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मोदी के CM बनते ही जस्टिस प्रच्छक बने थे सरकारी वकील, PM बनने के बाद दिल्ली से हुआ जुड़ाव, सुन रहे राहुल गांधी का केस

मोदी 2001 में गुजरात के सीएम बने थे। हेमंत प्रच्छक 2002 में सहायक सरकारी वकील बने। 2007 तक वो सरकारी वकील रहे। 2014 में मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो प्रच्छक दिल्ली से जु़ड़ गए।
Written by: shailendragautam
Updated: April 29, 2023 15:51 IST
मोदी के cm बनते ही जस्टिस प्रच्छक बने थे सरकारी वकील  pm बनने के बाद दिल्ली से हुआ जुड़ाव  सुन रहे राहुल गांधी का केस
पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी (फोटो- पीटीआई)
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गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस गीता गोपी ने राहुल गांधी का केस सुनने से इनकार किया तो मामला जस्टिस हेमंत प्रच्छक की बेंच के पास ट्रांसफर हो गया। फिलहाल शनिवार को राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई हो रही है जिसमें उन्होंने सूरत कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई है। इससे पहले सजा के खिलाफ की गई उनकी अपील को सेशन कोर्ट खारिज कर चुकी है।

जानते हैं कौन हैं जस्टिस हेमंत प्रच्छक

जस्टिस हेमंत प्रच्छक का जन्म गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनकी शिक्षा वहीं से हुई। उसके बाद उन्होंने लॉ की पढ़ाई की। लेकिन उनके बारे में एक रोचक तथ्य ये है कि नरेंद्र मोदी के गुजरात का सीएम बनते ही वो गुजरात सरकार के वकील बन गए। मोदी 2001 में गुजरात के सीएम बने थे। हेमंत प्रच्छक 2002 में सहायक सरकारी वकील बने। 2007 तक वो सरकारी वकील रहे। 2014 में मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो प्रच्छक दिल्ली से जु़ड़ गए। उन्हें केंद्र सरकार की तरफ से गुजरात हाईकोर्ट में पैरवी करने का जिम्मा मिला। 2015 में उनका जुड़ाव केंद्र सरकार से हुआ था। 2021 में उनको गुजरात हाईकोर्ट का जज बनाया गया। उनका कार्यकाल 2027 तक का है।

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2019 चुनाव के दौरान कर्नाटक की रैली में दिया था विवादित बयान

2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था कि सभी चोरों का नाम मोदी कैसे है? इसी को लेकर भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि राहुल ने अपनी इस टिप्पणी से समूचे मोदी समुदाय की मानहानि की है। राहुल के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसके बाद राहुल को सूरत की कोर्ट ने दो साल की सजा सुना दी थी। रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट 1951 के तहत उनको सांसदी से भी हाथ धोना पड़ा था। इस कानून के तहत अगर किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधी को दो साल से ज्यादा की जा होती है तो उसकी सांसदी या विधायकी अपने आप खत्म हो जाती है।

राहुल ने अपनी अपील में कहा था- जज ने नहीं किया नुकसान का आकलन

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राहुल गांधी ने सजा को चुनौती देने वाली अपील में कहा था कि जज ने जो फैसला सुनाया उसमें इस बात का भी ध्यान नहीं रखा कि अदालत के फैसले से उन्हें कितना नुकसान होने वाला है। राहुल का कहना था कि रैली में उन्होंने और लोगों का भी नाम लिया था। केवल मोदी नाम को लेकर ही टिप्पणी नहीं की थी। उन्होंने तो मेहुल चोकसी, अनिल अंबानी का नाम लेकर भी सरकार पर आरोप जड़े थे। विपक्ष के नेता होने के नाते वो ऐसा कर सकते हैं।

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