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गौरी यादव: आखिर कैसे पुलिस का मुखबिर बन गया बुंदेलखंड का कुख्यात डाकू, जानिए पूरी कहानी

इनामी डकैत गौरी यादव के एनकाउंटर के बाद पुलिस टीम को उसके पास से भारी मात्रा में कारतूस, एक AK-47, कुछ ऑटोमैटिक और देसी हथियार मिले थे।
Written by: govind | Edited By: Govind Singh
February 15, 2022 17:49 IST
गौरी यादव  आखिर कैसे पुलिस का मुखबिर बन गया बुंदेलखंड का कुख्यात डाकू  जानिए पूरी कहानी
गौरी यादव को चित्रकूट के जंगलों में मार गिराया गया था। (Photo Credit - Indian Express)
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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में ददुआ, ठोकिया, बबुली कोल जैसे कई डकैत हुए लेकिन एक नाम गौरी यादव का भी था, जिसने 20 सालों तक पुलिस को छका रखा था। कभी गौरी पुलिस का मुखबिर हुआ करता था लेकिन डाकुओं की टोह लेते-लेते उसे बीहड़ रास आ गए। इसके बाद उसने आपराधिक कृत्यों से सालों-साल अपना खौफ बरकरार रखा।

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चित्रकूट के बहिलपुरवा थाना के बिलहरी गांव का निवासी गौरी यादव कुख्यात डकैत बनने के पहले पुलिस के लिए मुखबिरी करता था। गौरी यादव का असली नाम उदयभान यादव था। 90 के दशक में पुलिस सबसे खूंखार डकैत ददुआ के पीछे लगी थी। तभी गौरी को एक दारोगा ने मुखबिर बनाया था ताकि ददुआ की खबर मिलती रहे। साल 1992 तक गौरी यादव पुलिस की मदद करता रहा लेकिन डाकुओं की जिंदगी उसे रास आ गई।

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गौरी यादव थोड़े ही दिनों में मुखबिर से डाकू में तब्दील हो गया। साल 2001 में गौरी यादव ने डकैत गोप्पा के साथ जुर्म की दुनिया में कदम रखा था। फिर पुलिस ने मुखबिरी के जो हथकंडे सिखाए और हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी थी, उसे अब गौरी ने अपना रक्षा कवच बना लिया।

गौरी ने पहले डकैती के साथ सरकारी कामकाज में कमीशन वसूलना शुरू किया। फिर उसने इसी धुन में अपहरण, फिरौती और हत्या जैसे संगीन जुर्मों को अंजाम दिया। देखते ही देखते उस पर यूपी सहित एमपी में करीब 60 मुकदमें दर्ज हो गए। इसके बाद उसने ददुआ और ठोकिया के गैंग को भी ज्वाइन किया। हालांकि, दोनों के एनकाउंटर के बाद उसे साल 2008 में जेल भेज दिया गया।

साल 2010 में जेल से रिहा होने के बाद गौरी यादव ने गांव बिलहरी में रहते हुए खुद का गैंग बनाया और डकैती डालना शुरू कर दिया। साल 2013 में गौरी यादव का नाम तब उठा जब उसने चोरी के मामले में दबिश देने पहुंचे दिल्ली पुलिस के एक दारोगा की हत्या कर सरकारी रिवाल्वर लूट ली। इसके बाद उसका आतंक ऐसा था कि अपनी मां को 2016 में गांव का प्रधान बनवा दिया।

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साल 2016 में ही गौरी यादव पर गांव के ही तीन लोगों को बिजली के खंभे में बांधकर गोली मारने का भी आरोप लगा था। वहीं साल 2017 में कुलहुआ के जंगलों में उसने तीन लोगों को जिंदा जलाकर मार दिया था। इस भीषण कांड के बाद गौरी यादव पर 1 लाख का इनाम घोषित कर दिया, हालांकि गौरी का आतंक दिनों-दिन बढ़ता ही रहा।

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सालों तक गौरी यादव को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाए गए लेकिन वह पकड़ में नहीं आया। जैसे उसके आतंक बढ़े वैसे ही उस पर इनाम भी बढ़ता गया। साल 2019 तक उसके निशाने पर PWD के ठेके और जंगल विभाग के अफसर आ गए थे। हर सरकारी काम में कमीशन और जबरन वसूली से विभागों में हाहाकार मचा था।

कई सालों की मशक्कत के बाद अक्टूबर 2021 को पुलिस को सूचना मिली कि गौरी माधव बांध गांव जा रहा है। ऐसे में यूपी पुलिस व एसटीएफ ने एक योजना तैयार की और निगरानी में बैठ गई। 30 अक्टूबर, 2021..सुबह साढ़े तीन बजे एसटीएफ टीम का चित्रकूट के जंगलों में गौरी यादव व उसकी गैंग से सामना हुआ। दोनों ओर से कई राउंड गोलियां चली और इस मुठभेड़ में पुलिस ने साढ़े पांच लाख के इनामी गौरी यादव को मार गिराया गया।

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