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हाईकोर्ट के आदेश का माखौल उड़ा रहे थे IAS ऑफिसर, जस्टिस को आया गुस्सा तो पहुंच गए महीने भर के लिए जेल

लगातार आदेश की अवहेलना होने पर जस्टिस का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा और उन्होंने दो आईएएस समेत पांच अफसरों को 1 महीने के लिए जेल के भीतर भेज दिया।
Written by: shailendragautam
Updated: May 11, 2023 16:38 IST
हाईकोर्ट के आदेश का माखौल उड़ा रहे थे ias ऑफिसर  जस्टिस को आया गुस्सा तो पहुंच गए महीने भर के लिए जेल
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स- pexels)
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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश का माखौल उड़ाना दो आईएएस ऑफिसर्स समेत पांच सरकारी अधिकारियों को खासा भारी पड़ गया है। बार-बार आदेश की अवहेलना होने पर जस्टिस का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा और उन्होंने पांचों को 1 महीने के लिए जेल के भीतर भेज दिया।

जस्टिस के मनमधा राव ने पांचों अफसरों को अदालत की अवमानना के मामले में जेल भेजा। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि अधिकारियों ने जानबूझकर हाईकोर्ट के उस आदेश की अवहेलना की जो अगस्त 2022 में दिया गया था। जस्टिस ने कहा कि अफसर आदेश की पालना के नाम पर कोर्ट से मोहलत लेते रहे। इसी बीच उन्होंने आदेश को स्थगित करने के लिए एक याचिका भी दायर कर दी। मतलब साफ है कि वो किसी भी सूरत में हाईकोर्ट के आदेश को लागू नहीं करना चाहते थे। जब भी उनसे सवाल किया गया तो उनका कहना था कि वो आदेश को लागू करने जा रहे हैं।

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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं कर रहे थे परमानेंट

सर्विस मैटर से जुड़े मामले में याचिककर्ताओं का कहना था कि वो लगातार अफसरों के पास जाकर अपनी बात उनके सामने रख रहे थे। उन्हें ये भी कहा गया कि अगस्त 2022 में हाईकोर्ट ने आदेश जारी करके कहा था कि सभी को रेगुलर किया जाए। लेकिन अफसरों ने उनकी बात ही नहीं सुनी। याचिकाकर्ताओं का हाईकोर्ट से कहना था कि ऐसा लगता नहीं है कि आपके आदेश का सरकारी अफसरों पर कोई असर भी है।

उधर अफसरों की तरफ से पेश एडवोकेट की दलील थी कि वो हाईकोर्ट के आदेश को स्थगित करने के लिए याचिका दायर कर चुके हैं। लिहाजा जब तक उनकी अपील पर फैसला नहीं हो जाता तब तक कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट के तहत कोई एक्शन उनके खिलाफ नहीं लिया जा सकता है। उनका ये भी कहना था कि अगर कोर्ट के आदेश में उसकी पालना की कोई अंतिम तिथि नहीं दी गई है तो उसे फैसले के 2 माह के भीतर लागू होना चाहिए।

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जस्टिस बोले- पहले लेते रहे तारीख पर तारीख फिर लगा दी अपील

जस्टिस का कहना था कि हाईकोर्ट ने जो फैसला अगस्त 2022 में दिया था, उसे दो माह के नियम के मुताबिक नवंबर 2022 तक लागू हो जाना चाहिए था। लेकिन अफसरों ने ऐसी कोई जहमत नहीं उठाई जिससे लगे कि उन्हें कोर्ट के आदेश की परवाह भी है। उलटे उन्होंने अपील दायर कर दी। साफ है कि वो अदालत के आदेश को गंभीरता से ले ही नहीं रहे थे। पहले आदेश लागू करने के लिए वो तारीख पर तारीख लेते रहे। फिर अपील लगा दी।

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