफलता की चाबी है। पढ़ें अमिताभ स. के विचार-
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | Updated: July 10, 2024 02:54 IST
दुनिया मेरे आगे  सफलता के लिए लगातार प्रयास है सबसे जरूरी  अभ्यास का अलग ही है आनंद
प्रतीकात्मक तस्वीर
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सच है कि मंजिल हासिल करने के लिए अभ्यास सबसे बड़ी कुंजी है। अभ्यास की बड़ी खूबी है कि इसे करने से अनाड़ी से अनाड़ी भी खिलाड़ी बन जाता है। अभ्यास करते-करते भी जब तक मंजिल न मिले, तब तक बेशक सब असंभव लगे, लेकिन देर-सवेर मंजिल शर्तिया हासिल हो जाती है। इसीलिए तीसरी तक की प्राथमिक कक्षाओं में श्रुतिलेख में त्रुटियों के सुधार के लिए हर गलत शब्द को कई बार लिखवा कर अभ्यास करवाया जाता है। वास्तव में, इस तरह अभ्यास करने से हर गलती को सुधारने और फिर हर काम को करने की महारत हासिल करने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। बड़ा या छोटा, हर कुछ पाने के लिए अभ्यास करना ही पड़ता है। क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी अक्सर बताते हैं कि ‘मेरी बारहवीं की परीक्षा और मेरे मैच भी साथ-साथ चल रहे थे। मुझे परीक्षा देनी थी, फिर ट्रेन पकड़ कर मैच खेलने जाना था और मैच खेल कर लौटना था। लेकिन दुविधा थी कि पिताजी को कैसे बताऊं! बड़ी हिम्मत बटोर कर पिताजी को बताया, तो उन्होंने सहजता से समझाया कि अगर साल भर मेहनत की होगी, तो एक दिन से फर्क नहीं पड़ेगा और अगर साल भर मेहनत नहीं की होगी तो भी एक दिन में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।’

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बच्चों और बड़ों की मनपसंद लूडो और सांप-सीढ़ी जैसे खेल की तरह जिंदगी भी अभ्यास का खेल है। इनका पासा कभी मनचाहा अंक नहीं देता, तो कभी जरूरत के अंकों की बौछार कर देता है। फिर भी अगला पांसा फेंकना जारी रखना पड़ता है। अगर हम उड़ नहीं सकते, तो दौड़ें। अगर दौड़ नहीं सकते, तो चलें। अगर चल भी नहीं सकते, तो रेंगते-रेंगते बढ़ें। यानी कुछ भी हो, हमेशा आगे बढ़ते रहा जाए, बढ़ने का अभ्यास जारी रखा जाए। जब कभी लगे कि हार गए, तो भी एक उम्मीद फिर भी बची रह जाती है कि थोड़ा और अभ्यास कर लिया जाए। महज इतने भर से बाजी पलट जाती है।
यानी जीवन में मंजिल हासिल करने का एक ही रास्ता है- अभ्यास जारी रखा जाए। सबसे खुशकिस्मत वह है, जिसे जिंदगी में जब-जब अवसर मिले, वह अभ्यास करते रहने के लिए तैयार रहे। केवल ऐसे कर्मशीलों के लिए ही राहें खुलती जाती हैं। नीदरलैंड के महान विद्वान डेसिडेरियस इरेजमस कहते हैं, ‘इंसान के सिवा सभी प्राणी अपने में संतुष्ट रहते हैं, केवल इंसान ही आगे बढ़ने के प्रयास और अभ्यास करता है।’

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जब इंसानी फितरत ही अभ्यास करना हैÞ, तो फिर अभ्यास क्यों छोड़ना? इसलिए अभ्यास का दामन थामे रहने में ही भलाई है। निस्संदेह हर इंसान के भीतर असीम शक्ति है। छोटे से छोटे अवसरों का समय पर उपयोग किया जाए, तो बड़े अवसर खुद सामने आकर खड़े हो जाते हैं। कोई भी शुरू में बड़े काम नहीं करता, छोटे-छोटे काम करता हुआ आगे बढ़ता है। बस, केंद्रित रह कर करते जाना ही हर सफलता की चाबी है। कोई किसी भी क्षेत्र में जुटा हो, उसे खास अवसर के लिए तैयार रहना है और अवसर हाथ लगते ही अपनी पूरी शक्ति झोंक देनी है। ऐसा करने वाला कतई असफल नहीं हो सकता। लेकिन ऐसा तभी मुमकिन है, जब करत-करत अभ्यास के सिद्धांत को निरंतर अपनाया जाए, और उस पर पूरी तरह अमल किया जाए। करने की नीयत, खुद पर भरोसा और कड़ी मेहनत हमेशा बेहतर मौके मुहैया कराती है। लेखक सैम्युएल स्माइल्स मिले अवसर गंवाने पर दो टूक कहते हैं- ‘कम इसलिए हासिल हुआ, क्योंकि उसे करने के प्रयत्न कम हुए।’ यानी सर्वश्रेष्ठ पाने के लिए अभ्यास कम हुए।

कुछ साल पहले एक जानी-मानी अभिनेत्री ने एक टीवी रियलिटी शो में जाहिर किया था कि ‘हर माता-पिता की तरह मेरी मां ने मेरे जन्म से पहले न केवल नाम तय किया, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर दिया कि मुझे चोटी की नर्तकी और अभिनेत्री बनाएंगी। फिर वे इसे मुमकिन करने में जुट गईं और ऐसा ही कर दिखाया।’ यानी अभ्यास कुछ हासिल करने के लिए योग्यता से बढ़ कर है। योग्यता, क्षमता और प्रतिभा के तभी मायने हैं, जब करने की इच्छा से आगे बढ़ें और सही नीयत से अभ्यास करते रहें। जब तक अभ्यास को सक्रिय न रखा जाए, तब तक काबिलियत का कोई मूल्य नहीं है।

मशहूर शायर अल्लामा इकबाल ने भी फरमाया है- ‘खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है।’ सच ही है कि जीवन में वही लोग सफल होते हैं, जो जानते हैं कि वे सफल होंगे। आविष्कारक थामस एडिसन की राय में, ‘कतई मत कहिए कि मैं निन्यानबे बार हारा हूं, बल्कि कहें कि मैंने हारने की निन्यानबे वजहें ढूंढ़ी हैं।’ फिर उन्हीं वजहों को पार कर, अभ्यास जारी रख, जीत की राह खुलती है। जाहिर है कि अभ्यास और कोशिशें करना सबसे बड़ी बात है। सदा सीखने और हासिल करने की आदत तमाम कामों में सुधार लाती जाती है। तय है कि इंसान अभ्यास से जिस हद तक खुद को सक्षम बनाता है, निपुण बनाता है, कुशल बनाता है और संभावना को जितना विकसित करता है, वह उतनी ही सफलता पाता जाता है।

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